देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक पारंपरिक कहावत का उदाहरण दिया और कहा कि 'ज्ञान पाने के लिए लगातार प्रयास जरूरी है।' उन्होंने बताया कि जब छात्र खुद सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तो उनकी सीखने की क्षमता और बेहतर हो जाती है।
पीएम मोदी ने बेंगलुरु की एक खास पहल का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि Prayog Institute of Education Research स्कूल के छात्रों में साइंस शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। यह संस्थान रिसर्च-आधारित पढ़ाई पर ध्यान देता है और इसने ‘अन्वेषण’ (Anveshan) नाम का एक कार्यक्रम शुरू किया है।
यह प्रोग्राम कक्षा 9 से 12 के छात्रों को केमिस्ट्री, अर्थ साइंस और वेलनेस जैसे विषयों में नए प्रयोग और इनोवेशन करने का मौका देता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस पहल से छात्रों को रिसर्च का अनुभव मिलता है और वे अपने प्रोजेक्ट्स को पब्लिश भी कर सकते हैं।
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साथ ही ‘परीक्षा पे चर्चा’ का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कई छात्र साइंस से डरते हैं। उन्होंने बताया कि ‘अन्वेषण’ जैसी पहलें इस डर को दूर करने में मदद करती हैं, क्योंकि इसमें बच्चे खुद प्रयोग करके सीखते हैं, जिससे उनमें जिज्ञासा और रुचि बढ़ती है।
प्रधानमंत्री ने Prayog टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहलें युवाओं में वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) विकसित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रैक्टिकल लर्निंग से प्रेरित होकर कई छात्र भविष्य में साइंस के क्षेत्र में करियर बनाएंगे और कुछ आगे चलकर बड़े वैज्ञानिक भी बन सकते हैं।