भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने तीन प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में अपने परिसर स्थापित करने की मंजूरी प्रदान की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में ब्रिटेन के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, यॉर्क विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) को भारत में कैंपस स्थापित करने के लिए अनुमोदन पत्र सौंपे गए।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतरराष्ट्रीयकरण के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसका उद्देश्य भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा देश के भीतर ही उपलब्ध कराना और भारत को वैश्विक उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाना है।

अनुमोदन पत्र उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी द्वारा प्रदान किए गए। इस अवसर पर ब्रिस्टल विश्वविद्यालय की कार्यकारी डीन एवं निदेशक मिशेल जोन्स, यॉर्क विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर प्रोफेसर चार्ली जेफ्री तथा यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स की डिप्टी वाइस-चांसलर प्रोफेसर सारा मैडिसन ने पत्र प्राप्त किए।
समारोह में ब्रिटिश उच्चायोग, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग, ब्रिटिश काउंसिल, शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी और संबंधित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों का भारत में आगमन केवल नए कैंपस खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने कहा कि यह कदम उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी और अनुसंधान सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा।
मुंबई और बेंगलुरु में खुलेंगे परिसर
सरकार द्वारा दी गई मंजूरी के तहत ब्रिस्टल विश्वविद्यालय और यॉर्क विश्वविद्यालय मुंबई में अपने परिसर स्थापित करेंगे, जबकि यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स बेंगलुरु में अपना कैंपस शुरू करेगा। दोनों शहर देश के प्रमुख ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र माने जाते हैं। बेंगलुरु को वैश्विक स्तर पर “सिलिकॉन वैली ऑफ द ईस्ट” के रूप में भी पहचान प्राप्त है।
इन परिसरों के माध्यम से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम, वैश्विक फैकल्टी और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का लाभ मिलेगा। इससे विदेशी शिक्षा के लिए विदेश जाने की आवश्यकता कम होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक छात्रों तक पहुंच सकेगी।
किन विषयों में होंगे पाठ्यक्रम
ब्रिस्टल विश्वविद्यालय का मुंबई कैंपस इमर्सिव आर्ट्स, डेटा साइंस, फाइनेंस, अर्थशास्त्र, बिजनेस मैनेजमेंट, उद्यमिता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कार्यक्रम संचालित करेगा।
यॉर्क विश्वविद्यालय का मुंबई परिसर कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, बिजनेस, अर्थशास्त्र, मैनेजमेंट और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज जैसे विषयों में शिक्षा प्रदान करेगा।
वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स का बेंगलुरु परिसर अगस्त 2026 से Manyata Business Park में शुरू होगा। यहां बिजनेस, कंप्यूटर साइंस और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों में अध्ययन के अवसर उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय भारत के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, परिवहन, डिजिटल प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान सहयोग को भी बढ़ावा देगा।
छात्रों और शोध को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी विश्वविद्यालयों की उपस्थिति से भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय डिग्री और अंतरराष्ट्रीय अनुभव देश में ही प्राप्त हो सकेगा। साथ ही संयुक्त शोध परियोजनाओं, नवाचार गतिविधियों और उद्योग-अकादमिक सहयोग को भी नई गति मिलेगी।
यह पहल भारत-यूके और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा संबंधों को और मजबूत करेगी तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय उच्च शिक्षा की प्रतिष्ठा बढ़ाने में मददगार साबित होगी।

NEP 2020 के लक्ष्य को मिलेगा बल
यह पहल एनईपी 2020 के व्यापक अंतरराष्ट्रीयकरण एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करना और भारत को एक पसंदीदा शिक्षा गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
यूजीसी द्वारा तैयार किए गए नियम विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए एक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध ढांचा प्रदान करते हैं। साथ ही यह व्यवस्था संस्थागत स्वायत्तता, गुणवत्ता और वैश्विक शैक्षणिक मानकों को बनाए रखने पर भी जोर देती है।
शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि इन विश्वविद्यालयों के आगमन से अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी, शैक्षणिक गतिशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा, अनुसंधान एवं नवाचार को मजबूती मिलेगी और भारत एक प्रतिस्पर्धी, समावेशी तथा भविष्य-केंद्रित उच्च शिक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
विदेशी विश्वविद्यालयों को मिली यह मंजूरी भारत की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते वैश्विक विश्वास का भी प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह पहल भारत को विश्व के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।