केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि National Education Policy 2020 (NEP 2020) के जरिए शिक्षा प्रणाली को अधिक संतुलित और बच्चों के अनुकूल बनाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई का दबाव कम हो सके।
साथ ही शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि बच्चों में बढ़ता तनाव केवल एक समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक चुनौती है। आज के समय में बच्चों पर अपेक्षाएं और प्रतिस्पर्धा दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। डिजिटल उपकरणों ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है, लेकिन इसकी जड़ें समाज की सोच और बढ़ती अपेक्षाओं में हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना जरूरी है। ज्यादा स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया पर तुलना और लगातार मिलने वाली जानकारी बच्चों में चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ा रही है। आज बच्चे सिर्फ पढ़ाई नहीं कर रहे, बल्कि हर समय दूसरों के नजरिए से खुद को आंकते रहते हैं।
सिर्फ नीति नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी
मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर उन्होंने साफ कहा कि केवल सरकारी नीतियां काफी नहीं हैं। इसके लिए समाज, माता-पिता और मीडिया सभी को मिलकर काम करना होगा, उन्होंने आगे कहा कि माता-पिता को समझना चाहिए कि सफलता केवल कोचिंग या कुछ चुनिंदा परीक्षाओं से तय नहीं होती। बच्चों के जीवन में संतुलन जरूरी है, जिसमें पढ़ाई के साथ खेल, बातचीत, आराम और पारिवारिक समय भी शामिल हो। एक स्वस्थ माहौल ही बच्चों को तनाव से बचा सकता है।
NEP 2020 से पढ़ाई में बड़ा बदलाव
National Education Policy 2020 के तहत शिक्षा में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। नए पाठ्यक्रम, सिलेबस और पढ़ाने के तरीकों में खेल, कला और स्किल डेवलपमेंट को शामिल किया गया है।
बैग-लेस दिनों और स्किल बेस्ड कोर्सेज का उद्देश्य बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करना है। अब जोर रटने की बजाय समझ और कौशल विकसित करने पर है। मंत्री ने कहा कि छात्रों को केवल JEE या NEET जैसी परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। यह 360 डिग्री दृष्टिकोण बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाता है और तनाव कम करता है।
मातृभाषा से आसान होगी पढ़ाई
कक्षा में बच्चों का तनाव कम करने के लिए मातृभाषा में पढ़ाई को बेहद अहम बताया गया है। मंत्री के अनुसार, जब बच्चे अपनी ही भाषा में पढ़ते हैं तो उनकी समझ बेहतर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कई बार स्कूल और घर की भाषा अलग होने से बच्चे असहज महसूस करते हैं, जिससे उनका तनाव बढ़ता है। कक्षा 5 तक और संभव हो तो कक्षा 8 तक मातृभाषा में शिक्षा देने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है और पढ़ाई अधिक सरल और सहज बनती है।
डिजिटल और AI के साथ संतुलन जरूरी
डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर मंत्री ने कहा कि इसे संतुलन और समझदारी के साथ अपनाना जरूरी है। भारत में तेजी से बढ़ रहे इंटरनेट और स्मार्टफोन उपयोग के बीच बच्चों की सुरक्षा और सही मार्गदर्शन बेहद जरूरी है।
सरकार “AI in Education” और “AI for Education” जैसे प्रयासों पर काम कर रही है, साथ ही डेटा प्राइवेसी और सुरक्षित डिजिटल माहौल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक एक अवसर भी है और चुनौती भी, इसलिए इसे समझदारी से इस्तेमाल करना जरूरी है।
जागरूकता ही है सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज के समय में इंटरनेट और AI ज्ञान हासिल करने के लिए जरूरी हैं। लेकिन इनके सुरक्षित उपयोग के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है। जैसे आग का सही इस्तेमाल फायदेमंद है और गलत इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है, वैसे ही तकनीक का भी जिम्मेदारी से उपयोग जरूरी है, उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को तकनीक के साथ अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि उन्हें सही दिशा दिखानी चाहिए। हर नई तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां आती हैं, लेकिन सही शिक्षा, समझ और सामूहिक जिम्मेदारी से इनका समाधान संभव है।