भारत–यूरोप मुक्त व्यापार समझौता ऑटो सेक्टर को देगा नई रफ्तार

भारत–यूरोप मुक्त व्यापार समझौता ऑटो सेक्टर को देगा नई रफ्तार

भारत–यूरोप मुक्त व्यापार समझौता ऑटो सेक्टर को देगा नई रफ्तार
भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है, जिससे भारत को यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है। यह समझौता भारत के लिए आर्थिक विकास की अगली लहर का आधार बनेगा और विशेष रूप से ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ा लाभ पहुंचाएगा। इस करार से भारतीय बाजार को यूरोप तक ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी और यूरोपीय ऑटो कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

27 जनवरी को संपन्न हुआ यह समझौता वित्त वर्ष 2027-28 से लागू होने की उम्मीद है। इसके तहत भारत ने पहली बार यात्री कारों पर लगने वाले आयात शुल्क में बड़ी कटौती पर सहमति जताई है। मौजूदा 110% टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% तक लाया जाएगा। शुरुआती चरण में अधिकांश कारों पर शुल्क 30-35% रहेगा, जिसे 5 से 10 वर्षों में घटाकर 10% किया जाएगा। यह रियायत हर साल यूरोप से आयात होने वाली 2.5 लाख कारों तक सीमित होगी।

इसके बदले भारत को यूरोपीय बाजार में 6.25 लाख वाहनों के निर्यात का अवसर मिलेगा, जो आकार में भारत से कहीं बड़ा है। इसके साथ ही ऑटो कंपोनेंट्स पर भी रियायतें दी गई हैं, जिससे भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत होगी।

डेलॉइट इंडिया के पार्टनर सौरभ कंचन ने कहा कि भारत का वार्षिक कार बाजार 4.3 मिलियन यूनिट से अधिक है, ऐसे में 2.5 लाख कारों का कोटा उद्योग के लिए संभालने योग्य है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ऑटो निर्यातकों के लिए यह देखना अहम होगा कि यूरोपीय संघ की ओर से मिलने वाली रियायतें चीन और आसियान देशों के मुकाबले कितनी प्रतिस्पर्धी हैं। साथ ही, वैल्यू एडिशन और ओरिजिन नियम निवेश और लोकलाइजेशन को बढ़ावा दे सकते हैं।

इस समझौते के तहत भारत में 25 लाख रुपये से ऊपर की कीमत वाली यूरोपीय नॉन-इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ में कटौती की जाएगी, जिससे लक्ज़री कार निर्माताओं को फायदा मिलने की उम्मीद है। महिंद्रा ग्रुप के CEO डॉ. अनिश शाह ने कहा कि यह समझौता भारत में ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ को मजबूती देगा और उद्योग की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित नहीं करेगा।

हालांकि, इस करार का सीधा लाभ सीमित लक्ज़री सेगमेंट को ही मिलेगा, क्योंकि मर्सिडीज-बेंज, BMW, वोल्वो, जगुआर लैंड रोवर और ऑडी जैसी कंपनियां पहले से ही भारत में असेंबली कर रही हैं। पोर्श, लेम्बोर्गिनी और फेरारी जैसी हाई-एंड स्पोर्ट्स कारों पर टैक्स में कमी से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन मुद्रा अवमूल्यन और महंगाई अंतिम कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

बीएमडब्ल्यू (BMW)  ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष एवं सीईओ  हरदीप सिंह बराड़ ने कहा कि फिलहाल कीमतों में तत्काल बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन FTA से भविष्य में लोकलाइजेशन और नए प्रोडक्ट्स के अवसर खुल सकते हैं।

टीवीएस (TVS) मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने कहा कि इस तरह के बड़े व्यापार समझौते केवल टैरिफ कम नहीं करते, बल्कि सप्लाई चेन को मजबूत करते हैं और भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका देते हैं।

वर्तमान में भारत–EU के बीच द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब डॉलर से अधिक का है। यह समझौता समय के साथ 90–95% वस्तुओं पर टैरिफ उदारीकरण का रास्ता खोलता है और भारत को ‘चीन + 1’ रणनीति में एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करता है।

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