खनन मंत्रालय ने मुंबई स्थित LICO Materials Private Limited को नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के तहत “क्रिटिकल मिनरल रिसाइक्लिंग प्रमोशन इंसेंटिव स्कीम” के लिए पात्र घोषित किया है। इस मंजूरी के साथ कंपनी कर्नाटक स्थित अपनी सुविधा में एंड-ऑफ-लाइफ लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, निकेल और कोबाल्ट की रिकवरी कर सकेगी। कंपनी ने इस परियोजना में 240 करोड़ निवेश और प्रतिवर्ष 10,000 टन प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
लिको मैटिरियल (LICO Materials) का चयन सरकार की नामित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर (JNARDDC) द्वारा सैकड़ों आवेदकों में से किया गया। इस योजना के तहत कंपनी को 20 प्रतिशत कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) सब्सिडी और FY 2030-31 तक बढ़ती व्यावसायिक बिक्री से जुड़ी मल्टी-ईयर ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर (OpEx) सब्सिडी मिलेगी
एनसीएमएम (NCMM) योजना के तहत केवल वही कंपनियां पात्र मानी जाती हैं जो क्रिटिकल मिनरल्स का केमिकल एक्सट्रैक्शन करती हैं। केवल बैटरियों को कलेक्ट, डिस्मेंटल या श्रेड करने वाली कंपनियां इस योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं। LICO का चयन बैटरी केमिस्ट्री और हाइड्रोमेटालर्जी में उसकी तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है।
लिको मैटिरियल (LICO Materials) के सीईओ गौरव डोलवानी ने कहा कि यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि कंपनी भारत में वही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है जिसकी देश को आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कंपनी सिर्फ बैटरियों को रिसाइकिल नहीं कर रही, बल्कि भारतीय वेस्ट बैटरियों से बैटरी-ग्रेड लिथियम, निकेल और कोबाल्ट तैयार कर रही है, जो देश के सेल और बैटरी निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कर्नाटक परियोजना को ब्राउनफील्ड विस्तार के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो कंपनी की मौजूदा 25,000 टन प्रतिवर्ष की मैकेनिकल प्रोसेसिंग क्षमता पर आधारित है। इस हाइड्रोमेटालर्जिकल विस्तार के तहत KIADB, कर्नाटक में दो संयंत्र स्थापित किए जाएंगे — एक बैटरी पैक्स की मैकेनिकल श्रेडिंग और क्लासिफिकेशन के लिए तथा दूसरा क्रिटिकल मिनरल एक्सट्रैक्शन के लिए।
कंपनी का लक्ष्य LFP, LCO और NMC सेल केमिस्ट्री से रिकवर किए गए लिथियम, निकेल और कोबाल्ट को 99 प्रतिशत बैटरी-ग्रेड शुद्धता के साथ तैयार करना है। 1,500 करोड़ के राष्ट्रीय बजट से समर्थित NCMM का उद्देश्य 2030 तक भारत की रिसाइक्लिंग क्षमता को लगभग 1 लाख टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 4 लाख टन प्रतिवर्ष करना है। वर्तमान में भारत बैटरी क्रिटिकल मिनरल्स के लिए मुख्य रूप से पूर्वी एशिया पर निर्भर है, जहां वैश्विक स्तर पर लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा केंद्रित है।
लिको मैटिरियल (LICO Materials) की स्थापना वर्ष 2021 में हुई थी। कंपनी का बेंगलुरु स्थित एंड-ऑफ-लाइफ लिथियम-आयन बैटरी रिसाइक्लिंग और रिफर्बिशिंग प्लांट प्रतिवर्ष 4 GWh इनपुट क्षमता रखता है।