AI स्टार्टअप Pramaana Labs ने सीड फंडिंग राउंड में 27 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। कंपनी की स्थापना वर्ष 2025 में रंजन राजगोपालन, कृष्णन राघवन और संजय गणपति सुब्रमण्यम ने की थी। Pramaana Labs ऐसा AI सत्यापन (Verification) प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जिसका उद्देश्य AI द्वारा दिए गए उत्तरों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
कंपनी के अनुसार, Pramaana विभिन्न क्षेत्रों के नियमों और मानकों- जैसे अमेरिकी कर कानून (US Tax Code), चिकित्सा प्रोटोकॉल और वित्तीय विनियमों को एक औपचारिक भाषा (Formal Language) में परिवर्तित करती है, जिसे मशीन गणितीय रूप से समझ और सत्यापित कर सकती है।
जब कोई उपयोगकर्ता कोई प्रश्न पूछता है, तो सिस्टम उस प्रश्न को एक औपचारिक कथन में बदलता है और उसे एक विशेष "प्रूफ इंजन" के माध्यम से जांचता है। यदि उत्तर सही साबित होता है, तो सिस्टम उसके समर्थन में मशीन द्वारा सत्यापित प्रमाण (Machine-Checkable Proof) प्रदान करता है। यदि उत्तर किसी नियम का उल्लंघन करता है, तो यह स्पष्ट रूप से बताता है कि कौन-सा नियम टूटा है और क्यों। कंपनी का दावा है कि उसका सिस्टम बिना सत्यापन के कोई उत्तर नहीं देता और अब तक किसी भी सत्यापित उत्तर में आत्मविश्वास के साथ गलत जानकारी प्रस्तुत नहीं की है।
Pramaana Labs के, को-फाउंडर और सीईओ रंजन राजगोपालन ने कहा, “AI में सबसे बड़ी चुनौती जवाबदेही (Accountability) की है। दुनिया की कई जटिल समस्याएं असंभव नहीं हैं, बल्कि उन्हें अभी तक औपचारिक रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। स्वास्थ्य, वित्त और कानूनी जैसे क्षेत्रों में गलत निर्णय की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। Pramaana इन क्षेत्रों के नियमों को ऐसी भाषा में परिवर्तित करता है, जिसे मशीन पूरी निश्चितता के साथ समझ सके। जब AI अपने उत्तरों को प्रमाणित कर सकेगा, तब यह केवल एक सहायक उपकरण नहीं बल्कि एक वास्तविक विशेषज्ञ की भूमिका निभा सकेगा।”
BoldCap के जनरल पार्टनर सत्या नारायणन ने कहा कि उनकी फर्म ने Pramaana में शुरुआती चरण में इसलिए निवेश किया क्योंकि कंपनी AI की सबसे महत्वपूर्ण चुनौती विश्वास (Trust) को हल करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा, “आज उच्च जोखिम वाले AI उत्तरों की जांच के लिए मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, जिससे पूरी प्रक्रिया की गति सीमित हो जाती है। यदि वास्तविक दुनिया के नियमों को मशीनों के लिए औपचारिक रूप से परिभाषित किया जा सके, तो यह बाधा काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। यही विश्वास हमें Pramaana में निवेश करने और इस फंडिंग राउंड में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है। यदि यह तकनीक सफल होती है, तो यह केवल AI को बेहतर नहीं बनाएगी, बल्कि बड़े पैमाने पर नई संभावनाओं और अवसरों का निर्माण भी करेगी।”