समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CwSN) के लिए समावेशी शिक्षा को मजबूत करने पर चर्चा जारी रखी। यह शिखर सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति(NEP) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD), 2016 के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में समान, सुलभ और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने नई दिल्ली के द ललित होटल में 21-23 जनवरी 2026 तक आयोजित समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CwSN) के लिए समावेशी शिक्षा को मजबूत करने पर चर्चा जारी रखी। यह शिखर सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति(NEP) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD), 2016 के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में समान, सुलभ और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन का फोकस “समावेशी शिक्षा के मार्ग” (Inclusive Education Pathways) पर रहा, जिसमें राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पहलों, डिजिटल उपकरणों, शिक्षक क्षमता निर्माण ढांचों तथा अंतर-क्षेत्रीय सहयोग पर प्रकाश डाला गया ताकि समावेशी शिक्षा के इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके। कार्यवाही में श्री संजय कुमार, सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL); सुश्री ए. श्रीजा, आर्थिक सलाहकार, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL); तथा शिक्षा मंत्रालय, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय संस्थानों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और साझेदार संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन में टेक्नोलॉजी और डिजिटल नवाचारों को दिया बढ़ावा
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) में उप सचिव सुश्री इरा सिंघल ने संदर्भात्मक प्रस्तुति से की, जिसमें उन्होंने दिव्यांगता जांच के लिए संशोधित उपकरण PRASHAST 2.0 के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि PRASHAST 2.0 बच्चों की प्रारंभिक पहचान, व्यवस्थित स्क्रीनिंग और समय पर सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे विद्यालय स्तर पर साक्ष्य-आधारित योजना और लक्षित हस्तक्षेप संभव हो सकेंगे।
एनसीईआरटी में शिक्षक शिक्षा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर(डॉ.) शरद सिन्हा ने शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में समावेशी शिक्षण पद्धति को मुख्यधारा में लाने हेतु 8-मॉड्यूल का एक संरचित ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें सभी शिक्षार्थियों के लिए प्रवेश से लेकर उपलब्धि तक के बदलाव पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान(एनआईओएस) के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा ने सुलभ ई-कंटेंट, लचीले प्रवेश एवं परीक्षा प्रणालियों तथा ओपन स्कूलिंग के लिए समावेशी शिक्षा नीति (2022) के माध्यम से स्कूली शिक्षा के सार्वभौमीकरण की दिशा में एनआईओएस की पहलों पर प्रकाश डाला।
सुश्री अमिता टंडन, शिक्षा विशेषज्ञ, यूनिसेफ ने दिव्यांगता-समावेशी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समावेशी संप्रेषण दृष्टिकोण, स्टिगमा को कम करने और वास्तविक समावेशन को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एनसीईआरटी के केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान की प्रो. भारती कौशिक ने समावेशी अधिगम समुदाय के निर्माण में PM e-Vidya ISL चैनल 31 की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा “किताब एक, पढ़े अनेक” पहल को प्रस्तुत किया, जिसे सार्वभौमिक अधिगम अभिकल्प (UDL) के आधार पर विकसित किया गया है, जिससे एक ही पाठ्यपुस्तक से अनेक सुलभ शिक्षण मार्ग संभव होते हैं।
अत: समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन की चर्चाओं ने नीतियों और अभ्यास को सुदृढ़ करने, सहायक प्रौद्योगिकियों और डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा देने, संस्थागत तैयारी बनाने तथा विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए शिक्षा, खेल और रोजगार को जोड़ने वाले भविष्य के मार्गों की पहचान करने के उद्देश्यों को और मजबूत किया।