जर्मनी की ऑटोमोटिव सप्लायर कंपनी MAHLE ने कमर्शियल व्हीकल सेक्टर के डीकार्बोनाइजेशन के लिए टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल (Technology Neutral) दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की है। कंपनी का कहना है कि केवल बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) भविष्य की सभी परिवहन आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते। इसके लिए हाइड्रोजन, रिन्यूएबल फ्यूल और रेंज एक्सटेंडर टेक्नोलॉजी को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
कंपनी ने Media Tech Day 2026 के दौरान अपने नए रेंज एक्सटेंडर सिस्टम और रेयर-अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक मोटर का अनावरण करते हुए यह बात कही। MAHLE के ग्रुप मैनेजमेंट बोर्ड के चेयरमैन और CEO आर्न्ड फ्रांज (Arnd Franz) ने कहा कि सड़क परिवहन से CO₂ उत्सर्जन कम करने के लिए बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन और आंतरिक दहन इंजन (ICE) के लिए रिन्यूएबल फ्यूल का संयुक्त उपयोग आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि रेंज एक्सटेंडर सिस्टम को इलेक्ट्रिफिकेशन को बढ़ावा देने वाली तकनीक के रूप में नियमों और नीतियों में शामिल किया जाना चाहिए।
फ्रांज के अनुसार, कमर्शियल व्हीकल्स के डीकार्बोनाइजेशन के लिए केवल नई तकनीक पर्याप्त नहीं है। इसके साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन, किफायती ऊर्जा भंडारण समाधान और सहयोगी सरकारी नीतियों की भी जरूरत होगी, ताकि फ्लीट ऑपरेटर बिना उत्पादकता से समझौता किए स्वच्छ तकनीकों को अपना सकें।
MAHLE का अनुमान है कि अगले एक दशक तक इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) वाले कमर्शियल वाहन बाजार में प्रमुख भूमिका निभाते रहेंगे। कंपनी के अनुसार, इनकी हिस्सेदारी वर्तमान लगभग 83% से घटकर 2035 तक लगभग 73% रहने की संभावना है। ऐसे में HVO100 बायो-डीजल, बायो-LNG और हाइड्रोजन जैसे रिन्यूएबल फ्यूल मौजूदा और नए दोनों प्रकार के वाहनों से उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसका नया रेंज एक्सटेंडर सिस्टम इलेक्ट्रिक ट्रकों के सामने मौजूद दो प्रमुख चुनौतियों सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रेंज एंग्जायटी का समाधान कर सकता है। यह सिस्टम बैटरी-इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन के साथ एक छोटे इंटरनल कम्बशन इंजन को जोड़ता है, जो केवल जनरेटर के रूप में काम करता है। इससे ट्रकों को 800 किलोमीटर से अधिक की ड्राइविंग रेंज मिलती है, जबकि बैटरी का आकार और वाहन का वजन भी कम रहता है।
MAHLE का मानना है कि कमर्शियल व्हीकल उद्योग में भविष्य मल्टी-पावरट्रेन रणनीति का होगा। शहरी और क्षेत्रीय परिवहन में जहां बैटरी-इलेक्ट्रिक ट्रक प्रमुख भूमिका निभाएंगे, वहीं लंबी दूरी के संचालन के लिए हाइड्रोजन फ्यूल-सेल, रिन्यूएबल फ्यूल और रेंज एक्सटेंडर जैसी तकनीकों की आवश्यकता बनी रहेगी। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) भी मानती है कि अलग-अलग माल परिवहन आवश्यकताओं के लिए विभिन्न शून्य और निम्न-उत्सर्जन तकनीकों का उपयोग जरूरी होगा।
इस बीच भारत का कमर्शियल व्हीकल बाजार भी मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अनुसार, FY2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में घरेलू कमर्शियल व्हीकल होलसेल्स 18.3% बढ़कर 2,64,831 यूनिट पर पहुंच गई, जो पहली तिमाही का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इस वृद्धि को रिप्लेसमेंट डिमांड, माइनिंग और सीमेंट सेक्टर की मजबूत गतिविधियों का समर्थन मिला, जबकि निर्यात में भी 43.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हालांकि, भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है। वर्तमान में इनका उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक बसों और शहरी लॉजिस्टिक्स में इस्तेमाल होने वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल्स तक केंद्रित है। मीडियम और हेवी-ड्यूटी ट्रकों में इलेक्ट्रिफिकेशन की गति अभी भी उच्च शुरुआती लागत, सीमित चार्जिंग नेटवर्क और लंबी दूरी की परिचालन जरूरतों के कारण धीमी बनी हुई है। यही वजह है कि MAHLE जैसी कंपनियां बैटरी-इलेक्ट्रिक तकनीक के साथ रेंज एक्सटेंडर जैसे विकल्पों को भी बढ़ावा दे रही हैं।
कंपनी ने कहा कि अगले पांच वर्षों में वह कमर्शियल व्हीकल बाजार की तुलना में अधिक तेज़ी से वृद्धि की उम्मीद कर रही है। MAHLE विशेष रूप से थर्मल मैनेजमेंट मॉड्यूल, इलेक्ट्रिक फैन, चार्जिंग कनेक्शन बॉक्स, बैटरी कूलिंग प्लेट और ट्रैक्शन मोटर जैसे इलेक्ट्रिफिकेशन उत्पादों में बड़े अवसर देख रही है, जबकि आंतरिक दहन इंजन वाले वाहनों के लिए भी अपने उत्पादों की आपूर्ति जारी रखेगी।
आर्न्ड फ्रांज ने कहा, "जलवायु-तटस्थ (Climate-Neutral) सड़क परिवहन तकनीकी और आर्थिक दोनों दृष्टि से संभव है, लेकिन इसके लिए उद्योग, सरकार और ग्राहकों को मिलकर समन्वित तरीके से काम करना होगा।"