स्कूली शिक्षा को उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने की जरूरत पर जोर देते हुए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टीके अनिल कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए शिक्षा से कामकाजी दुनिया तक पहुंचने का रास्ता आसान और सहज होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत एकेडमिक और वोकेशनल एजुकेशन के बीच के अंतर को कम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स के सहयोग से 26 और 27 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में ‘स्कूली शिक्षा से रोजगार तक की राह सुगम बनाने’ विषय पर चौथे राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय और CBSE के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मंदीप भंडारी भी उपस्थित रहे।
NEP 2020 के तहत वोकेशनल एजुकेशन पर जोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए अनिल कुमार ने कहा कि NEP 2020 वोकेशनल ट्रेनिंग को मुख्यधारा की शिक्षा में शामिल करने और एकेडमिक तथा व्यावसायिक शिक्षा के बीच बने कृत्रिम अंतर को समाप्त करने की दिशा में काम करती है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कौशल हासिल करने के अवसर देना है, ताकि वे भविष्य में रोजगार और करियर से जुड़े बेहतर निर्णय ले सकें।
उन्होंने कहा कि स्कूल स्तर पर विकसित की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में लगातार सीखते रहने की क्षमता शामिल है। बदलती तकनीक और रोजगार की आवश्यकताओं के बीच विद्यार्थियों के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे कौशल भी सीखने होंगे, जिनका उपयोग वे वास्तविक कार्यक्षेत्र में कर सकें।
कौशल विकास और करियर गाइडेंस की चार प्रमुख प्राथमिकताएं
शिखर सम्मेलन में स्कूली शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। इनमें तकनीक, डिजिटल सुरक्षा और कौशल विकास; डिजाइन, रचनात्मकता और नवाचार; राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के माध्यम से अलग-अलग शिक्षा प्रणालियों में अर्जित कौशल की पहचान; और समान अवसरों के साथ करियर गाइडेंस शामिल हैं।
इन प्राथमिकताओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी रुचि, क्षमता और करियर की संभावनाओं के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर देना है। राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के माध्यम से विभिन्न शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणालियों में हासिल किए गए कौशल को मान्यता देने पर भी जोर दिया गया, जिससे सीखने के अलग-अलग रास्तों के बीच तालमेल बेहतर हो सके।
स्कूल से कामकाजी दुनिया तक आसान होगा बदलाव
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्देश्य कौशल शिक्षा को स्कूली पढ़ाई के साथ जोड़ना और विद्यार्थियों के लिए स्कूल से रोजगार की दुनिया में प्रवेश को आसान बनाना है। इसमें शिक्षा की अलग-अलग धाराओं के बीच की बाधाओं को कम करने और बदलते रोजगार बाजार के लिए विद्यार्थियों की क्षमताएं विकसित करने पर जोर दिया गया।
इस दौरान CBSE से संबद्ध स्कूलों के शिक्षक कौशल शिक्षा से जुड़ी सफल पहलों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर आधारित शोध-पत्र तथा पोस्टर प्रस्तुत कर रहे हैं। सम्मेलन के जरिए शिक्षकों को स्कूली शिक्षा में उभरते रुझानों, नवाचारों और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को बेहतर बनाने वाली व्यावहारिक रणनीतियों को साझा करने का अवसर भी मिल रहा है। अत: इस पहल के माध्यम से स्कूली शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के कौशल, करियर संबंधी समझ और रोजगार की तैयारी से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।