पॉलिसीबाज़ार के आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रिक कारों के इंश्योरेंस क्लेम की औसत लागत समान कीमत वाली ICE कारों की तुलना में 14% अधिक है। पहले तीन साल के स्वामित्व वाली और 10–15 लाख की कीमत वाली कारों के डेटा के मुताबिक, ईवी का औसत क्लेम ₹41,543 रहा, जबकि ICE कारों के लिए यह ₹36,185 था। इस तुलना में बड़े नुकसान वाले क्लेम को शामिल नहीं किया गया है।
पॉलिसीबाज़ार (Policybazaar) के अनुसार, ईवी में बैटरी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, इम्पोर्टेड कंपोनेंट्स और सीमित ईवी रिपेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण क्लेम की लागत अधिक हो सकती है। करीब 80% ईवी मालिक कम से कम दो प्रमुख इंश्योरेंस ऐड-ऑन लेते हैं, जिनमें बैटरी प्रोटेक्शन, जीरो डेप्रिसिएशन, रोडसाइड असिस्टेंस और कंज्यूमेबल्स कवर शामिल हैं। इसके मुकाबले डीजल कार मालिकों में यह आंकड़ा 77% और पेट्रोल कार मालिकों में 75% है।
ईवी मालिकों के बीच बैटरी प्रोटेक्शन कवर का इस्तेमाल पिछले छह महीनों में 51% से बढ़कर 70% हो गया है। यह कवर पॉलिसी की शर्तों के तहत पानी जाने और पावर सर्ज जैसे जोखिमों से सुरक्षा प्रदान कर सकता है। पॉलिसीबाज़ार (Policybazaar) के मुताबिक, बैटरी कूलिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफोटेनमेंट सिस्टम जैसे अन्य ईवी कंपोनेंट्स की रिप्लेसमेंट लागत भी अधिक हो सकती है। कुछ मॉडलों में बैटरी रिप्लेसमेंट वाहन की कुल लागत का 40–50% तक हो सकता है।
बॉडी स्टाइल के आधार पर EV SUVs में सबसे अधिक क्लेम फ्रीक्वेंसी दर्ज की गई। SUVs में प्रति 100 इंश्योर्ड वाहनों पर 31 क्लेम आए, जबकि हैचबैक में 28 और सेडान में 26 क्लेम दर्ज किए गए। वहीं, मानसून के दौरान ईवी की औसत क्लेम लागत करीब 65,000 रही, जो सामान्य अवधि के लगभग 52,000 से 25% ज्यादा है। कंपनी ने बाढ़, जलभराव और खराब मौसम को इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों में शामिल किया है।
क्षेत्रीय स्तर पर पूर्वी भारत में ईवी क्लेम फ्रीक्वेंसी सबसे अधिक 41 क्लेम प्रति 100 इंश्योर्ड ईवी रही। इसके बाद उत्तर भारत में 34, पश्चिमी भारत में 32, पूर्वोत्तर भारत में 30 और दक्षिण भारत में 27 क्लेम दर्ज किए गए। Tier-II शहरों में यह आंकड़ा 33, Tier-I शहरों में 30 और Tier-III शहरों में 27 क्लेम प्रति 100 इंश्योर्ड ईवी रहा। पॉलिसीबाज़ार के मोटर बीमा हेड पारस पसरीचा के अनुसार, डेटा ईवी और आईसीई वाहनों के अलग-अलग रिस्क प्रोफाइल को दर्शाता है, जिसमें ईवी में औसत क्लेम लागत और बैटरी प्रोटेक्शन जैसे ऐड-ऑन्स का उपयोग अधिक देखा जा रहा है।