अपने बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की तैयारी कर रही Walmart-स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart ने जेन ड्यूक (Jane Duke) को Chief Ethics & Compliance Officer (CECO) नियुक्त किया है। यह कदम कंपनी के गवर्नेंस, पारदर्शिता और रेगुलेटरी तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अपने नए पद में जेन ड्यूक, Walmart International के Chief Ethics & Compliance Officer क्रिस सायरेन (Chris Cyrenne) को रिपोर्ट करेंगी और Flipkart Group के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति के साथ मिलकर काम करेंगी। यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब Flipkart सार्वजनिक बाजारों में उतरने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।
जेन ड्यूक के पास करीब 30 वर्षों का अनुभव है, जिसमें पब्लिक सेक्टर एनफोर्समेंट और कॉरपोरेट कंप्लायंस दोनों शामिल हैं। हाल ही में वह Tyson Foods में वाइस प्रेसिडेंट और एसोसिएट जनरल काउंसल के पद पर थीं और इससे पहले कंपनी की Chief Compliance Officer भी रह चुकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने यूएस अटॉर्नी ऑफिस, ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ अर्कांसस में एक दशक से अधिक समय तक सेवाएं दीं और 2007 से चार वर्षों तक यूएस अटॉर्नी के रूप में कार्य किया।
नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए Flipkart Group CEO कल्याण कृष्णमूर्ति ने कहा कि जेन ड्यूक का एथिक्स, कंप्लायंस और गवर्नेंस में गहरा अनुभव Flipkart के संस्थागत ढांचे और ईमानदारी की संस्कृति को और सशक्त करेगा, खासकर ऐसे समय में जब कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है।
यह नेतृत्व परिवर्तन Flipkart में हाल ही में हुए एक अहम संरचनात्मक बदलाव के बाद आया है। दिसंबर 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने Flipkart की आठ कंपनियों के विलय को मंजूरी दी थी, जिसे कंपनी के भारतीय डोमिसाइल की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस योजना के तहत, सिंगापुर में पंजीकृत आठ कंपनियों—जिनमें Flipkart Health Pvt Ltd, Flipkart Marketplace Pvt Ltd और Flipkart Private Ltd शामिल हैं—का विलय Flipkart Internet Private Limited, बेंगलुरु स्थित ऑपरेटिंग इकाई, में किया जाएगा।
अब इस विलय प्रक्रिया को सिंगापुर की अदालत और इसके बाद भारत में Registrar of Companies (RoC) से मंजूरी लेनी होगी। सूत्रों के अनुसार, अंतिम स्वीकृति प्रेस नोट 3 के तहत सरकारी अनुमोदन पर निर्भर करेगी, जो भारत से लगी सीमा वाले देशों से निवेश को नियंत्रित करता है।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पुनर्गठन एक रणनीतिक “रिवर्स फ्लिप” है, जो Flipkart के कानूनी आधार को उसके मुख्य भारतीय ऑपरेशंस के अनुरूप बनाता है और IPO से पहले नियामकीय स्पष्टता और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद करेगा।