ब्रिटेन के Advanced Propulsion Centre (APC) ने भारत के टाटा ग्रुप की बैटरी निर्माण इकाई अग्रतास (Agratas) को £380 मिलियन (करीब 510 मिलियन डॉलर) की ग्रांट देने की आधिकारिक घोषणा की है। यह फंडिंग ब्रिटेन सरकार के £470 मिलियन के बड़े पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
यह ग्रांट Department for Business and Trade के DRIVE35 ऑटोमोटिव ट्रांसफॉर्मेशन फंड के तहत दी गई है। भारत में ब्रिटिश हाई कमीशन ने इसे UK-India साझेदारी का मजबूत उदाहरण बताया है, जो क्लीन मोबिलिटी के भविष्य को आकार दे रहा है।
यह गीगाफैक्ट्री करीब £4 बिलियन के निजी निवेश के साथ विकसित की जाएगी और इससे लगभग 4,000 प्रत्यक्ष नौकरियां उत्पन्न होने की उम्मीद है। परियोजना का पहला चरण 2027 के अंत तक चालू होने की संभावना है और इसे यूरोप की सबसे बड़ी बैटरी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में से एक माना जा रहा है।
यह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट ग्रेविटी स्मार्ट कैंपस (Gravity Smart Campus), ब्रिजवॉटर (समरसेट) के पास स्थापित किया जाएगा, जहां अग्रतास (Agratas) मुख्य और पहली कंपनी होगी। इस प्लांट की उत्पादन क्षमता 40 गीगावाट-घंटे (GWh) रहने का अनुमान है।
समरसेट गीगाफैक्ट्री शुरुआती दौर में जगुआर लैंड रोवर (Jaguar Land Rover) को सप्लाई करेगी और भविष्य में अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी सपोर्ट कर सकती है। ब्रिटेन सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा और आयात पर निर्भरता कम करते हुए घरेलू बैटरी उत्पादन को बढ़ावा देगा।