बजट 2026-27 में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित स्किलिंग और ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट’ फ्रेमवर्क पर जोर दिया गया है। हालांकि ऑनलाइन लर्निंग पर GST में कोई राहत नहीं मिली, एडटेक सेक्टर के नेताओं का मानना है कि यह बजट शिक्षा में परिणाम-प्रधान (Outcome-led) विकास की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
एडटेक सेक्टर के नेता मानते हैं कि केंद्रीय बजट 2026-27 ने यह साफ संदेश दिया है कि भारत की विकास कहानी अब रोजगार, AI तैयारियों और परिणाम-प्रधान शिक्षा पर निर्भर होगी। हालांकि लंबे समय से उद्योग की मांग थी कि ऑनलाइन लर्निंग पर GST को कम किया जाए, वह मांग इस बार पूरी नहीं हुई।
‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट और एंटरप्राइज’ फ्रेमवर्क, स्किलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री-लिंक्ड लर्निंग के जोर से बजट का फोकस अब सिर्फ शिक्षा तक पहुंच (Access) बढ़ाने से हटकर, बड़े पैमाने पर टैलेंट तैयार करने (Talent Conversion) पर है।
बजट 2026-27 में शिक्षा मंत्रालय को अब तक के सबसे बड़े बजट आवंटनों में से एक मिला। इसके साथ ही कई घोषणाएं की गईं, जैसे कि ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ स्थायी समिति बनाने का प्रस्ताव, औद्योगिक कॉरिडोर के पास यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, पेशेवर संस्थानों द्वारा तैयार किए गए मॉड्यूलर स्किलिंग फ्रेमवर्क और शिक्षा व मेडिकल खर्चों पर TCS 2 प्रतिशत करने की घोषणा।
एजूकेशन से रोजगार तक का बदलाव
अपग्रेड के सीईओ-उच्च शिक्षा कार्यक्रम, अनुज विश्वकर्मा ने इस बदलाव को प्रतीकात्मक के बजाय संरचनात्मक बताया।
उन्होंने कहा, “यह बजट एक सच्चाई को मानता है: भारत की वृद्धि सिर्फ शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने से नहीं होगी, बल्कि इस बात से होगी कि पढ़ाई कितनी जल्दी उत्पादक टैलेंट में बदलती है। स्किलिंग, AI तैयारियों और ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट’ पर ध्यान दिखाता है कि भविष्य का काम अब यहां है। AI भारत के कामगारों के लिए खतरा नहीं, बल्कि उत्पादकता बढ़ाने वाला उपकरण है। शिक्षा, उद्योग और नई तकनीक को जोड़कर सरकार बड़े स्तर पर लगातार स्किलिंग का आधार तैयार कर रही है।”
उन्होंने कहा कि किसानों, STEM में महिलाओं या ICAI और ICSI जैसे पेशेवर संस्थानों के माध्यम से छोटे और मॉड्यूलर कोर्स डिजाइन करना यह दिखाता है कि अब शिक्षा का फोकस केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं बल्कि परिणाम-प्रधान (applied, outcome-led) सीखने पर है। इसका मतलब यह है कि सरकार मॉड्यूलर, छोटे और इंडस्ट्री-डिज़ाइन किए गए कोर्स को मुख्यधारा की शिक्षा का हिस्सा बनाने जा रही है।
संरचित शिक्षा और स्किलिंग का इकोसिस्टम
जारो एजुकेशन की सीईओ रंजीता रमन इन घोषणाओं को भारत की दीर्घकालिक आर्थिक महत्वाकांक्षा के अनुरूप देखती हैं।
उन्होंने कहा, “सरकार ने स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री-लिंक्ड शिक्षा को अपनी प्राथमिकता में रखा है। यूनिवर्सिटी टाउनशिप औद्योगिक कॉरिडोर के पास बनाने और ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ स्थायी समिति बनाने का प्रस्ताव एक व्यावहारिक, परिणाम-फोकस्ड कदम है, खासकर सर्विस सेक्टर के लिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि रिसर्च, डिजिटल लर्निंग और इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करना राष्ट्रीय स्तर पर स्किलिंग को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। TCS को 5% से 2% करने से उच्च शिक्षा और करियर उन्नति में मदद मिलेगी, खासकर उन पेशेवरों के लिए जो अपने पैसे से स्किलिंग कर रहे हैं। हालांकि GST में राहत नहीं मिली, TCS की यह कटौती सीधे छात्रों और पेशेवरों को वित्तीय रूप से राहत देगी।
AI, नई तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
मसाई के, को-फाउंडर और सीईओ प्रतीक शुक्ला ने कहा, “बजट 2026 युवा वर्कफोर्स के लिए अच्छी खबर है। TCS 5% से 2% कम होने से परिवारों को पैसे की बचत होगी और अधिक लोग अच्छी शिक्षा हासिल कर पाएंगे। अब सभी को नई स्किल सीखना जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि सरकार का टेक्नोलॉजी-लिड विकास दृष्टिकोण सबसे खास है। AI, नई तकनीक और इंडस्ट्री-लिंक्ड रिसर्च पर जोर यह दिखाता है कि रोजगार के अवसर तेजी से बदल रहे हैं, जबकि पारंपरिक शिक्षा प्रणाली जल्दी अनुकूल नहीं हो पा रही है। उन्होंने आगे कहा कि ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ स्थायी समिति जैसी पहल यह मान्यता देती है कि डिग्री और वास्तविक रोजगार के बीच का गैप लंबे समय से मौजूद था, खासकर टेक और सर्विस सेक्टर में। संरचित स्किलिंग, ट्रेनिंग सुविधाएं और इनोवेशन हब भारत को डिजिटल सर्विसेज में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
मानव पूंजी और टियर-2/3 शहरों पर फोकस
इमार्टिकस लर्निंग के फाउंडर और सीईओ निखिल बरशिकर ने बजट को एक दार्शनिक बदलाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “बजट 2026-27 रिएक्टिव स्किलिंग से हटकर सक्रिय मानव पूंजी निर्माण की ओर संकेत करता है, खासकर नए ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ (E2E) फ्रेमवर्क के तहत।”
उन्होंने ‘Corporate Mitra’ कैडर, मॉड्यूलर कोर्स और ICAI, ICSI, ICMAI जैसी संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षित पैराप्रोफेशनल्स की भूमिका को रणनीतिक कदम बताया। उन्हें टियर-2 और टियर-3 शहरों में तैनात कर, सरकार MSME क्षेत्र में ‘कंप्लायंस-कैपेबिलिटी गैप’ को कम करने की कोशिश कर रही है।
बड़े चित्र में: परिपक्वता, सब्सिडी नहीं
कुल मिलाकर, एडटेक नेताओं का मानना है कि बजट 2026 का फोकस सही दिशा में है -AI तैयारियों, संरचित स्किलिंग, मॉड्यूलर लर्निंग और इंडस्ट्री इंटीग्रेशन। हालांकि, सीधे वित्तीय लाभ या टैक्स राहत न मिलने से कंपनियों को अब पार्टनरशिप, B2G मॉडल और रिजल्ट-आधारित ऑफरिंग पर ध्यान देना होगा।
अगर पिछले बजट ने शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया, तो बजट 2026 ने अगला सवाल स्पष्ट किया है: अब यह मायने रखता है कि कितने लोग पढ़े हुए हैं, यह नहीं बल्कि कितने लोग रोजगार योग्य, अनुकूलनीय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं।