आज केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में 'समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन-2026' का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य समावेशी शिक्षा के लिए नीति और व्यवहार को मजबूत करना, सहायक प्रौद्योगिकियों और डिजिटल उपकरणों को अपनाने को बढ़ावा देना, शिक्षकों की क्षमता और संस्थागत तत्परता का निर्माण करना, अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा से रोजगार तक के मार्ग की भविष्य की दिशाओं की पहचान करना है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) द्वारा 21 से 23 जनवरी, 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए नवीनतम तकनीक से लैस सहायक उपकरण प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर DoSEL के सचिव श्री संजय कुमार; NCERT के निदेशक श्री दिनेश प्रसाद सकलानी; स्पेशल ओलंपिक्स भारत की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा और शिक्षा मंत्रालय, NCERT, राष्ट्रीय संस्थानों और अन्य हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस सम्मेलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि "समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन का आयोजन समावेशी शिक्षा के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समावेशी शिक्षा किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक बच्चे के लिए गरिमा, समान अवसर और आत्मनिर्भर भविष्य सुनिश्चित करने के सामूहिक संकल्प का प्रतिनिधित्व करती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के दृष्टिकोण को दोहराते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि एक विकसित भारत की नींव समान, संवेदनशील और समावेशी शिक्षा के माध्यम से रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि विकलांगता श्रेणियों का छह से बढ़ाकर इक्कीस करना इसी समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है।"
उन्होंने डिस्लेक्सिया और डिसकैलकुलिया जैसी सीखने संबंधी चुनौतियों की शीघ्र पहचान के महत्व पर जोर दिया और कहा कि समावेशी शिक्षा केवल स्कूलों या परिवारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि समान अवसर, गरिमा और भागीदारी पर आधारित यह सामूहिक दृष्टिकोण एक विकसित भारत की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करेगा।
साथ ही केंद्रीय मंत्री ने समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन में सहायक उत्पादों, समाधानों और स्मार्ट प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी का भ्रमण किया। उन्होंने शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) और दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय स्टार्टअप द्वारा विकसित किए गए नवोन्मेषी और विश्व स्तरीय समाधानों की सराहना की ।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दिव्यांग आबादी के लिए गरिमा, सुगमता और समान अवसर सुनिश्चित करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सहायक कानूनों, सुलभ बुनियादी ढांचे, समावेशी नीतियों और निरंतर नवाचार के माध्यम से निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया ।
इस सम्मेलन में संजय कुमार ने कहा कि "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में एक समावेशी शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना की गई है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी बच्चा स्कूल से वंचित न रहे, और इसका स्पष्ट लक्ष्य 2030 तक माध्यमिक स्तर पर 100 प्रतिशत सकल नामांकन हासिल करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समावेशन केवल पहुंच से कहीं अधिक है और शिक्षा प्रणाली में प्रवेश करने वाले प्रत्येक बच्चे को सार्थक सीखने के परिणाम प्राप्त होने चाहिए, सुरक्षित महसूस करना चाहिए, सामाजिक रूप से विकसित होना चाहिए और किसी भी विशिष्ट सीखने की अक्षमता के लिए प्रारंभिक पहचान और समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से सहायता प्राप्त करनी चाहिए, विशेष रूप से प्रारंभिक वर्षों के दौरान।" उन्होंने आगे कहा कि "सभी बच्चों और शिक्षकों में सभी के प्रति सहानुभूति का भाव विकसित किया जाना चाहिए ताकि हम सभी की विभिन्न आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हो सकें।"
समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन - 2026 का उद्देश्य
इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी) 2016 के अनुरूप विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए समावेशी शिक्षा हेतु नीतियों, प्रथाओं और नवाचारों को सुदृढ़ करना है। चिंतन और सीखने के लिए एक सामूहिक मंच के रूप में परिकल्पित यह शिखर सम्मेलन नीति निर्माताओं, राष्ट्रीय संस्थानों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, शिक्षा बोर्डों, विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों, स्टार्टअप्स और उद्योग भागीदारों को एक साथ लाता है ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जा सके, नवाचारों का प्रदर्शन किया जा सके और भारत में समावेशी शिक्षा के लिए भविष्य के मार्ग प्रशस्त किए जा सकें।
स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) की आर्थिक सलाहकार श्रीमती ए. श्रीजा ने शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह शिखर सम्मेलन सभी हितधारकों को एक साथ लाता है ताकि एक ऐसी शिक्षा प्रणाली के निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को मजबूत किया जा सके जो प्रत्येक बच्चे के लिए कारगर हो और प्रारंभिक पहचान एवं अधिगम से लेकर सहभागिता, कौशल एवं आजीविका तक समावेशी शिक्षा के सभी पहलुओं को संबोधित करे। इसमें समावेशी मूल्यांकन और परीक्षा संबंधी सुविधाओं पर स्कूल बोर्डों के साथ चर्चा के साथ-साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस शिक्षा शिखर सम्मेलन के मुख्य फोकस क्षेत्र
तीन दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, जैसे कि समावेशी शिक्षा के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी और सहायक उपकरणों का उपयोग किया जाएगा और विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग व्यक्तियों (CwSN) के लिए पहुंच, भागीदारी और सीखने के परिणामों में सुधार लाने में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और सहायक उपकरणों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। साथ ही स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और राष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रत्यक्ष प्रदर्शन और प्रदर्शनियों के माध्यम से दृष्टि, श्रवण, चलने-फिरने, बौद्धिक और बहु-विकलांगताओं से निपटने वाले अभिनव समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके अलावा- प्रमुख राष्ट्रीय पहलों और क्षमता-निर्माण उपायों पर प्रकाश डाला जाएगा, जिनमें शामिल हैं: PRASHAST 2.0, उन्नत विकलांगता स्क्रीनिंग और ट्रैकिंग टूल है जो UDISE+ के साथ एकीकृत है। समावेशी कक्षाओं के लिए शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का शिक्षक प्रशिक्षण और संवेदीकरण, प्रस्तावित राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के माध्यम से संसाधन कक्षों और संसाधन केंद्रों को सुदृढ़ बनाना और दिव्यांगजनों के लिए समावेशी खेल और व्यावसायिक शिक्षा के मार्ग को बढ़ावा देना।
अत: सम्मेलन के अतिंम दिन विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं वाले विद्यार्थियों के लिए भविष्य के अवसर प्रदान किए जाएंगे और पाठ्यक्रम अनुकूलन, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और बोर्ड स्तर पर प्रावधानों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही शिक्षा बोर्डों और निजी क्षेत्र के हितधारकों की भागीदारी के साथ उपचारात्मक शिक्षा, कौशल विकास और शिक्षा से रोजगार के मार्गों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।