CirclePe की स्थापना नवन जायसवाल और अंकुर यादव ने की थी। कंपनी ने पहले प्री-सीड फंडिंग दौर में 7.5 करोड़ रुपये जुटाए थे। उस समय कंपनी का मूल्यांकन 35 करोड़ रुपये था। इस निवेश का नेतृत्व OTP Ventures ने किया था, जबकि 1947 Rise, iSeed, IIT Delhi, Venture Catalysts और OfBusiness, BharatPe, Uni Cards, OYO जैसी कंपनियों के संस्थापकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसमें निवेश किया था।
इस अधिग्रहण के बाद Crib से जुड़े प्रॉपर्टी ऑपरेटर्स के यहां रहने वाले किरायेदार बिना सिक्योरिटी डिपॉजिट दिए भी शिफ्ट हो सकेंगे। उन्हें केवल किराये के साथ हर महीने एक छोटी अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। इससे किरायेदारों को एकमुश्त बड़ी राशि जमा नहीं करनी पड़ेगी और मकान खाली करने के बाद डिपॉजिट वापस मिलने का इंतजार भी नहीं करना होगा।
कंपनी का कहना है कि अब वह अपने प्लेटफॉर्म में फाइनेंसिंग सेवाओं को सीधे शामिल कर सकेगी। इससे उसे किराया भुगतान, प्रॉपर्टी की ऑक्यूपेंसी, किरायेदारों के व्यवहार और प्रॉपर्टी प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा भी मिलेंगे। इन जानकारियों के आधार पर कंपनी बेहतर वित्तीय सेवाएं और भरोसेमंद समाधान विकसित कर सकेगी, जो पारंपरिक ऋणदाताओं और अन्य फिनटेक कंपनियों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
Crib की स्थापना सनी गर्ग (सीईओ), शैफाली जैन (सीओओ) और अर्चित चौहान (सीटीओ) ने की थी। कंपनी को-लिविंग स्पेस, हॉस्टल और पीजी के लिए प्रॉपर्टी मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है। वर्तमान में इसके प्लेटफॉर्म का उपयोग 2,500 से अधिक प्रॉपर्टी ऑपरेटर्स कर रहे हैं, जो मिलकर एक अरब डॉलर से अधिक के किराये का प्रबंधन करते हैं।
अब तक Crib ने 7 फंडिंग राउंड के जरिए लगभग 3.64 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं। कंपनी को 33 से अधिक संस्थागत निवेशकों और 35 एंजेल निवेशकों का समर्थन प्राप्त है।
इस अधिग्रहण पर Crib के, को-फाउंडर और सीईओ सनी गर्ग ने कहा, "भारत में किराये के मकानों में सिक्योरिटी डिपॉजिट सबसे बड़ी चुनौती है। किरायेदारों की बड़ी रकम लंबे समय तक फंस जाती है, जबकि प्रॉपर्टी ऑपरेटर्स को भी भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है। हमने Crib को को-लिविंग सेक्टर के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है और CirclePe इस प्लेटफॉर्म पर भुगतान प्रक्रिया को और आसान बनाता है। दोनों कंपनियों के साथ आने से किरायेदार बिना डिपॉजिट दिए घर में शिफ्ट हो सकेंगे और प्रॉपर्टी ऑपरेटर्स को पहले दिन ही भुगतान मिल जाएगा। यही भविष्य का किराया मॉडल है, जिसे हम बनाना चाहते हैं।"
वहीं, CirclePe के, को-फाउंडर अंकुर यादव ने कहा, "हमने CirclePe की शुरुआत इसलिए की थी क्योंकि सिक्योरिटी डिपॉजिट किरायेदारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। इससे लोगों की अपनी पूंजी लंबे समय तक फंस जाती है। Crib के साथ जुड़ने से हमें बड़े स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा, क्योंकि कंपनी के साथ पहले से ही बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी ऑपरेटर्स जुड़े हुए हैं। अब किरायेदार बिना डिपॉजिट दिए घर में प्रवेश कर सकेंगे और प्रॉपर्टी ऑपरेटर्स को पहले ही दिन भुगतान मिल जाएगा।"