भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। BMW Group India और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशनों की संख्या 52,700 के पार पहुंच गई है, जिससे वाहन-चार्जर अनुपात (Vehicle-to-Charger Ratio) एक वर्ष पहले के 1:250 से सुधरकर 1:175 हो गया है।
एक उद्योग कार्यक्रम के दौरान BMW Group India के प्रेसिडेंट एंड सीईओ हरदीप सिंह बराड़ ने कहा कि एक वर्ष पहले भारत में लगभग 75 लाख इलेक्ट्रिक वाहन और करीब 30,000 सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट थे। वर्तमान में देश में 90 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन और 52,700 से अधिक सार्वजनिक चार्जर उपलब्ध हैं, जो चार्जिंग नेटवर्क में हुई तेज़ प्रगति को दर्शाता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन चीन और नॉर्वे जैसे विकसित EV बाजारों में अब भी चार्जिंग घनत्व अधिक है, जहां औसतन हर 20 इलेक्ट्रिक वाहनों पर एक चार्जर उपलब्ध है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि देशभर में 52,718 सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशन संचालित हो रहे हैं, जिनमें 16,561 फास्ट चार्जर शामिल हैं।
लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि FAME-II और PM E-DRIVE योजनाओं के तहत क्रमशः 912.5 करोड़ रुपये और 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से शहरों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।
सरकार ने Electric Vehicle Charging Infrastructure 2024 के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य मानकीकृत और इंटरऑपरेबल चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना तथा बैटरी स्वैपिंग को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त किए जाने से निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ी है।
हरदीप सिंह बराड़ ने इस प्रगति का श्रेय सरकार, वाहन निर्माताओं (OEMs), चार्ज पॉइंट ऑपरेटरों और ईंधन कंपनियों के संयुक्त प्रयासों को देते हुए कहा कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा यह विस्तार भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति प्रदान करेगा।