गुरुग्राम में स्थित टेस्ट-प्रेप कंपनी Aakash Educational Services Ltd (AESL) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने नेट लॉस को कम करने में कामयाबी हासिल की है। कंपनी का नेट लॉस FY26 में 15.5% घटकर ₹186.5 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹220.8 करोड़ था। हालांकि, कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में इस दौरान मामूली 0.4% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹2,040.5 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹2,032.1 करोड़ था।
Aakash भारत के प्रमुख टेस्ट-प्रेप ब्रांड्स में शामिल है और मेडिकल व इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी कराने पर फोकस करता है। कंपनी के अनुसार, Aakash की शुरुआत 1988 में हुई थी और यह क्लासरूम, ऑनलाइन, डिस्टेंस लर्निंग और हाइब्रिड मोड के जरिए छात्रों को टेस्ट-प्रेप सेवाएं उपलब्ध कराता है। कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के अनुसार, उसके पास 200 से अधिक सेंटर और NEET व JEE में 85,000 से अधिक रैंकर्स का रिकॉर्ड है। वहीं, हालिया रिपोर्टिंग में Aakash के 300 से अधिक सेंटर होने की जानकारी दी गई है।
कोचिंग बिजनेस से आया ₹1,956.2 करोड़ का रेवेन्यू
FY26 में Aakash के कोचिंग बिजनेस से रेवेन्यू 0.3% बढ़कर ₹1,956.2 करोड़ हो गया। वहीं, फ्रेंचाइजी रेवेन्यू करीब 4% बढ़कर ₹84.4 करोड़ रहा। इस तरह कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में कोचिंग बिजनेस का योगदान सबसे बड़ा रहा। कोचिंग रेवेन्यू और कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू के आधार पर इसकी हिस्सेदारी करीब 96% बैठती है।
कंपनी की अन्य आय में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। FY26 में अन्य आय दोगुने से अधिक बढ़कर ₹113.7 करोड़ हो गई। इसमें ₹76.1 करोड़ के प्रोविजन या लायबिलिटीज के राइट-बैक और लीज लायबिलिटीज के रीमेजरमेंट से ₹19.7 करोड़ का गेन शामिल था। अन्य आय को शामिल करने के बाद कंपनी की कुल आय 3.3% बढ़कर ₹2,154.3 करोड़ हो गई, जो FY25 में ₹2,085.1 करोड़ थी।
खर्च में मामूली बढ़ोतरी, प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव
FY26 में Aakash का कुल खर्च करीब 1% बढ़कर ₹2,397.8 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹2,378 करोड़ था। टैक्स और एक्सेप्शनल आइटम से पहले कंपनी का घाटा करीब 17% घटकर ₹243.5 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹292.9 करोड़ था। हालांकि, ₹23.3 करोड़ के एक्सेप्शनल चार्ज के बाद प्री-टैक्स लॉस ₹266.8 करोड़ रहा। इसके बाद ₹80.3 करोड़ के डिफर्ड टैक्स क्रेडिट का फायदा मिलने से अंतिम नेट लॉस ₹186.5 करोड़ रहा।
वहीं, कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में गिरावट दर्ज की गई। FY26 में EBITDA 65% घटकर ₹15.3 करोड़ रह गया, जबकि FY25 में यह ₹43.3 करोड़ था। इसी के साथ EBITDA मार्जिन 2.13% से घटकर 0.75% रह गया। इसका मतलब है कि नेट लॉस कम होने के बावजूद कंपनी की मुख्य ऑपरेशनल कमाई पर दबाव बना रहा।
कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खर्च, विज्ञापन खर्च में कमी
Aakash के कुल खर्च में एम्प्लॉयी बेनिफिट्स सबसे बड़ा खर्च रहा। FY26 में यह खर्च 2.4% घटकर ₹1,299.6 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹1,331.5 करोड़ था। वहीं, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन खर्च 4.4% घटकर ₹234.8 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹245.6 करोड़ था।
कंपनी ने विज्ञापन और पब्लिसिटी पर भी कम खर्च किया। FY26 में यह खर्च 6.9% घटकर ₹145.7 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹156.5 करोड़ था। इस तरह रेवेन्यू में मामूली बढ़ोतरी के बीच कंपनी ने कर्मचारियों, डेप्रिसिएशन और विज्ञापन से जुड़े कुछ प्रमुख खर्चों में कमी दर्ज की।
Aakash की ओनरशिप में हुए बदलाव
Aakash की ओनरशिप को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बदलाव हुए हैं। BYJU’S की पैरेंट कंपनी Think & Learn ने 2021 में Aakash का अधिग्रहण किया था। हालांकि, इसके बाद कंपनी की शेयरहोल्डिंग संरचना में बदलाव हुआ है। जून 2025 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने Manipal Health Systems और Manipal Education and Medical Group India द्वारा Aakash Educational Services में हिस्सेदारी के अधिग्रहण से जुड़े कॉम्बिनेशन को मंजूरी दी थी।
जून 2026 की Reuters रिपोर्ट के अनुसार, BYJU’S की Aakash में हिस्सेदारी घटकर माइनॉरिटी हो चुकी है और Manipal Health सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है। इसी रिपोर्ट में ग्लोबल लेंडर्स द्वारा Aakash में करीब 30% हिस्सेदारी हासिल करने को लेकर बातचीत की जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, संभावित सेटलमेंट में Aakash की वैल्यू करीब 2 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। हालांकि, यह बातचीत उस समय जारी थी और संबंधित पक्षों ने इस पर टिप्पणी नहीं की थी।
टेस्ट-प्रेप सेक्टर में Aakash का एजुकेशन फोकस
Aakash Educational Services का मुख्य फोकस मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी पर है। कंपनी के अनुसार, उसने NEET और JEE में 85,000 से अधिक रैंकर्स तैयार किए हैं और टेक्नोलॉजी आधारित लर्निंग सॉल्यूशंस के जरिए टेस्ट-प्रेप एजुकेशन को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।
FY26 के आंकड़े बताते हैं कि Aakash का ऑपरेटिंग रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा, जबकि नेट लॉस में कमी आई। हालांकि, EBITDA में 65% की गिरावट यह दिखाती है कि कंपनी की ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में Aakash के लिए आगे की ग्रोथ के साथ-साथ ऑपरेशनल मार्जिन में सुधार भी महत्वपूर्ण रहेगा।