AI के दौर में BITS Pilani का बड़ा बदलाव, अंडरग्रेजुएट करिकुलम में प्रैक्टिकल लर्निंग और रिसर्च पर जोर

AI के दौर में BITS Pilani का बड़ा बदलाव, अंडरग्रेजुएट करिकुलम में प्रैक्टिकल लर्निंग और रिसर्च पर जोर

AI के दौर में BITS Pilani का बड़ा बदलाव, अंडरग्रेजुएट करिकुलम में प्रैक्टिकल लर्निंग और रिसर्च पर जोर
संस्थान अंडरग्रेजुएट लैब्स को अपग्रेड करने के लिए इस साल ₹50 करोड़ से अधिक का निवेश करेगा। नए करिकुलम में रिसर्च, एंटरप्रेन्योरशिप, इंडस्ट्री एक्सपोजर और छात्रों की मेंटल हेल्थ पर भी ध्यान दिया जाएगा।


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच BITS Pilani ने अपने अंडरग्रेजुएट करिकुलम में बदलाव किए हैं। संस्थान का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय प्रैक्टिकल लर्निंग, रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए तैयार करना है। नए करिकुलम में छात्रों की मानसिक और शारीरिक सेहत को भी महत्व दिया गया है।

BITS Pilani के ग्रुप वाइस-चांसलर प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव के अनुसार, AI ने ज्ञान तक पहुंच को अधिक आसान बना दिया है। ऐसे में छात्रों के लिए स्वतंत्र रूप से सोचने, नई चीजें बनाने और वास्तविक समस्याओं का समाधान विकसित करने की क्षमता जरूरी हो गई है। वहीं उन्होंने कहा, “हमारा ध्यान अब छात्रों को स्वतंत्र रूप से कुछ बनाने के लिए आत्मविश्वास और जरूरी कौशल देने पर है।”

लैब्स के अपग्रेड पर ₹50 करोड़ से अधिक का निवेश

संस्थान इस साल अपने पिलानी, गोवा और हैदराबाद कैंपस की अंडरग्रेजुएट लैब्स को अपग्रेड करने के लिए ₹50 करोड़ से अधिक का निवेश कर रहा है। इसका उद्देश्य प्रयोगशालाओं को तकनीकी बदलावों के अनुरूप तैयार करना और छात्रों को प्रयोग, डिजाइन तथा प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई के बेहतर अवसर देना है।

करिकुलम में Undergraduate Research Opportunities Programme (UROP), Advanced UROP और Super UROP के माध्यम से रिसर्च को भी अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। इन कार्यक्रमों के जरिए छात्र शुरुआती रिसर्च से लेकर एडवांस्ड प्रोजेक्ट और थीसिस वर्क तक आगे बढ़ सकते हैं।

इंडस्ट्री एक्सपोजर और एंटरप्रेन्योरशिप पर फोकस

नए करिकुलम में छात्रों को सामाजिक समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्थान के अनुसार, छात्रों को अपने कोर्सवर्क के हिस्से के रूप में समाधान विकसित करने और उनका परीक्षण करने के लिए फंडिंग भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, संस्थान का Practice School कार्यक्रम छात्रों को इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव और मेंटरशिप उपलब्ध कराता है। एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े अवसरों के माध्यम से छात्र अपने आइडिया को प्रोडक्ट और नए कारोबार में बदलने की दिशा में काम कर सकते हैं।

करिकुलम में साइंस, इंजीनियरिंग और कंप्यूटिंग के साथ ह्यूमैनिटीज, आर्ट्स और सोशल साइंसेज को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को व्यापक शैक्षणिक आधार देना और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है।

छात्रों की मेंटल हेल्थ और वेल-बीइंग पर भी ध्यान

अकादमिक और प्रोफेशनल विकास के साथ BITS Pilani ने छात्रों की शारीरिक और मानसिक सेहत को भी करिकुलम का हिस्सा बनाया है। इसमें फिटनेस, रचनात्मक गतिविधियों, वेल-बीइंग वर्कशॉप, सामाजिक व्यवहार और सामुदायिक भागीदारी से जुड़ी गतिविधियों के लिए लगभग 60 घंटे निर्धारित किए गए हैं। 

प्रोफेसर राव के मुताबिक, करिकुलम में बदलाव के लिए अलग-अलग विभागों और कैंपस के लगभग 250 फैकल्टी सदस्यों ने योगदान दिया। रिक्रूटर्स, पूर्व छात्रों और स्टूडेंट सर्वे से मिले फीडबैक को भी इसमें शामिल किया गया। अत: नया करिकुलम छात्रों के अकादमिक कार्यभार को समझने के लिए सेल्फ-स्टडी और चिंतन में लगने वाले समय को भी ध्यान में रखता है। संस्थान का मानना है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ स्वस्थ आदतें विकसित करने और सार्थक संबंध बनाने के लिए भी समय मिलना चाहिए।

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities