डिजिटल क्रेडिट आकलन से MSMEs को 52,300 करोड़ रुपये का सपोर्ट

डिजिटल क्रेडिट आकलन से MSMEs को 52,300 करोड़ रुपये का सपोर्ट

डिजिटल क्रेडिट आकलन से MSMEs को 52,300 करोड़ रुपये का सपोर्ट
भारत के नए डिजिटल क्रेडिट आकलन मॉडल ने एमएसएमई के लिए ऋण प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आसान बना दिया है, जिससे अप्रैल से दिसंबर 2025 तक 3.96 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत हुए।

भारत द्वारा अपनाया गया नया डिजिटल क्रेडिट आकलन मॉडल अब सकारात्मक नतीजे दिखाने लगा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने इस मॉडल के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को 3.96 लाख से अधिक ऋण आवेदन स्वीकृत किए हैं, जिनकी कुल राशि ₹52,300 करोड़ है, जैसा कि DDNews ने रिपोर्ट किया है।

जो लोग इस पहल से परिचित नहीं हैं, उनके लिए बता दें कि भारत ने केंद्रीय बजट 2024–25 में MSMEs के लिए नया डिजिटल क्रेडिट आकलन मॉडल पेश किया था। इस मॉडल के तहत PSBs को अपने स्तर पर ऐसी क्षमताएँ विकसित करनी थीं, जो MSMEs के ऋण आकलन की जिम्मेदारी संभालें और थर्ड-पार्टी सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता कम करें। साथ ही, बैंकों को MSMEs के डिजिटल फुटप्रिंट पर आधारित एक नया क्रेडिट आकलन ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया गया।

डिजिटल ताकत

यह नया मॉडल MSMEs के डिजिटल फुटप्रिंट पर आधारित है, यानी ऐसे सत्यापित और विश्वसनीय डेटा पर जो डिजिटल रूप से उपलब्ध है। इसके आधार पर “MSME ऋण मूल्यांकन के लिए वस्तुनिष्ठ निर्णय प्रक्रिया” अपनाई जाती है, जिसमें मौजूदा बैंक ग्राहक (ETB) और नए ग्राहक (NTB) दोनों के लिए मॉडल-आधारित लिमिट तय की जाती है।

इस प्रक्रिया में KYC जैसी पारंपरिक प्रक्रियाएँ तो शामिल हैं, लेकिन पूरी तरह डिजिटल रूप में। इसमें NSDL के माध्यम से प्रमाणीकरण, मोबाइल और ईमेल OTP सत्यापन, API के जरिए GST डेटा प्राप्त करना, अकाउंट एग्रीगेटर से बैंक स्टेटमेंट विश्लेषण, ITR अपलोड और सत्यापन, क्रेडिट सूचना कंपनियों (CICs) के जरिए क्रेडिट ब्यूरो डेटा, फ्रॉड चेक्स आदि शामिल हैं।

वित्त मंत्रालय ने बताया कि पारंपरिक या मैनुअल तरीकों में बैंक भौतिक दस्तावेजों पर निर्भर रहते हैं, जबकि नए डिजिटल क्रेडिट आकलन मॉडल में आवेदन, डेटा सबमिशन और आकलन पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से होता है।

यह मॉडल क्यों कारगर है?

मंत्रालय के अनुसार, इस प्रणाली में MSME ऋण के लिए पात्रता मानदंडों या बैंक नीतियों में कोई मूलभूत बदलाव नहीं किया गया है। इसका उद्देश्य ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को आसान, तेज और अधिक मानकीकृत बनाना है, जो डिजिटल रूप से उपलब्ध डेटा पर आधारित हो।

एमएसएमई को अक्सर कार्यशील पूंजी की कमी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि जोखिम-भरे माहौल में देनदारियों की अवधि बढ़ जाती है। यह नया मॉडल मौजूदा ढांचे को सरल बनाकर ऋण आवश्यकताओं को सहज करता है और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया MSMEs को अपने व्यवसाय संचालन को लेकर अधिक सजग बनाती है और निर्णय लेने में सहायक होती है।

यह मॉडल ऋणदाताओं और योग्य व्यवसायों—दोनों के लिए फायदेमंद है। बैंकों के लिए यह एक निष्पक्ष प्रणाली है, जो संबंध-आधारित पक्षपात को हटाकर GST, बैंक रिकॉर्ड, ITR और पुनर्भुगतान इतिहास जैसे सत्यापित डेटा के आधार पर क्रेडिट योग्यता तय करती है। इससे कागजी कार्यवाही कम होती है, निर्णय तेजी से लिए जाते हैं और NPA का जोखिम घटता है। साथ ही, जोखिम आकलन में एकरूपता आती है।

सारथी फाइनेंस के चीफ रिस्क एंड एनालिटिक्स ऑफिसर रोहित जैन ने Entrepreneur India से कहा,“भारत में MSMEs की क्रेडिट प्रोफाइल अक्सर कमजोर होती है, आय के स्रोत अनौपचारिक होते हैं और नकदी प्रवाह मौसमी होता है, जिससे पारंपरिक क्रेडिट आकलन धीमा और अप्रभावी बन जाता है। डिजिटल क्रेडिट आकलन मॉडल इस अंतर को पाटता है। यह डेटा संग्रह और जोखिम मूल्यांकन को स्वचालित करता है, लागत और समय दोनों को कम करता है और पुनर्भुगतान क्षमता की बेहतर तस्वीर देता है।”

AI कैसे करता है मदद?

Vaimanika Aerospace के डायरेक्टर (इन्वेस्टर रिलेशंस) जील दोशी का मानना है कि आने वाले समय में कई स्टार्टअप और नई कंपनियाँ उन्नत क्रेडिट अंडरराइटिंग टूल विकसित करेंगी। यही डेटा निवेशकों, वेंचर कैपिटलिस्ट्स, AIFs और प्राइवेट इक्विटी फर्मों द्वारा भी इस्तेमाल किया जाएगा।

उन्होंने कहा,“भविष्य में मानव हस्तक्षेप कम होगा और मशीन लर्निंग का उपयोग पूरे लेंडिंग चक्र में किया जाएगा—ऋण आवेदन से लेकर फ्रॉड पहचान, वित्तीय डेटा विश्लेषण और ऋण स्वीकृति तक। इससे बैंकों का जोखिम कम होगा, NIM बेहतर होगा और NPAs घटेंगे।”

दोशी ने यह भी जोड़ा कि AI टूल्स MSMEs को संभावित जोखिमों के बारे में पहले से जागरूक कर सकते हैं, जिससे डिफॉल्ट की संभावना कम होती है और ऋण एजेंटों की लागत घटती है।

Legalwiz.in के संस्थापक श्रिजय शेठ का कहना है कि चूंकि डेटा इस प्रक्रिया का केंद्र है, इसलिए AI-फर्स्ट दृष्टिकोण अपनाने की बड़ी संभावनाएँ हैं। भविष्य में इस मॉडल में और अधिक आकलन मानदंड जोड़े जा सकते हैं, मौसमी मांग का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और उपयुक्त क्रेडिट उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे वे सूक्ष्म संगठन भी ऋण प्रणाली में आ सकते हैं, जिनके पास फिलहाल ITR या मजबूत वित्तीय डेटा नहीं है।

शेठ ने कहा,“संक्षेप में, यह मॉडल पारदर्शिता, गति, व्यापक पहुंच और आकलन मानकों में एकरूपता लाएगा। इससे योग्य एमएसएमई को बेहतर अवसर मिलेंगे और अयोग्य मामलों की समय पर पहचान हो सकेगी।”

 

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