ऑटो कंपोनेंट निर्माता सुब्रोस (Subros) ने कहा है कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV), हाइब्रिड और CNG वाहनों से जुड़े थर्मल सिस्टम अब कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 25% हिस्सा बन चुके हैं। कंपनी के अनुसार, नई पीढ़ी की मोबिलिटी टेक्नोलॉजीज़ की बढ़ती मांग उसके बिजनेस पोर्टफोलियो में तेजी से बदलाव ला रही है।
कंपनी ने FY26 में 3,755 करोड़ रुपये का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 11.52% अधिक है। वहीं, कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा 10.22% बढ़कर 165 करोड़ रुपये पहुंच गया। मार्च तिमाही में कंपनी का राजस्व 15.55% बढ़कर 1,049.76 करोड़ रुपये रहा, जबकि तिमाही PAT 49.69 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
पोस्ट-रिजल्ट एनालिस्ट कॉल के दौरान कंपनी प्रबंधन ने कहा कि हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ता बदलाव वाहनों में थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम की मांग को काफी बढ़ा रहा है। कंपनी के मुताबिक EV और हाइब्रिड वाहनों में बैटरी कूलिंग और एडवांस एनर्जी मैनेजमेंट की वजह से पारंपरिक ICE वाहनों की तुलना में कहीं अधिक जटिल थर्मल आर्किटेक्चर की आवश्यकता होती है।
सुब्रोस (Subros) ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रति वाहन थर्मल सिस्टम का कंटेंट पारंपरिक वाहनों की तुलना में 2.5 से 3 गुना तक अधिक हो सकता है। वहीं, इलेक्ट्रिक कंप्रेसर सिस्टम की वैल्यू पारंपरिक कंप्रेसर की तुलना में लगभग चार गुना तक बढ़ सकती है।
हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय बाजार में इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाहन आने वाले वर्षों में पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। कंपनी ICE वाहनों के लिए अधिक हल्के और ऊर्जा-कुशल थर्मल सिस्टम पर भी निवेश जारी रखेगी, ताकि फ्यूल एफिशिएंसी में सुधार हो सके।
भविष्य की रणनीति के तहत कंपनी इलेक्ट्रिक कंप्रेसर निर्माण और लोकलाइजेशन पर बड़ा निवेश कर रही है। कंपनी ने बताया कि उसके आगामी ई-कंप्रेसर प्रोजेक्ट पर लगभग 175 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और यह सुविधा FY28 तक चालू होने की उम्मीद है। सुब्रोस (Subros) का लक्ष्य इस प्रोजेक्ट में करीब 70% लोकलाइजेशन हासिल करना है।
कंपनी के अनुसार, ई-कंप्रेसर बिजनेस से पीक स्केल पर लगभग 250 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व मिलने की संभावना है। इसके अलावा कंपनी ने बताया कि ट्रक AC बिक्री में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। मार्च तिमाही में ट्रक AC बिक्री 168% बढ़ी, जबकि FY26 में यह वृद्धि 111% रही, जिसका मुख्य कारण कुछ कमर्शियल वाहन श्रेणियों में अनिवार्य एयर-कंडीशनिंग नियमों का लागू होना है।
सुब्रोस ने कहा कि वह भविष्य में लोकलाइजेशन, नई तकनीक आधारित विकास और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस बनाए रखेगी, हालांकि कमोडिटी कीमतों, विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियां अभी भी सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही हैं।