संस्थान का लक्ष्य साल 2027 तक 10 लाख शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण देना है, ताकि स्कूलों में पढ़ाई को अधिक आधुनिक, आसान और प्रभावी बनाया जा सके। यह कार्यक्रम खास तौर पर शिक्षकों को रोजमर्रा की पढ़ाई और क्लासरूम गतिविधियों में AI के उपयोग के लिए तैयार करेगा।
यह पहल IIT मद्रास में स्थापित Bodhan AI सेंटर द्वारा शुरू की गई है, जो शिक्षा के क्षेत्र में AI तकनीक के उपयोग पर काम करता है। इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को AI आधारित Lesson planning, Worksheet generation, Multilingual content delivery और Evaluation जैसे कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे शिक्षकों का काम आसान होगा और उन्हें पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
AI से बदलेगा शिक्षण का तरीका
IIT मद्रास के अनुसार, यह कार्यक्रम स्कूलों में AI को एक व्यवस्थित तरीके से शामिल करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य केंद्रीय, राज्य और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में AI आधारित शिक्षण मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करना है। AI की मदद से शिक्षक कम समय में बेहतर शिक्षण सामग्री तैयार कर सकेंगे और छात्रों की जरूरतों के अनुसार पढ़ाई को अधिक व्यक्तिगत बना पाएंगे।
संस्थान का कहना है कि AI तकनीक के उपयोग से शिक्षण सामग्री की गुणवत्ता और एकरूपता में सुधार होगा। साथ ही, छात्रों को उनकी सीखने की क्षमता और जरूरत के अनुसार बेहतर अध्ययन अनुभव मिलेगा। इससे शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने में मदद मिल सकती है।
शिक्षकों को मिलेगा AI प्रशिक्षण
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि AI को क्लासरूम में शामिल करना केवल नई तकनीक लाना नहीं है, बल्कि शिक्षकों को भविष्य के भारत का निर्माता बनाना है। उन्होंने कहा कि यह पहल देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
IIT मद्रास के निदेशक वी कामकोटी (V Kamakoti) ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और व्यापक शिक्षा प्रणाली है। ऐसे में तकनीक को भी उसी स्तर पर विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे AI शिक्षा क्षेत्र को बदल रहा है, वैसे-वैसे शिक्षकों के बीच AI साक्षरता बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।
AI बनेगा शिक्षकों का सहायक
Bodhan AI के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर मितेश खापरा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य AI को हर शिक्षक का भरोसेमंद 'Co-pilot' बनाना है। उनका कहना है कि यह पहल केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षकों को रोजमर्रा की पढ़ाई में AI के वास्तविक उपयोग के लिए तैयार करेगी। इससे शिक्षक समय बचा सकेंगे, पढ़ाने की गुणवत्ता बेहतर कर पाएंगे और छात्रों के साथ ज्यादा प्रभावी तरीके से जुड़ सकेंगे।
इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आने वाले महीनों में pre-pilot और pilot प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। इसके बाद 5 सितंबर, यानी शिक्षक दिवस पर पहला सार्वजनिक बैच लॉन्च किया जाएगा। IIT मद्रास का लक्ष्य है कि 2027 तक देशभर के 10 लाख शिक्षक इस AI प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ जाएं।
मुख्य रूप से यह पहल भारत में AI-enabled classroom ecosystem बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। इससे केवल अलग-अलग स्कूलों में AI का सीमित उपयोग नहीं होगा, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में AI आधारित बदलाव देखने को मिल सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में AI आधारित शिक्षा का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले वर्षों में AI तकनीक स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। वर्तमान में देशभर के कई स्कूल डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लासरूम और AI आधारित टूल्स को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में IIT मद्रास की यह पहल शिक्षकों को नई तकनीक के अनुरूप तैयार करने में मदद करेगी। इससे न केवल शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों को भी अधिक इंटरैक्टिव, व्यक्तिगत और आधुनिक शिक्षा अनुभव मिल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित ट्रेनिंग से भविष्य में भारत की शिक्षा व्यवस्था अधिक तकनीक-सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकती है।