भारत में पले-बढ़े फाउंडर्स की विदेशी मौजूदा और पूर्व यूनिकॉर्न कंपनियों में फाउंडर-शेयर के आधार पर करीब 560 अरब डॉलर की कंपनी वैल्यू है। यह जानकारी Prosus और Dealroom की नई Indian Diaspora Index रिपोर्ट में सामने आई है।
इस Index में ऐसी 205 विदेशी यूनिकॉर्न कंपनियों को शामिल किया गया है, जिनमें कम से कम एक फाउंडर भारत में पला-बढ़ा है। इनमें से 70 यूनिकॉर्न कंपनियां पूरी तरह भारतीय मूल के फाउंडिंग टीम ने बनाई हैं, जिनकी कुल वैल्यू करीब 243 अरब डॉलर है। इनमें Zscaler के जय चौधरी, Rubrik के अरविंद जैन, अरविंद निथ्रकाश्यप, बिपुल सिन्हा और सोहम मजूमदार, Nutanix के अजीत सिंह, धीरज पांडे और मोहित आरोन तथा Skild के दीपक पाठक और अभिनव गुप्ता शामिल हैं।
इसके अलावा 135 यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय मूल के फाउंडर्स दूसरी पृष्ठभूमि वाले फाउंडर्स के साथ शामिल हैं। इनमें Palo Alto Networks, Bloom Energy, Astera Labs और Perplexity जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों में भारतीय मूल के फाउंडर्स के फाउंडर-शेयर के आधार पर करीब 317 अरब डॉलर की वैल्यू जुड़ती है। दोनों समूहों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब 560 अरब डॉलर पहुंचता है।
भारत की यूनिकॉर्न कंपनियों की फाउंडर-शेयर वैल्यू 349 अरब डॉलर
इसके मुकाबले भारत में स्थित 102 यूनिकॉर्न कंपनियों की फाउंडर-शेयर के आधार पर करीब 349 अरब डॉलर की वैल्यू है। इनमें Flipkart करीब 36 अरब डॉलर, Zomato करीब 30 अरब डॉलर और Groww करीब 16 अरब डॉलर की वैल्यू के साथ प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं।
रिपोर्ट में एक अलग और व्यापक विश्लेषण भी किया गया है, जिसमें उन फाउंडर्स को शामिल किया गया है जो बचपन में भारत से बाहर चले गए थे। इसमें भारत में स्थित कंपनियों को भी शामिल किया गया है। इस विश्लेषण में शामिल 323 कंपनियों में से 62% कंपनियां अमेरिका में स्थित हैं।
इन 323 कंपनियों में 200 कंपनियां अमेरिका में शुरू हुईं या बाद में वहां स्थानांतरित हुईं। इनमें 178 कंपनियां अमेरिका में शुरू हुईं, जबकि 22 कंपनियां बाद में अमेरिका चली गईं। इससे भारतीय मूल के फाउंडर्स के लिए अमेरिका की भूमिका प्रमुख वैश्विक बिजनेस इकोसिस्टम के रूप में सामने आती है।
205 विदेशी यूनिकॉर्न में से 187 अमेरिका में
हालांकि, व्यापक विश्लेषण और मुख्य Indian Diaspora Index को अलग-अलग समझना जरूरी है। मुख्य Index में केवल वे फाउंडर्स शामिल हैं जो भारत में पले-बढ़े हैं और ऐसी कंपनियां शामिल हैं जो भारत के बाहर स्थित हैं। इस मुख्य Index में शामिल 205 विदेशी यूनिकॉर्न कंपनियों में से 187 यानी करीब 91% कंपनियां अमेरिका में स्थित हैं। इससे विदेशी यूनिकॉर्न कंपनियां बनाने वाले भारत में पले-बढ़े फाउंडर्स के लिए अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आती है।
Prosus India के प्रिंसिपल इन्वेस्टर सौरव जैन ने कहा, “भारत की उद्यमशील प्रतिभा का प्रभाव देश की सीमाओं से काफी आगे तक फैला हुआ है। यह Index इस बात को समझने का महत्वपूर्ण नजरिया देता है कि भारतीय मूल के फाउंडर्स वैश्विक बाजारों में वैल्यू निर्माण में किस तरह योगदान दे रहे हैं। इस गतिविधि के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण इकोसिस्टम के रूप में उभर रहा है।”
रिपोर्ट में दी गई 560 अरब डॉलर की वैल्यू को फाउंडर्स की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं माना जाना चाहिए। यह फाउंडर-शेयर के आधार पर कंपनी की वैल्यू का आंकड़ा है। इस गणना में कंपनी की वैल्यू को उसके फाउंडर्स के बीच बराबर हिस्सों में बांटकर भारत में पले-बढ़े योग्य फाउंडर्स से जुड़े हिस्से को शामिल किया गया है।