केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने भारत के ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम में प्राथमिकताओं को बदलने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब केवल चार्जिंग प्वाइंट्स की संख्या बढ़ाने के बजाय सर्विस क्वालिटी, आसान पहुंच और इंटरऑपरेबिलिटी (आपसी तालमेल) पर ध्यान देना जरूरी है।
मंत्री ने यह बात नए इंडस्ट्री कंसोर्टियम Light Electric-Vehicle Acceleration Forum (LEAF) के लॉन्च के दौरान कही, जो EV चार्जिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव देने के लिए भरोसेमंद और सहज चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना आवश्यक है।
भारत में ईवी अपनाने की रफ्तार अभी शुरुआती चरण में है, जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। देश में 29,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन होने के बावजूद, अलग-अलग ऐप, भुगतान सिस्टम और कई बार खराब स्टेशनों जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक ईवी की 30% बाजार हिस्सेदारी हासिल करना है। 2025 में ईवी की हिस्सेदारी लगभग 8% रही, जिसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का योगदान करीब 56% रहा। हालांकि, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इस तेजी से बढ़ती मांग के साथ कदम नहीं मिला पा रहा है। ईवी-से-चार्जर अनुपात 2024 में 12:1 से बढ़कर 2025 में 20:1 हो गया है।
इस अंतर को कम करने के लिए सरकार ने PM E-Drive Scheme के तहत 10,000 करोड़ रुपये में से 2,000 करोड़ रुपये चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए निर्धारित किए हैं।
लीफ (LEAF) फोरम का उद्देश्य चार्जिंग नेटवर्क के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना, सेवा की विश्वसनीयता सुधारना और यूजर्स को एक समान अनुभव देना है। इसके तहत LECCS (Light Electric Combined Charging System) जैसे मानकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे Bureau of Indian Standards (भारतीय मानक ब्यूरो) ने “Type 7” कनेक्टर के रूप में मंजूरी दी है, जो AC और DC दोनों तरह की चार्जिंग को सपोर्ट करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क की विश्वसनीयता और इंटरऑपरेबिलिटी में सुधार से रेंज एंग्जायटी कम होगी और भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने में तेजी आएगी।