ईवी  मैन्युफैक्चरिंग में सेंचुरियन यूनिवर्सिटी की बड़ी पहल

ईवी  मैन्युफैक्चरिंग में सेंचुरियन यूनिवर्सिटी की बड़ी पहल

ईवी  मैन्युफैक्चरिंग में सेंचुरियन यूनिवर्सिटी की बड़ी पहल
सेंचुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के प्रेज़िडेंट डॉ मुक्ति कांत मिश्रा ने बताया कि कैसे यूनिवर्सिटी ने शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और ईवी मैन्युफैक्चरिंग को जोड़कर एक सफल इंडस्ट्री-आधारित मॉडल तैयार किया।

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे समय में सेंचुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (Centurion University of Technology and Management) ने शिक्षा और इंडस्ट्री को जोड़ते हुए एक अनोखा मॉडल तैयार किया है, जहाँ छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहते बल्कि वास्तविक ईवी मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन सिस्टम का हिस्सा बनकर सीखते हैं।

सेंचुरियन यूनिवर्सिटी के प्रेज़िडेंट डॉ मुक्ति कांत मिश्रा ने इस विशेष बातचीत में बताया कि कैसे यूनिवर्सिटी ने स्किल-आधारित शिक्षा, इनोवेशन और इंडस्ट्री सहयोग के माध्यम से एक सफल ईवी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार किया। उन्होंने छात्रों की भूमिका, इन-हाउस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, इंडस्ट्री पार्टनरशिप और भारत के ईवी भविष्य को लेकर यूनिवर्सिटी के विज़न पर विस्तार से चर्चा की।

सेंचुरियन यूनिवर्सिटी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में इतनी जल्दी कदम रखने के लिए क्या प्रेरणा ली, खासकर एक अकादमिक (शैक्षणिक) माहौल के रूप में?

मुक्ति कांत मिश्रा: सेंचुरियन यूनिवर्सिटी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में शुरुआत इसलिए की क्योंकि उनका मानना था कि छात्रों को सिर्फ किताबों की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक सिस्टम के साथ काम करने का मौका मिलना चाहिए।

जब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का महत्व मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबिलिटी सेक्टर में तेजी से बढ़ने लगा, तो इसे शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाना जरूरी हो गया। इसका उद्देश्य ट्रेंड का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि छात्रों को उन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव देना था, जिनका सामना उन्हें भविष्य में असल दुनिया में करना पड़ेगा।

क्या ईवी पहल सिर्फ स्किल डेवलपमेंट का एक प्रयोग था, या शुरू से ही इसे एक बड़े बिज़नेस मॉडल के रूप में देखा गया था?

मुक्ति कांत मिश्रा: शुरुआत में यह पहल मुख्य रूप से स्किल डेवलपमेंट के लिए थी। सेंचुरियन यूनिवर्सिटी का उद्देश्य छात्रों के लिए ऐसा सीखने का माहौल बनाना था, जहाँ वे सिर्फ किताबों से नहीं बल्कि वास्तविक तकनीक और प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें।

यह ईवी पहल इसलिए शुरू हुई ताकि छात्रों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में भविष्य के लिए जरूरी कौशल मिल सके।

लेकिन जैसे-जैसे यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ा, इसकी क्वालिटी और उपयोगिता को देखकर समझ आया कि इसमें बाजार में भी बड़ा अवसर है। इसके बाद यह धीरे-धीरे एक स्केलेबल और टिकाऊ बिज़नेस मॉडल में बदल गया।

आज यह पहल शिक्षा, इनोवेशन, रोजगार और उद्यमिता का एक मिश्रण बन चुकी है। इसका उद्देश्य सिर्फ छात्रों को प्रशिक्षित करना नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करना, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत के ईवी  इकोसिस्टम में योगदान देना भी है।

ईवी  मैन्युफैक्चरिंग यूनिट 25 करोड़ रुपये का सफल बिज़नेस बन गया है; इस बदलाव को संभव बनाने वाले मुख्य टर्निंग पॉइंट्स क्या है?

मुक्ति कांत मिश्रा: इस सफलता के पीछे एक बड़ा कारण यह था कि विश्वविद्यालय के अंदर ही एक इंडस्ट्रियल-आधारित इकोसिस्टम बनाया गया, जहाँ छात्रों को असली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और लॉजिस्टिक्स सिस्टम के साथ काम करने का मौका मिला।

इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने प्रैक्टिकल एजुकेशन पर खास जोर दिया। इसमें एंटरप्रेन्योरशिप, एलुमनाई-आधारित यूनिट्स के जरिए पीयर-टू-पीयर लर्निंग, और मार्केट की असली समझ शामिल थी। छात्रों को शुरुआत से लेकर प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन तक पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

आपका ईवी  प्रोडक्शन इकोसिस्टम डिज़ाइन और प्रोटोटाइपिंग से लेकर असेंबली और डिप्लॉयमेंट तक कैसे संरचित है?

मुक्ति कांत मिश्रा: इस सिस्टम को एक्शन लर्निंग लैब्स, प्रोडक्शन सेंटर्स और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के आधार पर बनाया गया है, जहाँ छात्र ईवी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के अलग-अलग चरणों पर काम करते हैं।

विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रों को सिर्फ प्रोटोटाइपिंग या डिज़ाइन तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, मार्केटिंग और सेल्स जैसी गतिविधियों में भी शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य ऐसा लर्निंग माहौल बनाना है जो असली इंडस्ट्रियल सिस्टम जैसा हो।

सेंचुरियन का ईवी मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पारंपरिक ओईएम और नए ईवी स्टार्टअप्स से कैसे अलग है?

मुक्ति कांत मिश्रा: विश्वविद्यालय के इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि इसमें मैन्युफैक्चरिंग और एजुकेशन को बहुत करीब से जोड़ा गया है। छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही प्रोडक्शन एनवायरनमेंट और इंडस्ट्री से जुड़े सिस्टम्स से परिचित कराया जाता है, जिससे उनके सीखने का अनुभव पूरी तरह बदल जाता है।

सेंचुरियन यूनिवर्सिटी में प्रैक्टिकल अनुभव को पढ़ाई के बाद अलग से जोड़ने वाली चीज़ नहीं माना जाता, बल्कि इसे पढ़ाई का ही एक हिस्सा माना जाता है।

जब छात्र सीधे वाहन बनाने में शामिल होते हैं, तो आप इंडस्ट्री-ग्रेड क्वालिटी, सुरक्षा और विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित करते हैं?

मुक्ति कांत मिश्रा: सेंचुरियन यूनिवर्सिटी में छात्रों की इलेक्ट्रिक वाहन बनाने में भागीदारी केवल कक्षा तक सीमित सिमुलेशन नहीं है — यह एक संरचित और इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ लर्निंग इकोसिस्टम है। हम सख्त हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, विशेषज्ञों की निगरानी, प्रोसेस-आधारित मैन्युफैक्चरिंग और लगातार टेस्टिंग प्रोटोकॉल के माध्यम से इंडस्ट्री-लेवल क्वालिटी, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं।

छात्र हमारे ईवी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और विशेष लैब्स में फैकल्टी, इंजीनियर्स और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स के साथ काम करते हैं, जहाँ चेसिस असेंबली, पावरट्रेन डिज़ाइन, बैटरी मैनेजमेंट और ऑपरेशनल टेस्टिंग जैसे सभी चरण तय किए गए क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के अनुसार किए जाते हैं।

हमारा मॉडल “लर्निंग बाय डूइंग” पर आधारित है, लेकिन इसे वास्तविक इंडस्ट्रियल प्रैक्टिस के साथ जोड़ा गया है। छात्रों को लाइव प्रोजेक्ट्स शुरू करने से पहले कंपोनेंट सिलेक्शन, इंस्पेक्शन, ट्रबलशूटिंग, टेस्टिंग और वर्कप्लेस सेफ्टी की ट्रेनिंग दी जाती है।

हम एडवांस डिज़ाइन और सिमुलेशन प्लेटफॉर्म्स का भी उपयोग करते हैं और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ सहयोग करते हैं ताकि हमारे ईवी बाजार की वास्तविक जरूरतों को पूरा कर सकें। सेंटुरियन की खासियत यह है कि यहाँ छात्र सिर्फ तकनीक नहीं सीखते, बल्कि एक सख्त निगरानी वाले और परिणाम-आधारित सिस्टम में व्यावसायिक रूप से उपयोगी इनोवेशन में योगदान भी देते हैं।

क्या छात्रों द्वारा किए गए कुछ ऐसे खास इनोवेशन हुए हैं जिन्होंने प्रोडक्ट की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाया या लागत को कम किया हो?

मुक्ति कांत मिश्रा: हाँ, सेंचुरियन यूनिवर्सिटी में छात्रों द्वारा किए गए कई इनोवेशन ने इलेक्ट्रिक वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने में मदद की है।

हमारे छात्रों ने ईवी पावरट्रेन को बेहतर बनाने, हल्के (लाइटवेट) डिज़ाइन तैयार करने, बैटरी को ज्यादा प्रभावी तरीके से जोड़ने और सिस्टम की समस्या हल करने जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इससे वाहन ज्यादा किफायती और वास्तविक उपयोग के लिए ज्यादा व्यावहारिक बन पाए हैं।

सबसे अच्छी बात यह है कि ये सभी इनोवेशन हमारे ईवी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में हुए हैं, जहाँ छात्र सीधे प्रोडक्ट डेवलपमेंट और प्रक्रिया सुधार में योगदान देते हैं।

बैटरी सिस्टम, ड्राइवट्रेन या व्हीकल डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में आप कौन-सी मुख्य तकनीकों को इन-हाउस विकसित कर रहे हैं?

मुक्ति कांत मिश्रा: सेंचुरियन यूनिवर्सिटी बैटरी टेक्नोलॉजी, ईवी सिस्टम्स, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल मोबिलिटी से जुड़े कई क्षेत्रों में काम कर रही है।इसके अलावा, भारत के बढ़ते क्लीन ट्रांसपोर्ट इकोसिस्टम को ध्यान में रखते हुए देश में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी विकसित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
ऐसे यूनिवर्सिटी माहौल में, जहाँ छात्र पढ़ाई पूरी करके आगे बढ़ जाते हैं और नई बैच आत रहते है, आप R&D की निरंतरता कैसे बनाए रखते हैं?

मुक्ति कांत मिश्रा: सेंचुरियन यूनिवर्सिटी में R&D की निरंतरता केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयास पर नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम पर आधारित है।

एक्शन लर्निंग लैब्स, प्रोडक्शन सेंटर्स, इंटर्नशिप्स और यूनिवर्सिटी के एलुमनाई द्वारा चलाए जा रहे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स छात्रों को लगातार प्रैक्टिकल अनुभव से जोड़कर रखते हैं।इस वजह से तकनीकी ज्ञान और प्रैक्टिकल सीख एक बैच से दूसरी बैच तक आसानी से पहुंचती रहती है।

आपके ईवी किफायती समाधान के रूप में पेश किए जाते हैं; ऐसे में आप कम लागत के साथ मजबूती और बेहतर परफॉरमेंस का संतुलन कैसे बनाए रखते हैं?

मुक्ति कांत मिश्रा: यूनिवर्सिटी का मुख्य ध्यान ऐसे ईवी समाधान विकसित करने पर रहा है जो कम लागत वाले होने के साथ-साथ व्यावहारिक इंजीनियरिंग और स्किल-आधारित सीखने को भी बढ़ावा दें।

किफायती होने के साथ-साथ, सेंटुरियन यूनिवर्सिटी ने सस्टेनेबल और सभी के लिए आसान मोबिलिटी समाधान विकसित करने पर भी ध्यान दिया है, जो भारत के तेजी से बदलते ईवी इकोसिस्टम की जरूरतों के अनुसार हों।

भारत के ईवी और ग्रीन मोबिलिटी इकोसिस्टम में सेंचुरियन यूनिवर्सिटी का लोंग टर्म विज़न क्या है और अगला बड़ा कदम क्या होगा?

मुक्ति कांत मिश्रा: सेंचुरियन यूनिवर्सिटी का लोंग टर्म विज़न भारत के क्लीन मोबिलिटी बदलाव से जुड़ा हुआ है। यूनिवर्सिटी सस्टेनेबल इनोवेशन, बैटरी टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप, इंडस्ट्री सहयोग और स्किल-आधारित शिक्षा के माध्यम से अपना योगदान देना चाहती है।

इसके साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री में आने वाले नए अवसरों के लिए छात्रों को तैयार करना भी इसका एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

क्या आप उन प्रमुख क्लाइंट्स या संगठनों के बारे में बता सकते हैं, जिनसे आपको ऑर्डर मिलते हैं और जिन्हें पूरा करने में छात्र मदद करते हैं?

मुक्ति कांत मिश्रा: ओडिशा सरकार, ओमफेड (OMFED), टाटा ग्रुप (Tata Group), ओएमसी (OMC), अपोलो अस्पताल (Apollo Hospitals), एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Limited), ओसीएसी (OCAC), एसएमएस ग्रुप (SMS Group), पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank), जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड (Jindal Stainless Limited), एसयूएम हॉस्पिटल ( SUM Hospital), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India), एसोटेक (Assotech), स्वोस्ती ग्रुप (Swosti Group), ओर्मास (ORMAS), क्वेस कॉर्प (Quess Corp), टाटा स्टील (Tata Steel), टाटा टेक्नोलॉजीज (Tata Technologies), इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मटेरियल टेक्नोलॉजी (Institute of Minerals and Materials Technology) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Bharat Electronics Limited) उन प्रमुख संस्थाओं और इंडस्ट्री पार्टनर्स में शामिल हैं, जिनसे हमें ऑर्डर और सहयोगी प्रोजेक्ट्स मिलते हैं, जिन पर छात्र सक्रिय रूप से काम करते हैं।

ये प्रोजेक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, माइनिंग, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी पहलों जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े होते हैं। इससे छात्रों को वास्तविक इंडस्ट्री असाइनमेंट्स और प्रोडक्शन-आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।

सीखने की प्रक्रिया के दौरान छात्र किस प्रकार के प्रोडक्ट्स का निर्माण करते हैं?

मुक्ति कांत मिश्रा: छात्र इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं, जिनमें सिस्टम डिज़ाइन, कंपोनेंट डिज़ाइन, प्रोडक्शन लाइन सेटअप और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया शामिल होती है।

हम ई-रिक्शा (E-Rickshaw), गोल्फ कार्ट (Golf Cart), यूटिलिटी कार्ट (Utility Cart) और ई-बस का निर्माण करते हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल थ्योरी पढ़ाने के बजाय वास्तविक इंडस्ट्रियल माहौल में काम करके सीखने का अनुभव देना है। 

निष्कर्ष

सेंचुरियन यूनिवर्सिटी का ईवी मॉडल यह दिखाता है कि शिक्षा केवल थ्योरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे वास्तविक उद्योग और तकनीक से जोड़ना जरूरी है। यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सीधे मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन, रिसर्च और प्रोडक्ट डेवलपमेंट से जोड़कर ऐसा इकोसिस्टम बनाया है, जहाँ सीखने के साथ-साथ रोजगार, इनोवेशन और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलता है।

भारत में तेजी से बढ़ते ईवी और ग्रीन मोबिलिटी सेक्टर के बीच, सेंचुरियन यूनिवर्सिटी का यह प्रयास स्किल-आधारित शिक्षा और इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड लर्निंग का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल देश के क्लीन मोबिलिटी और आत्मनिर्भर मैन्युफैक्चरिंग विज़न को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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