सरकार ने EV फाइनेंसिंग बाधाओं को दूर करने पर दिया जोर

सरकार ने EV फाइनेंसिंग बाधाओं को दूर करने पर दिया जोर

सरकार ने EV फाइनेंसिंग बाधाओं को दूर करने पर दिया जोर
भारी उद्योग मंत्रालय की बैठक में इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों के लिए फाइनेंसिंग चुनौतियों और समाधान पर चर्चा की गई। क्रेडिट गारंटी और ब्याज सब्सिडी जैसे उपायों के जरिए ईवी अपनाने को आसान बनाने पर जोर दिया गया।

भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने 20 मई को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की, जिसमें निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने के लिए फाइनेंसिंग मैकेनिज्म पर चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने की।

इस बैठक में एसबीआई (SBI), पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, HDFC और सिडबी जैसे सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बस और ट्रक ऑपरेटर, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और निजी ट्रैवल कंपनियों ने भाग लिया।  

चर्चा के दौरान इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के वित्तपोषण से जुड़ी चुनौतियों और संभावित सहयोग उपायों पर विचार किया गया, जिनमें क्रेडिट गारंटी योजना और ब्याज सब्सिडी मैकेनिज्म शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि इन उपायों का उद्देश्य वित्तीय संस्थानों के जोखिम को कम करना और निजी ऑपरेटरों के लिए ऋण लागत घटाना है।

मंत्रालय ने कहा कि बसें सार्वजनिक परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जबकि ट्रक देश के माल परिवहन का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। साथ ही, यह क्षेत्र उत्सर्जन और प्रदूषण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए इसका इलेक्ट्रिफिकेशन भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों के लिए आवश्यक है।
एमएचआई ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल सरकार, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत को एक साथ लाकर ऐसे वित्तीय समाधान विकसित करने के लिए है, जो कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के अपनाने में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकें।

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