इसमें ड्रोन के लिए डॉकिंग, चार्जिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं, जो बिना मैनुअल हस्तक्षेप के ड्रोन को लगातार उड़ान भरने में मदद करते हैं।
कंपनी एक इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक तैयार कर रही है, जिसमें हार्डवेयर, फर्मवेयर और सॉफ्टवेयर शामिल हैं। इसमें ऑटोनॉमस डॉकिंग, स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट, हाई-पावर चार्जिंग, एम्बेडेड इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लाउड-बेस्ड फ्लीट मॉनिटरिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं। कंपनी के 2,000 से अधिक यूनिट्स पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। इसके पास ₹100 करोड़ की ऑर्डर पाइपलाइन है और अमेरिका व यूरोप में भी शुरुआती कारोबार हासिल किया है।
बेंगलुरु में स्थित डीप-टेक कंपनी AlgoFET Private Limited ने बताया कि उसने मुंबई स्थित डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश करने वाले VC फंड Piper Serica से Pre-Series A राउंड में ₹15 करोड़ जुटाए हैं। कंपनी इस फंडिंग का इस्तेमाल नई पीढ़ी के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोडक्ट्स विकसित करने, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, अपनी प्रॉपर्टरी IP को मजबूत करने और डिफेंस, एंटरप्राइज तथा ग्लोबल मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए करेगी।
ड्रोन के लिए ऑटोनॉमस ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही AlgoFET
ड्रोन आज डिफेंस, कृषि, लॉजिस्टिक्स, निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनके इस्तेमाल के बढ़ने के साथ ड्रोन को लंबे समय तक हवा में बनाए रखना भी जरूरी हो गया है। लेकिन चार्जिंग, बैटरी बदलना और ड्रोन को दोबारा ऑपरेशन में लाना अभी भी काफी हद तक मैनुअल प्रक्रिया है। AlgoFET इस समस्या को दूर करने के लिए ऐसा ऑटोनॉमस ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही है, जो ड्रोन को कम से कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ वापस आने, चार्ज होने और दोबारा उड़ान भरने में सक्षम बनाता है।
दिसंबर 2023 में IIT गुवाहाटी के पूर्व छात्र अंकित मिश्रा द्वारा स्थापित AlgoFET ऑटोनॉमस ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है, जिससे ड्रोन खुद ही वापस आकर चार्ज हो सकें और दोबारा उड़ान भर सकें। पिछले दशक में ड्रोन इनोवेशन का ज्यादा ध्यान हवा में होने वाली गतिविधियों पर रहा है, जबकि AlgoFET उस ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है, जो ऑटोनॉमस फ्लाइट को लगातार, बिना निगरानी और बड़े स्तर पर संचालित करने के लिए जरूरी है।
AlgoFET की अपनी टेक्नोलॉजी पांच मुख्य स्तरों पर आधारित है। इसमें ऑटोनॉमस डॉकिंग मैकेनिज्म, स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट, हाई-पावर चार्जिंग सिस्टम, एम्बेडेड इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्मवेयर तथा क्लाउड-बेस्ड फ्लीट मॉनिटरिंग शामिल हैं। ये सभी तकनीकें एक इंटीग्रेटेड हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर सिस्टम के रूप में काम करती हैं। कंपनी किसी एक समाधान के बजाय एक पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जिससे ड्रोन का अपटाइम बढ़ेगा, भरोसेमंद संचालन सुनिश्चित होगा और मिशन के लिए ड्रोन जल्दी तैयार हो सकेंगे।
कंपनी अब तक 2,000 से अधिक यूनिट्स तैनात कर चुकी है और उसके पास 4,000 से अधिक यूनिट्स की ऑर्डर पाइपलाइन है। कंपनी भारत के प्रमुख ड्रोन OEMs और भारतीय सेना के साथ काम कर रही है और उसके पास ₹100 करोड़ का ऑर्डर बुक है। इसका इंफ्रास्ट्रक्चर डिफेंस, एंटरप्राइज और ग्लोबल ड्रोन मार्केट की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।
12,000 वर्ग फुट की मैन्युफैक्चरिंग सुविधा से बढ़ेगा विस्तार
कंपनी ने 12,000 वर्ग फुट की पूरी तरह से ऑपरेशनल मैन्युफैक्चरिंग सुविधा तैयार की है। नई फंडिंग से AlgoFET ऑटोनॉमस ड्रोन इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए जरूरी सिस्टम तैयार करेगी। इसमें नई पीढ़ी के ऑटोनॉमस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोडक्ट्स का विकास, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना, डॉकिंग, चार्जिंग, बैटरी मैनेजमेंट, फर्मवेयर और फ्लीट सॉफ्टवेयर से जुड़ी प्रॉपर्टरी IP को मजबूत करना शामिल है। कंपनी डिफेंस, एंटरप्राइज, अमेरिका और यूरोप जैसे ग्लोबल मार्केट में भी विस्तार करेगी।
फंडिंग पर टिप्पणी करते हुए AlgoFET के फाउंडर अंकित मिश्रा ने कहा, “भारत ने ड्रोन टेक्नोलॉजी में काफी निवेश किया है, लेकिन अभी ऐसा ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं हुआ है, जो ड्रोन को लगातार हवा में बनाए रख सके। हर मिशन बैटरी खत्म होने के बाद रुक जाता है और फिर इंसान को हस्तक्षेप करना पड़ता है। AlgoFET इसी समस्या को दूर करने के लिए काम कर रही है। हम केवल बेहतर चार्जर नहीं, बल्कि पूरे ड्रोन इकोसिस्टम के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं। यह फंडिंग हमें इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित करने में मदद करेगी।”
Piper Serica के Investment Professional हार्दिक दुआ ने कहा, “ड्रोन तेजी से नागरिक और रक्षा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बन रहे हैं। जैसे-जैसे इनका इस्तेमाल और ऑटोनॉमस ऑपरेशन बढ़ेगा, इन्हें पावर देने, मैनेज करने और लगातार चलाए रखने वाले सिस्टम भी उतने ही जरूरी होंगे। ड्रोन इकोसिस्टम का अगला चरण केवल उड़ान पर निर्भर नहीं होगा, बल्कि उन स्मार्ट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी निर्भर करेगा, जो इन सिस्टम को लंबे समय तक ऑपरेशनल बनाए रखते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए ऐसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर अपनी पकड़ मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि AlgoFET का इंटीग्रेटेड मॉडल, जिसमें स्मार्ट पावर सिस्टम, बैटरी इंटेलिजेंस और ऑटोनॉमस ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं, कंपनी को भारत से एक ग्लोबल और महत्वपूर्ण ड्रोन टेक्नोलॉजी कंपनी बनाने की क्षमता देता है।