स्वानिति इनिशिएटिव (Swaniti Initiative) और पर्पज़ (Purpose) द्वारा आयोजित एक विशेष संवाद में महिला सांसदों, महिला ट्रक ड्राइवरों और फ्लीट ऑपरेटरों ने एक साथ मिलकर जेंडर-इन्क्लूसिव फ्रेट इलेक्ट्रिफिकेशन पर रणनीतियों पर चर्चा की। इस संवाद में महिलाओं के वास्तविक अनुभवों को सामने लाया गया और इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाएं कैसे स्वच्छ परिवहन की दिशा में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकती हैं।
भारत का ट्रकिंग सेक्टर तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है, जिससे 2050 तक लगभग 3 करोड़ नौकरियों के सृजन का अनुमान है। इनमें से करीब 21% नौकरियां जीरो एमिशन ट्रक्स (ZETs) से जुड़ी होंगी। यह बदलाव महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोल सकता है। पर्पज़ की साझेदारी प्रमुख सौदामिनी जुत्शी ने बताया कि भारत के ईवी वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी 11–15% तक पहुंच चुकी है, जो बदलाव का शुरुआती संकेत है।
स्वानिति इनिशिएटिव की ट्रस्टी उमा भट्टाचार्य ने कहा कि जेंडर संतुलन के लिए ठोस नीतिगत फैसले जरूरी हैं। वहीं, रीमा लॉजिस्टिक्स की सीईओ रीमा जोगानी ने महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए सुरक्षित पार्किंग और सीसीटीवी जैसी बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता बताई।
इलेक्ट्रिक बस पायलट उम्मतुनबीबी जहांगीर शेख ने कहा कि ईवी चलाने से न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि उन्हें सम्मान भी मिला है। महिला सांसद डॉ. फौजिया खान ने ईवी को समाज, सरकार और उद्योग के सहयोग से जेंडर-संवेदनशील तरीके से अपनाने की जरूरत पर बल दिया।
डॉ. संगीता बलवंत और एडवोकेट प्रिया सरोज ने भी महिलाओं की बढ़ती भूमिका और जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियों को उजागर किया। सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने महिलाओं के लिए सुरक्षित और सहयोगी वातावरण बनाने का आश्वासन दिया।
यह संवाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि भारत का क्लीन फ्रेट ट्रांजिशन केवल तकनीक का बदलाव नहीं है, बल्कि यह लोगों—खासतौर पर महिलाओं—की भागीदारी पर निर्भर करता है। अब जरूरत है एक ऐसे भविष्य के निर्माण की, जिसमें महिलाएं शुरुआत से ही केंद्र में हों।