भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षा तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। इसी दिशा में काम कर रहे एडटेक स्टार्टअप YoLearn.ai ने 5 लाख डॉलर (करीब ₹4.3 करोड़) की प्री-सीड फंडिंग जुटाई है। कंपनी का मूल्यांकन इस निवेश दौर में 50 लाख डॉलर (लगभग ₹43 करोड़) रहा। इस निवेश का सह-नेतृत्व DataAlpha.ai और White Swan Global ने किया, जबकि कई एंजेल निवेशकों ने भी इस फंडिंग राउंड में भाग लिया।
कंपनी के अनुसार, इस नई पूंजी का उपयोग अपने AI आधारित ट्यूटर प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाने, वॉयस-फर्स्ट ऑडियो-विजुअल ट्यूटर विकसित करने, लाइव स्केचपैड जैसी सुविधाओं का विस्तार करने और देशभर के स्कूलों तथा प्रतियोगी परीक्षा तैयारी इकोसिस्टम तक अपनी पहुंच बढ़ाने में किया जाएगा।
रियल-टाइम बातचीत के जरिए पढ़ाएगा AI ट्यूटर
YoLearn.ai की शुरुआत जनवरी 2025 में शिक्षा विशेषज्ञ कीर्ति प्रकाश मिश्रा ने की थी। यह एक वॉयस-फर्स्ट AI ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे इस तरह तैयार किया गया है कि छात्र AI ट्यूटर से ठीक उसी तरह बातचीत कर सकें जैसे वे किसी शिक्षक से प्रश्न पूछते हैं।
इस प्लेटफॉर्म की सबसे खास विशेषता इसका लाइव इंटरैक्टिव स्केचपैड है। पढ़ाई के दौरान AI ट्यूटर केवल उत्तर नहीं देता, बल्कि व्हाइटबोर्ड पर शिक्षक की तरह चित्र, डायग्राम और समाधान बनाकर विषय को समझाता है। इससे कठिन विषयों को समझना छात्रों के लिए अधिक आसान और रोचक बन जाता है।
बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर विशेष फोकस
YoLearn.ai का प्लेटफॉर्म NCERT, CBSE, ICSE और विभिन्न राज्य बोर्डों के पाठ्यक्रम को कवर करता है। हालांकि, कंपनी का मुख्य फोकस कक्षा 9 से 12 के उन छात्रों पर है जो बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ JEE, NEET और CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं।
कंपनी का दावा है कि उसके प्लेटफॉर्म की अध्ययन सामग्री बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के पूरे पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार की गई है। AI ट्यूटर प्रत्येक छात्र की सीखने की गति, भाषा, प्रदर्शन और कमजोरियों का विश्लेषण करके उसी के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करता है।
22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है AI ट्यूटर
YoLearn.ai का AI प्लेटफॉर्म 22 भारतीय भाषाओं में वॉयस इंटरैक्शन की सुविधा देता है। इसमें हिंदी और हिंग्लिश भी शामिल हैं, जिससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि के छात्र आसानी से अपनी पसंदीदा भाषा में पढ़ाई कर सकते हैं।
कंपनी ने AI ट्यूटर को लोकप्रिय शिक्षकों की पढ़ाने की शैली के आधार पर भी विकसित किया है। इसके अलावा, साझेदार स्कूलों के लिए उनके वास्तविक शिक्षकों के AI अवतार तैयार करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे छात्र कभी भी और कहीं से भी अपने शिक्षक जैसी शैली में पढ़ाई कर सकते हैं।
वेब और मोबाइल ऐप दोनों पर उपलब्ध
YoLearn.ai का उपयोग छात्र इसकी आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ Android और iOS मोबाइल ऐप के माध्यम से भी कर सकते हैं। मोबाइल प्लेटफॉर्म पर यह YoTutor.ai नाम से उपलब्ध है।
कंपनी के अनुसार, वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म को मिलाकर अब तक 2 लाख से अधिक छात्र इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर चुके हैं। बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि AI आधारित व्यक्तिगत शिक्षण समाधान छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
अन्य AI एडटेक कंपनियों से है प्रतिस्पर्धा
AI आधारित शिक्षा के क्षेत्र में YoLearn.ai की प्रतिस्पर्धा SiglQ.AI, Fermi.AI, Arivihan.AI, CK-12, MagicSchool.AI और Lytmus.AI जैसी कंपनियों से है। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसकी सबसे बड़ी ताकत केवल कंटेंट उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक छात्र की सीखने की शैली और समझ के स्तर के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन देना है।
रटने नहीं, समझने पर है कंपनी का जोर
YoLearn.ai का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना नहीं, बल्कि छात्रों को विषयों की गहराई से समझ विकसित करने में मदद करना है।
कंपनी का मिशन ऐसे भावनात्मक रूप से बुद्धिमान (Emotionally Intelligent) AI ट्यूटर विकसित करना है, जो छात्रों को केवल जानकारी याद कराने के बजाय विषय को समझने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने में सहायता करें। इसके लिए कंपनी कॉग्निटिव साइंस, इमोशनल AI और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है, ताकि प्रत्येक छात्र को उसकी जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव मिल सके।
हर छात्र के लिए निजी AI शिक्षक बनाने का विजन
YoLearn.ai का दीर्घकालिक लक्ष्य ऐसा भविष्य तैयार करना है, जहां प्रत्येक छात्र के पास 24 घंटे उपलब्ध रहने वाला एक निजी AI शिक्षक हो।
कंपनी का मानना है कि भविष्य की शिक्षा पारंपरिक, एक जैसी शिक्षण प्रणाली तक सीमित नहीं रहेगी। AI की मदद से छात्र अपनी गति से सीख सकेंगे, जिज्ञासा के साथ नए विषयों को समझ सकेंगे और अपनी व्यक्तिगत सीखने की आवश्यकताओं के अनुसार मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे।
शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों से निकला स्टार्टअप
YoLearn.ai के फाउंडर कीर्ति प्रकाश मिश्रा पहले भारत के बड़े एडटेक इकोसिस्टम का हिस्सा रह चुके हैं। शिक्षा क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि छात्रों के पास अध्ययन सामग्री तो उपलब्ध है, लेकिन व्यक्तिगत मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग और सीखने की सही दिशा का अभाव है।
इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने YoLearn.ai की स्थापना की। उनका उद्देश्य AI की मदद से ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करना है, जो छात्रों में केवल अंक प्राप्त करने की मानसिकता के बजाय सीखने की जिज्ञासा, समझ और आत्मविश्वास को बढ़ावा दे।
AI आधारित शिक्षा का बढ़ता भविष्य
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI आधारित व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized Learning) शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसे प्लेटफॉर्म छात्रों की सीखने की गति, कमजोरियों और रुचियों का विश्लेषण कर उन्हें बेहतर मार्गदर्शन देने में सक्षम होंगे।
YoLearn.ai द्वारा जुटाई गई नई फंडिंग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि कंपनी अपने AI ट्यूटरिंग मॉडल को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक लागू करती है, तो यह बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ JEE, NEET, CUET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए अधिक प्रभावी, व्यक्तिगत और सुलभ शिक्षण समाधान उपलब्ध करा सकती है।