आईआईटी मद्रास, आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क और यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स ने अपने आईआईटीएम यूनिकॉर्न फ्रंटियर फंड-I का पहला क्लोज 450 करोड़ रुपये पर पूरा किया है। इस फंड का लक्ष्य 1,000 करोड़ रुपये का कॉर्पस तैयार करना है, जिसमें 400 करोड़ रुपये का ग्रीनशू विकल्प भी शामिल है। फंड ने सेबी की मंजूरी मिलने के करीब तीन महीने के भीतर पहला क्लोज हासिल किया।
फंड का अंतिम क्लोज दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य ऐसे डीप-टेक स्टार्टअप्स को लंबी अवधि का पूंजी सहयोग देना है, जिन्हें नई तकनीक विकसित करने, परीक्षण करने और व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाने में अधिक समय और निवेश की जरूरत होती है। फंड करीब 25 कंपनियों का पोर्टफोलियो बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
आईआईटी मद्रास का रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम स्टार्टअप्स को देगा सपोर्ट
फंड ने अब तक चार डीप-टेक स्टार्टअप्स में करीब 55 करोड़ रुपये तैनात किए हैं। इनमें चेन्नई स्थित स्पेस-टेक कंपनी हैथोर, दिल्ली स्थित क्वांटम-टेक कंपनी क्वानस्ट्रा, बैटरी टेक्नोलॉजी कंपनी ट्रियोल्ट एनर्जी और माइक्रोएल्गी आधारित कार्बन कैप्चर एवं एयर-प्यूरिफिकेशन टेक्नोलॉजी विकसित करने वाली कार्बेलिम शामिल हैं। निवेश की राशि अलग-अलग कंपनियों के लिए लगभग 10 करोड़ से 20 करोड़ रुपये के बीच रही है।
हैथोर छोटे और मध्यम सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल्स के लिए सेमी-क्रायोजेनिक और क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन विकसित कर रही है। क्वानस्ट्रा सिंगल-फोटॉन डिटेक्शन सिस्टम और क्वांटम इंस्ट्रूमेंटेशन पर काम कर रही है। वहीं, ट्रियोल्ट एनर्जी ड्रोन और फास्ट-चार्जिंग इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए हाई-परफॉर्मेंस लिथियम-आयन बैटरी सेल विकसित कर रही है।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि ने कहा कि संस्थान ने ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया है, जिसने कई डीप-टेक कंपनियों को शुरुआती रिसर्च से तकनीकी तैयारी के अगले स्तर तक पहुंचने में मदद की है। उनके अनुसार, यूनिकॉर्न इंडिया के साथ यह फंड इन कंपनियों को पेशेंट कैपिटल के साथ स्ट्रैटेजिक ग्रोथ सपोर्ट भी उपलब्ध कराएगा।
फंड के छह फोकस एरिया, तकनीकी शिक्षा से स्टार्टअप तक कनेक्शन
फंड का निवेश छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। इनमें डिफेंस टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर्स, मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर व जनरेटिव एआई तथा हेल्थ टेक्नोलॉजी शामिल हैं। निवेश से पहले कंपनियों की ग्लोबल एक्सपोर्ट क्षमता, रणनीतिक इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन और तकनीकी आत्मनिर्भरता की क्षमता को भी देखा जाएगा।
आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नटराजन मालुपिल्लई (Natarajan Malupillai) ने कहा कि भारत के पास वर्ल्ड-क्लास टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए जरूरी वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग टैलेंट मौजूद है। उनके मुताबिक, फंड आईआईटी मद्रास के इनोवेशन इकोसिस्टम में लॉन्ग-टर्म कैपिटल लाकर रिसर्च आधारित कंपनियों को स्केल करने में मदद करेगा।
छात्रों और रिसर्चर्स के लिए डीप-टेक उद्यमिता के नए अवसर
आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क के इन्क्यूबेशन इकोसिस्टम ने 2024 में 104 डीप-टेक स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेट किया था। ऐसे में नया फंड रिसर्च, प्रोटोटाइपिंग, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और स्टार्टअप कमर्शियलाइजेशन के बीच कड़ी मजबूत करने पर केंद्रित है। इससे छात्रों, रिसर्चर्स और शुरुआती फाउंडर्स के लिए लैब से मार्केट तक तकनीक ले जाने के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर भास्कर मजूमदार के अनुसार, आईआईटी मद्रास के साथ साझेदारी का उद्देश्य शुरुआती फाउंडर्स को ऐसा पूंजी और रणनीतिक सहयोग देना है, जिससे वे भारत से ग्लोबली प्रतिस्पर्धी कंपनियां तैयार कर सकें। फंड का आगे का फोकस आईपी-लेड और इंजीनियरिंग-हैवी डीप-टेक कंपनियों को स्केल करने पर रहेगा।