भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए 15.2 मिलियन यूरो (करीब 169 करोड़) की संयुक्त पहल शुरू की है। यह पहल भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) के तहत ग्रीन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजीज वर्किंग ग्रुप-2 के अंतर्गत शुरू की गई है। यह दोनों पक्षों के बीच तीसरी समन्वित कॉल फॉर प्रपोजल है, जिसके लिए आवेदन 15 सितंबर 2026 तक आमंत्रित किए गए हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य महत्वपूर्ण कच्चे माल (Critical Raw Materials) तक पहुंच मजबूत करना, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना और भारत-ईयू सहयोग को गहरा करना है। इस पहल के लिए फंडिंग Horizon Europe के माध्यम से दी जाएगी, जबकि भारतीय हिस्से को भारी उद्योग मंत्रालय का सपोर्ट प्राप्त होगा।
यह कार्यक्रम उन्नत बैटरी रिसाइक्लिंग तकनीकों के विकास पर केंद्रित होगा, जिसमें हाई-एफिशिएंसी मटेरियल रिकवरी, डिजिटलाइज्ड कलेक्शन सिस्टम और पायलट-स्केल डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं। साथ ही भारत में एक संयुक्त इंडिया-ईयू पायलट लाइन स्थापित की जाएगी, जिससे औद्योगिक स्तर पर तकनीकों का परीक्षण और वैलिडेशन किया जा सके।
मुख्य ध्यान क्षेत्रों में उच्च रिकवरी रेट, मिश्रित बैटरी केमिस्ट्री को संभालना, लॉजिस्टिक्स इंटीग्रेशन और लिथियम, ग्रेफाइट तथा कोबाल्ट जैसे मटेरियल के सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन के लिए सुरक्षा मानक शामिल हैं।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने कहा कि यह पहल भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत के तेजी से बढ़ते EV बाजार के साथ घरेलू बैटरी रिसाइक्लिंग इकोसिस्टम का निर्माण संसाधनों की सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बेहद जरूरी है।
भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि बैटरियां ग्रीन ट्रांजिशन का केंद्रीय हिस्सा हैं और यह कार्यक्रम नवाचारों को रिसर्च से लेकर व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचाने के साथ-साथ खनिज सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव परविंदर मैनी ने कहा कि यह पहल डिजिटल और समावेशी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम के विकास को बढ़ावा देगी, जिसमें अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) को भी शामिल किया जाएगा।
यूरोपीय आयोग के रिसर्च एंड इनोवेशन महानिदेशक मार्क लेमैत्रे ने कहा कि यह सहयोग महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक क्रॉस-कॉन्टिनेंटल वैल्यू चेन विकसित करने में सहायक होगा। यह पहल भारत और यूरोपीय संघ के बीच ग्रीन टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन रेजिलिएंस और इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम में बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।