केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय स्टेकहोल्डर परामर्श बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देशभर में इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों को तेजी से अपनाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई। इस बैठक का उद्देश्य सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोगात्मक ढांचा तैयार करना था, ताकि शून्य-उत्सर्जन वाले भारी कमर्शियल वाहनों की बड़े पैमाने पर तैनाती को बढ़ावा दिया जा सके।
बैठक में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें फ्लीट ऑपरेटर, ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर, लीजिंग कंपनियां और वित्तीय संस्थान शामिल थे। इस दौरान भारी उद्योग सचिव कमरान रिजवी और अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भी भाग लिया और सेक्टर के भविष्य के नीति रोडमैप पर उद्योग प्रतिनिधियों से सीधे सुझाव प्राप्त किए।
परामर्श सत्र के दौरान इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन क्षेत्र की परिचालन चुनौतियों और जमीनी वास्तविकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई। उद्योग प्रतिनिधियों ने वाहन वित्तपोषण के लिए पूंजी तक पहुंच, मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता और लंबी दूरी एवं राष्ट्रीय माल परिवहन मार्गों पर इलेक्ट्रिक फ्लीट्स की परिचालन व्यवहार्यता जैसे मुद्दे उठाए।
हितधारकों को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसें भविष्य में देश की सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था की रीढ़ बनने जा रही हैं, जबकि इलेक्ट्रिक ट्रक लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की नीतियां जमीनी स्तर पर काम कर रहे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के व्यावहारिक अनुभवों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव उद्योग के लिए समावेशी और व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बन सके।