हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc Limited) ने उदयपुर स्थित डेबारी जिंक स्मेल्टर यूनिट में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया है। यह पहल राजस्थान में अपने विभिन्न ऑपरेशंस में कुल 41 इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
कंपनी के अनुसार, डीजल बसों से इलेक्ट्रिक बसों की ओर यह बदलाव कर्मचारियों के परिवहन से जुड़े Scope 3 उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। यह फ्लीट एनवीरो व्हील्स मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड (Enviiiro Wheels Mobility Pvt. Ltd) के साथ साझेदारी में शुरू की गई है।
हिंदुस्तान जिंक का अनुमान है कि इस बदलाव से कॉन्ट्रैक्ट अवधि के दौरान 11,000 टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन को कम किया जा सकेगा। डेबारी में शुरू की गई यह पहल कंपनी की लो-एमिशन ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अपनाने की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत अन्य साइट्स पर भी चरणबद्ध तरीके से बसें जोड़ी जाएंगी।
कंपनी के सीईओ अरुण मिश्रा (Arun Misra) ने कहा कि यह कदम कंपनी के डिकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप है और 2050 या उससे पहले नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह पहल कंपनी की विज्ञान-आधारित लक्ष्य पहल (Science Based Targets initiative) के तहत प्रतिबद्धताओं और खनन और धातुओं पर अंतर्राष्ट्रीय परिषद (International Council on Mining and Metals) की सदस्यता से भी जुड़ी है।
कंपनी ने बताया कि वह अपने ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ा रही है, जो वर्तमान में लगभग 18% है। इसके अलावा, कंपनी ने 530 मेगावाट की राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई के लिए समझौता किया है, जिससे भविष्य में उसकी 70% से अधिक बिजली जरूरत पूरी होने की उम्मीद है।
हिंदुस्तान जिंक को S&P Global Corporate Sustainability Assessment 2025 में मेटल और माइनिंग सेक्टर में शीर्ष कंपनी का दर्जा दिया गया है। वेदांता ग्रुप की यह कंपनी जिंक उत्पादन में अग्रणी है और सिल्वर उत्पादन में भी वैश्विक स्तर पर प्रमुख स्थान रखती है, जिसकी सप्लाई 40 से अधिक देशों में होती है।