पिचाई के अनुसार, Google का फोकस हेल्थ, प्राकृतिक आपदा और मौसम, लर्निंग और आर्थिक अवसर जैसे क्षेत्रों पर है। कंपनी का मानना है कि AI का जिम्मेदारी से इस्तेमाल रिसर्च, लर्निंग और लोगों तक जानकारी की पहुंच को बेहतर बना सकता है।
सुंदर पिचाई ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर Google की हालिया AI पहलों से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कंपनी AI को केवल तकनीकी विकास तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान के लिए इस्तेमाल करने पर काम कर रही है। इनमें एजुकेशन और लर्निंग भी प्रमुख क्षेत्र हैं, जहां AI छात्रों और शिक्षकों के लिए पर्सनलाइज्ड लर्निंग और बेहतर शिक्षण अनुभव विकसित करने में मदद कर सकता है।
लर्निंग और एजुकेशन में AI पर Google का फोकस
Google के अनुसार, AI आधारित टूल्स का उद्देश्य छात्रों को केवल सवालों के जवाब देना नहीं, बल्कि उन्हें विषयों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करना भी है। कंपनी के लर्निंग मॉडल में Guided Learning जैसे फीचर्स शामिल हैं, जो छात्रों को किसी विषय को चरणबद्ध तरीके से समझने में सहायता करते हैं।
Google का कहना है कि शिक्षा में AI का इस्तेमाल शिक्षकों की जगह लेने के बजाय उनकी मदद करने और लर्निंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इससे छात्रों को अपनी जरूरत और सीखने की गति के अनुसार अध्ययन करने के नए अवसर मिल सकते हैं।
भारत में AI एजुकेशन और शिक्षक ट्रेनिंग
भारत में भी Google AI आधारित एजुकेशन और लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल पर काम कर रहा है। कंपनी ने Google.org और Wadhwani AI के साथ मिलकर AI for Education Innovation के लिए ₹85 करोड़ की सहायता की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य SWAYAM, POSHAN Tracker, राज्य स्तर के लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और राष्ट्रीय स्किलिंग पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म में AI आधारित सुविधाओं को बढ़ावा देना है।
Google ने भारत में शिक्षकों की AI लिटरेसी बढ़ाने के लिए Google AI Educator Series भी शुरू की है। इसके तहत स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों को AI के जिम्मेदार इस्तेमाल और लर्निंग अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।
कंपनी के अनुसार, इस ट्रेनिंग को महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, असम, लद्दाख और पंजाब के शिक्षकों तक पहुंचाने पर भी काम किया जा रहा है। शुरुआती चरण में ट्रेनिंग असमिया, हिंदी, मराठी, तेलुगु, ओडिया और पंजाबी जैसी भाषाओं में उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को क्लासरूम में AI टूल्स के प्रभावी और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए तैयार करना है।
छात्रों के लिए पर्सनलाइज्ड लर्निंग के नए अवसर
Google उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी AI के इस्तेमाल को बढ़ा रहा है। कंपनी के अनुसार, भारत में छात्रों के लिए Gemini में सेल्फ-स्टडी फीचर्स और JEE Main प्रैक्टिस टेस्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनका उद्देश्य छात्रों को अपनी जरूरत और सीखने की गति के अनुसार तैयारी करने में सहायता देना है।
इसके अलावा, Google ने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ के साथ AI आधारित स्टेट यूनिवर्सिटी मॉडल पर काम करने की जानकारी दी है। इसमें Google Cloud और Gemini के जरिए छात्रों के लिए पर्सनलाइज्ड AI ट्यूटर और स्किल-गैप एनालिसिस जैसी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है। ऐसे मॉडल का उद्देश्य छात्रों की लर्निंग को भविष्य की स्किल और रोजगार जरूरतों से जोड़ना है।
AI के साथ जिम्मेदार इस्तेमाल भी जरूरी
AI शिक्षा और रिसर्च में नए अवसर पैदा कर सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। Google ने अकादमिक इंटीग्रिटी, समान अवसर और जिम्मेदार AI इस्तेमाल जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया है।
सुंदर पिचाई के अनुसार, AI से मिलने वाले लाभ अपने आप सभी लोगों और समुदायों तक नहीं पहुंचेंगे। इसके लिए सरकार, शिक्षा संस्थानों, शिक्षकों, छात्रों और टेक कंपनियों के बीच सहयोग जरूरी होगा। ऐसे में एजुकेशन में AI का भविष्य केवल डिजिटल टूल्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्सनलाइज्ड लर्निंग, शिक्षक ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है।