Carlsberg Group के संभावित IPO से सप्लाई चेन कंपनियों पर नजर

Carlsberg Group के संभावित IPO से सप्लाई चेन कंपनियों पर नजर

Carlsberg Group के संभावित IPO से सप्लाई चेन कंपनियों पर नजर
कार्ल्सबर्ग ग्रुप Carlsberg Group की भारतीय इकाई के संभावित IPO से वितरण और उत्पादन विस्तार की उम्मीद बढ़ी है। इससे Asgard Alcobev Ltd. जैसी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए मांग और विकास के नए अवसर बन सकते हैं।

डेनमार्क की ब्रूइंग कंपनी कार्ल्सबर्ग ग्रुप (Carlsberg Group) अपनी भारतीय इकाई की 2026 में संभावित लिस्टिंग की तैयारी कर रही है। अनुमान है कि कंपनी का मूल्यांकन 30,000 करोड़ से 35,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। इस कदम को भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते बाजार में मूल्य अनलॉक करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां कंपनी करीब 20 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।

इस संभावित आईपीओ  से कंपनी के वितरण नेटवर्क, प्रीमियम पोर्टफोलियो और उत्पादन क्षमता में विस्तार की उम्मीद है, जिसका सीधा प्रभाव कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर पड़ सकता है। इन्हीं में एक प्रमुख नाम Asgard Alcobev Ltd. है, जिसे पहले Banganga Paper Industries के नाम से जाना जाता था।

वर्ष 2026 की शुरुआत में कंपनी ने अपना नाम बदलकर असगार्ड एल्कोबेव लिमिटेड (Asgard Alcobev Ltd.) कर लिया और सीएमजे ब्रुअरीज (CMJ Breweries) में लगभग 79 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। मेघालय स्थित यह ब्रूइंग सुविधा पूर्वोत्तर भारत में कार्ल्सबर्ग इंडिया (Carlsberg India) और यूनाइटेड ब्रुअरीज (United Breweries) के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में काम करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आईपीओ के बाद कार्ल्सबर्ग अपने वितरण और मार्केटिंग नेटवर्क को मजबूत करता है, तो उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। इससे CMJ ब्रुअरीज जैसे संयंत्रों की उत्पादन क्षमता और राजस्व में वृद्धि की संभावना है, जिसका लाभ असगार्ड अल्कोबेवर को मिल सकता है।

कंपनी ने अपने संचालन को मजबूत करने के लिए पंजीकृत कार्यालय को शिलांग स्थानांतरित किया है, जो ब्रूइंग गतिविधियों पर उसके दीर्घकालिक फोकस को दर्शाता है। उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि भारत में शराब उद्योग की लगभग 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर और लाइसेंसिंग बाधाओं के कारण कॉन्ट्रैक्ट ब्रुअर्स के लिए निवेश आकर्षण बढ़ सकता है।इस प्रकार, जहां संभावित IPO सुर्खियां बटोर सकता है, वहीं सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए भी विकास के नए अवसर उभरते दिख रहे हैं।

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