2022 में स्थापित StarOps का लक्ष्य सैटेलाइट प्लेटफॉर्म विकसित करना और भारत में महत्वपूर्ण स्पेसक्राफ्ट तकनीकों को स्थानीय स्तर पर तैयार करना था। अधिग्रहण के बाद GalaxEye को StarOps की प्रोपराइटरी तकनीक, सैटेलाइट प्लेटफॉर्म और स्पेस सिस्टम इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। StarOps की इंजीनियरिंग टीम के कई सदस्य पहले TeamIndus के साथ Lunar Lander और Rover प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं।
StarOps के साथ जुड़ने से GalaxEye की स्वदेशी स्पेसक्राफ्ट तकनीक और इंजीनियरिंग क्षमता मजबूत होगी। इसमें 50 किलोग्राम, 150 किलोग्राम और 250 किलोग्राम श्रेणी के क्वालिफाइड सैटेलाइट बस प्लेटफॉर्म, प्रोपराइटरी सब-सिस्टम तकनीक, टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिफिकेशन अनुभव और इंजीनियरिंग टूल्स शामिल हैं।
GalaxEye के को-फाउंडर और CEO सुयश सिंह ने कहा कि कंपनी की शुरुआत से ही ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में काम करने की योजना रही है, जो स्पेस इंडस्ट्री के भविष्य को आकार दे सके। उन्होंने कहा कि StarOps का अधिग्रहण कंपनी की सैटेलाइट इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों कंपनियों की तकनीक और विशेषज्ञता के साथ GalaxEye भारत से दुनिया के लिए उन्नत स्पेस सिस्टम को डिजाइन, इंजीनियर और संचालित करने की क्षमता विकसित करना चाहती है।
StarOps के को-फाउंडर और मिशन्स लीड निर्मल सूरज गड्डे ने कहा कि कंपनी का मुख्य फोकस स्वदेशी सैटेलाइट सिस्टम और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं विकसित करने पर रहा है। उन्होंने बताया कि स्पेस सेक्टर में उनका सफर TeamIndus से शुरू हुआ, जहां उन्होंने तकनीक विकसित करने से लेकर वैश्विक स्पेस एजेंसियों के कॉन्ट्रैक्ट के लिए बोली लगाने तक मिशन तैयार करने का अनुभव हासिल किया।
अब यह अनुभव GalaxEye के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य OptoSAR सैटेलाइट्स की एक पूरी कॉन्स्टेलेशन विकसित और तैनात करना है। GalaxEye को उम्मीद है कि StarOps की तकनीक और इंजीनियरिंग टीम के जुड़ने से भारत की स्वदेशी स्पेस टेक्नोलॉजी और कमर्शियल स्पेस सेक्टर को और मजबूती मिलेगी।