भारत का क्लाइमेट-टेक सेक्टर 12.8 अरब डॉलर की फंडिंग तक पहुंचा: रिपोर्ट

भारत का क्लाइमेट-टेक सेक्टर 12.8 अरब डॉलर की फंडिंग तक पहुंचा: रिपोर्ट

भारत का क्लाइमेट-टेक सेक्टर 12.8 अरब डॉलर की फंडिंग तक पहुंचा: रिपोर्ट
भारत का क्लाइमेट-टेक (Climate Tech) सेक्टर लगातार विकास कर रहा है, क्योंकि निवेश, सरकारी नीतियां और ऊर्जा जरूरतें अब एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बिठा रही हैं।


उत्सर्जन में कमी लाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के देश के प्रयासों के चलते पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र ने निवेशकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है। स्वच्छ ऊर्जा समाधानों की बढ़ती मांग के साथ जलवायु-केंद्रित स्टार्टअप्स और कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

Tracxn की India Climate Tech 2026 Report के अनुसार, भारत के क्लाइमेट-टेक इकोसिस्टम ने अब तक 1,583 कंपनियों के माध्यम से कुल लगभग 12.8 अरब डॉलर की फंडिंग हासिल की है। इस क्षेत्र में वार्षिक निवेश 2020 में करीब 315 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

नीति समर्थन और ऊर्जा सुरक्षा को मिल रहा बढ़ावा

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी नीतियां, निजी निवेश और ऊर्जा सुरक्षा की प्राथमिकताएं अब तेजी से एक-दूसरे के करीब आ रही हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% आयात करता है। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) जैसे क्षेत्र न केवल जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने बल्कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भी अहम माने जा रहे हैं।

सरकार की कई योजनाएं इस बदलाव को गति दे रही हैं। इनमें 10,900 करोड़ रुपये का PM E-DRIVE कार्यक्रम, प्रस्तावित कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम और 7,280 करोड़ रुपये की रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य स्वच्छ तकनीकों को अपनाने को बढ़ावा देना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है।

बड़े निवेश सौदों की ओर बढ़ रहा रुझान

फंडिंग पैटर्न से यह भी पता चलता है कि अब निवेश कम लेकिन बड़े सौदों में केंद्रित हो रहा है। खासकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में बड़ी रकम निवेश की जा रही है।

इस दौरान प्रमुख निवेश सौदों में Inox Clean Energy का 2026 में 344 मिलियन डॉलर का सीरीज़ डी फंडिंग राउंड और Erisha E Mobility का 2025 में 1 अरब डॉलर का सीरीज़ डी निवेश शामिल है। इसके अलावा British International Investment, IFC और FMO जैसी विकास वित्त संस्थाएं भी सक्रिय रूप से निवेश कर रही हैं, जो इस क्षेत्र में संस्थागत निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

नवीकरणीय ऊर्जा सबसे आगे

विभिन्न क्लाइमेट-टेक क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा सबसे आगे है, जिसने अब तक लगभग 1.5 अरब डॉलर की कुल फंडिंग आकर्षित की है। इसके अलावा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) में 477 मिलियन डॉलर, ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) में 352 मिलियन डॉलर, वायु प्रदूषण प्रबंधन (Air Pollution Management) में 237 मिलियन डॉलर और जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन (Water and Wastewater Management) में 208 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है।

यह संकेत देता है कि निवेश के अवसर अब केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

2026 में अब तक 791 मिलियन डॉलर की फंडिंग

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक इस क्षेत्र ने 74 निवेश दौरों (फंडिंग राउंड्स) के माध्यम से 791 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। हालांकि, कुल निवेश का लगभग 66% हिस्सा केवल पांच लेट-स्टेज सौदों में केंद्रित रहा, जिससे स्पष्ट है कि निवेशक फिलहाल स्थापित कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

शुरुआती चरण की गतिविधियां अपेक्षाकृत सीमित रही हैं। इस दौरान 44 सीड-स्टेज फंडिंग राउंड हुए और 15 नई कंपनियों को पहली बार निवेश प्राप्त हुआ। वहीं रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस अवधि में छह सूनिकॉर्न उभरे हैं, जबकि दो कंपनियों ने आईपीओ लॉन्च किए और एक अधिग्रहण भी हुआ। फंडिंग आकर्षित करने के मामले में नोएडा देश का शीर्ष शहर बनकर उभरा है।

भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत

कुल मिलाकर, भारत का क्लाइमेट-टेक सेक्टर अब बड़े पैमाने पर विस्तार की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सरकारी नीतियों, निवेशकों की रुचि और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों के बीच बढ़ता तालमेल इस क्षेत्र के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में क्लाइमेट-टेक भारत की स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है।
  

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