साथ ही उन्होंने लर्नर्स की जरूरतों, संगठन की ग्रोथ और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाते हुए एक टिकाऊ एजुकेशन बिजनेस तैयार करने पर भी अपने विचार साझा किए।
भारत का ऑनलाइन हायर एजुकेशन सेक्टर तेजी से बदल रहा है। इससे कामकाजी पेशेवरों के लिए अपने करियर से ब्रेक लिए बिना उच्च शिक्षा हासिल करने के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। वहीं, EdTech कंपनियों को लर्नर्स की बदलती जरूरतों, टेक्नोलॉजी को अपनाने और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
जारो एजुकेशन की CEO रंजिता रमन को एजुकेशन सेक्टर में 18 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत काउंसलर के रूप में की और बाद में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) की जिम्मेदारी संभालते हुए CEO के पद तक पहुंचीं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) की पूर्व छात्रा रमन ने नेतृत्व, बिजनेस ग्रोथ और ऑनलाइन हायर एजुकेशन के भविष्य पर अपने विचार साझा किए।
बातचीत के प्रमुख अंश:
सवाल 1. आपने अपने करियर की शुरुआत काउंसलर के रूप में की और आगे चलकर जारो एजुकेशन की CEO बनीं। आपका यह सफर कैसा रहा?
रंजिता रमन: मैं जारो में अपने सफर को तीन चरणों में देखती हूं—बाजार को समझना, बिजनेस का नेतृत्व करना सीखना और अंत में उसके भविष्य की जिम्मेदारी लेना।
मैंने अपने करियर की शुरुआत काउंसलर के रूप में की थी। उस समय ऑनलाइन एजुकेशन कई कामकाजी पेशेवरों के लिए नया था। लोग सीखना चाहते थे, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई के तरीके, डिग्री या सर्टिफिकेशन की वैल्यू और नियोक्ताओं के बीच उसकी स्वीकार्यता को लेकर झिझक थी। इससे मुझे शुरुआती दौर में ही समझ आ गया कि हमें एक नए क्षेत्र में बिजनेस खड़ा करने के साथ लोगों का भरोसा भी जीतना होगा।
समय के साथ मैंने टीम लीडरशिप और नेशनल सेल्स की जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद COO और फिर CEO बनीं। हर चरण में नई चुनौतियां आईं और मुझे व्यक्तिगत प्रदर्शन से आगे बढ़कर टीम की कार्यक्षमता, बिजनेस की ग्रोथ और लंबे समय तक संगठन को टिकाऊ बनाए रखने पर ध्यान देना पड़ा।
सवाल 2. जब ऑनलाइन एजुकेशन एक नया क्षेत्र था, तब लोगों का भरोसा जीतने में सबसे बड़ी चुनौतियां क्या थीं?
रंजिता रमन: अवसर स्पष्ट था। पेशेवर लोग अपने करियर से ब्रेक लिए बिना अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा हासिल करना चाहते थे। हालांकि, इस जरूरत को व्यापक स्वीकार्यता में बदलने के लिए धैर्य की जरूरत थी। हमें ऑनलाइन पढ़ाई, डिग्री और सर्टिफिकेशन की वैल्यू तथा नियोक्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर करना था। इसके साथ ही, उन्हें यह समझाना भी जरूरी था कि कोई प्रोग्राम उनके पेशेवर जीवन के साथ किस तरह तालमेल बिठा सकता है।
इन अनुभवों ने बाजार को समझने में मेरी मदद की। मैंने सीखा कि एजुकेशन बिजनेस बनाने के लिए केवल मांग को पहचानना काफी नहीं है। लोगों का भरोसा जीतना और उन्हें सीखने के अनुभव की उपयोगिता समझाना भी जरूरी है।
सवाल 3. टीम लीडरशिप और नेशनल सेल्स की जिम्मेदारी संभालने के बाद बिजनेस को देखने का आपका नजरिया कैसे बदला?
रंजिता रमन: जब मैंने टीम लीडरशिप और नेशनल सेल्स की जिम्मेदारी संभाली, तो चुनौतियां भी बदल गईं। अलग-अलग शहरों में विस्तार करने के लिए वहां के बाजारों को समझना और ऐसे लीडर्स तैयार करना जरूरी था, जो स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल सकें। अब केवल मेरा व्यक्तिगत प्रदर्शन सफलता का पैमाना नहीं था। मुझे यह भी देखना होता था कि टीम किस तरह फैसले लेती है, काम में निरंतरता कितनी है और बिजनेस अपनी ग्रोथ को लंबे समय तक बनाए रख सकता है या नहीं।
इसी दौरान मैंने IIM Ahmedabad के सीनियर मैनेजमेंट प्रोग्राम में हिस्सा लिया। इस प्रोग्राम ने मुझे अपने व्यावहारिक अनुभव को व्यापक मैनेजमेंट के नजरिए से समझने में मदद की। मैंने यह भी सीखा कि किसी एक विभाग में लिए गए फैसले पूरे संगठन को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।
सवाल 4. CEO के रूप में आप लर्नर्स की जरूरतों, बिजनेस के विस्तार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं?
रंजिता रमन: बिजनेस के अलग-अलग स्तरों पर काम करने से मुझे फैसलों को व्यापक नजरिए से परखने में मदद मिली है। जब हम विस्तार की योजना बनाते हैं, तो मैं तीन बातों पर ध्यान देती हूं—लर्नर्स की जरूरतें, हमारी सेवाएं देने की क्षमता और उस पहल को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी वित्तीय अनुशासन। हर अवसर को इन तीनों कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए।
एजुकेशन सेक्टर में फैसले लेते समय शिक्षा तक पहुंच, गुणवत्ता और बिजनेस की स्थिरता के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। बिजनेस के विस्तार, नए प्रोग्राम लॉन्च करने और मार्केटिंग में निवेश करने का दबाव रहता है। लेकिन एक लीडर को यह देखना चाहिए कि बाजार में उस प्रोग्राम की वास्तविक मांग है या नहीं, उससे लर्नर्स को फायदा होगा या नहीं और बिजनेस लंबे समय तक उस प्रतिबद्धता को निभा पाएगा या नहीं। वहीं वित्तीय अनुशासन जिम्मेदार एजुकेशन लीडरशिप का एक जरूरी हिस्सा है।
सवाल 5. वर्ष 2025 में जारो एजुकेशन की लिस्टिंग के बाद एक लीडर के रूप में आपकी जिम्मेदारियों में क्या बदलाव आया?
रंजिता रमन : 2025 में जारो की लिस्टिंग के बाद मेरी जिम्मेदारियां और स्पष्ट हो गईं। अब बिजनेस की ग्रोथ के साथ शेयरधारकों की अपेक्षाएं भी जुड़ी हैं। इसके साथ ही हमें लर्नर्स, यूनिवर्सिटी पार्टनर्स और कर्मचारियों की जरूरतों का भी ध्यान रखना होता है। CEO के रूप में मेरी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि हमारे फैसले तत्काल कारोबारी जरूरतों को पूरा करने के साथ लंबे समय में भी सही साबित हों। इसके लिए अवसरों का सावधानी से आकलन करना और यह समझना जरूरी है कि किसी फैसले का अलग-अलग हितधारकों पर क्या असर पड़ेगा।
पीछे मुड़कर देखने पर मुझे लगता है कि मेरे सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा व्यापक नजरिए से फैसले लेना सीखना रहा है। मैंने शुरुआत में एक व्यक्ति को सही प्रोग्राम चुनने में मदद की थी। आज मैं ऐसे संगठन का नेतृत्व करती हूं, जिसके फैसले कई लोगों के शिक्षा संबंधी विकल्पों को प्रभावित करते हैं। इस भूमिका के लिए निर्णय लेने की क्षमता और जवाबदेही का अलग स्तर जरूरी है।
सवाल 6. एजुकेशन सेक्टर में नेतृत्व की भूमिकाएं निभाने की इच्छुक महिलाओं के लिए सबसे बड़े अवसर और चुनौतियां क्या हैं?
रंजिता रमन : मैं इस अवसर को दो स्तरों पर देखती हूं- यह तय करना कि शिक्षा लोगों तक कैसे पहुंचे और उस बिजनेस की अधिक जिम्मेदारी लेना, जो शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद करता है।
आज एजुकेशन से जुड़े फैसलों में टेक्नोलॉजी, यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप, प्रोग्राम की प्रासंगिकता और वित्तीय स्थिरता जैसे पहलू शामिल हैं। इससे महिलाओं के लिए नेतृत्व के व्यापक अवसर बन रहे हैं। जो महिलाएं लर्नर्स की जरूरतों को समझती हैं और उस समझ को सही कारोबारी फैसलों में बदल सकती हैं, वे इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है किसी एक विभाग में अच्छा प्रदर्शन करने से आगे बढ़कर पूरे संगठन की दिशा तय करने में योगदान देना। इसके लिए व्यापक अनुभव जरूरी है। बजट संभालना, बिजनेस के विस्तार का नेतृत्व करना या किसी कारोबारी नतीजे की जिम्मेदारी लेना निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। केवल सलाह देना इस तरह के अनुभव का विकल्प नहीं हो सकता।
सवाल 7. अधिक महिलाओं को वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार करने में संगठनों की क्या भूमिका होनी चाहिए?
रंजिता रमन: संगठनों को महिलाओं के लिए ऐसे अवसर तैयार करने चाहिए, जिनमें वे अपनी कारोबारी समझ दिखा सकें और अनिश्चित परिस्थितियों में नेतृत्व कर सकें। उन्हें ऐसी जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए, जिनमें महत्वपूर्ण फैसले लेने और उनके नतीजों की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिले। वहीं मेंटरशिप महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ वास्तविक जिम्मेदारी और फैसले लेने का अधिकार भी मिलना चाहिए। नेतृत्व विकसित करने के लिए व्यावहारिक अनुभव, कारोबारी चुनौतियों से जुड़ाव और परिणामों के प्रति जवाबदेही जरूरी है।
वरिष्ठ पदों पर आगे बढ़ने की इच्छुक महिलाओं को अपनी तत्काल भूमिका से आगे बढ़कर पूरे बिजनेस को समझने की कोशिश करनी चाहिए। यदि आप सेल्स में काम करती हैं, तो डिलीवरी को भी समझें। यदि आप ऑपरेशंस में हैं, तो यह जानें कि बिजनेस नए लर्नर्स तक कैसे पहुंचता है और रेवेन्यू कैसे कमाता है। वरिष्ठ स्तर पर लिए गए फैसले कई विभागों को प्रभावित करते हैं, इसलिए यह समझना जरूरी है कि किसी फैसले का हर क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा।
सवाल 8. व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को संभालते हुए करियर में आगे बढ़ना चाहने वाली महिलाओं को आप क्या सलाह देंगी?
रंजिता रमन : मैंने सीखा है कि हर दिन सभी प्राथमिकताओं पर समान ध्यान देना संभव नहीं होता। कुछ समय काम अधिक समय और ऊर्जा मांगता है, जबकि दूसरे समय में परिवार या स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी पड़ सकती है। अपनी महत्वाकांक्षाओं को लेकर स्पष्ट रहने से ऐसे फैसले लेने में मदद मिलती है। हालांकि, हर महिला की परिस्थितियां और उसका सपोर्ट सिस्टम अलग होता है।
मैं नेतृत्व की भूमिका निभाने की इच्छुक महिलाओं को सलाह दूंगी कि वे अपनी महत्वाकांक्षाओं को लेकर स्पष्ट रहें। अधिक जिम्मेदारियां लेने के अवसर तलाशें, आंकड़ों और वित्तीय पहलुओं को समझें और अपने विभाग से आगे बढ़कर फैसलों में योगदान दें। अत: बोर्डरूम में अपनी बात को सोच-समझकर रखना और उसके लिए जवाबदेही स्वीकार करना बेहद जरूरी है।