भारतीय डायमंड ज्वेलरी मार्केट अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 2025 की De Beers India Diamond Acquisition Study (DAS) के अनुसार, भारत चीन और जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। इस तेजी के पीछे उपभोक्ताओं की बदलती सोच है, जहां नई पीढ़ी डायमंड को सिर्फ निवेश नहीं बल्कि अपनी रोजमर्रा की पहचान का हिस्सा मान रही है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z भारत के डायमंड बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। 18 से 28 साल के युवा अब बाजार की कुल वैल्यू का 51% हिस्सा रखते हैं, जो 2022 के मुकाबले 19% ज्यादा है। इस वर्ग के लोग एक पीस पर औसतन 1.98 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं, जो उनके प्रीमियम और असली लग्जरी के प्रति झुकाव को दिखाता है। वहीं, Millennials के साथ मिलकर ये दोनों पीढ़ियां कुल बाजार का 86% हिस्सा बनाती हैं, जो भविष्य में भी इस सेक्टर की ग्रोथ को आगे बढ़ाएगा।
भारत में डायमंड पहनने के तरीके में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले 2014 में 56% डायमंड ज्वेलरी सिर्फ खास मौकों पर पहनी जाती थी, जबकि सिर्फ 27% रोजाना उपयोग में आती थी। लेकिन अब 52% डायमंड ज्वेलरी रोज पहनी जा रही है। इसका एक बड़ा कारण महिलाओं का खुद के लिए खरीदारी करना है। शादी के अलावा 64% महिलाएं डायमंड ज्वेलरी खुद खरीद रही हैं, चाहे वह कोई खास उपलब्धि हो या खुद को गिफ्ट देने का तरीका। शादी के सेगमेंट में भी 79% खरीदारी दुल्हनों द्वारा खुद की जा रही है।
De Beers Group की ग्लोबल SVP श्वेता हरित ने कहा कि भारत का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डायमंड बाजार बनना इस बात का संकेत है कि यहां के लोगों का डायमंड से गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी असली और खास चीजों को महत्व देती है और यही भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत बाजार बनाता है।
भारत में डायमंड आज भी सबसे पसंदीदा गिफ्ट और सेल्फ-पर्चेज विकल्प बना हुआ है, जो सोने के गहनों, स्मार्टफोन्स और लग्जरी घड़ियों से भी आगे है। देशभर के टियर 1 से टियर 5 शहरों में करीब 6.7 करोड़ महिलाओं तक इसका बाजार फैल रहा है। साथ ही, 2030 तक हाई-इनकम परिवारों की संख्या में 16% बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे डायमंड की मांग और तेजी से बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, भारत अब वैश्विक डायमंड बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बन चुका है। डायमंड अब सिर्फ खास मौकों की चीज नहीं रहे, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। यह बदलाव उस नई पीढ़ी को दर्शाता है जो अपने स्टाइल और पहचान को हर दिन जीना चाहती है, न कि उसे किसी खास दिन के लिए संभालकर रखना।