भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की आवश्यकता बन चुका है। यह बात आईआईटी मद्रास के इंस्टीट्यूट प्रोफेसर एवं इमर्सिव टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप लैब्स (ITEL) के चेयरमैन डॉ. अशोक झुनझुनवाला ने Entrepreneur India EV Conference में "What Will Define India's EV Growth in the Next Five Years" विषय पर अपने मुख्य भाषण के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी लगभग 85% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। हाल के वैश्विक घटनाक्रमों और तेल की बढ़ती कीमतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश को तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना होगा। उनके अनुसार ईवी तकनीक अब परिपक्व हो चुकी है और अधिकांश वाहन श्रेणियों में आर्थिक रूप से भी व्यवहार्य बन गई है। अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों के लिए इसे अपनाना आसान बनाना है।
डॉ. झुनझुनवाला ने कहा कि देश के बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सहित कई शहरों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है और हर वर्ष लाखों लोगों की मौत प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं के कारण होती है। ऐसे में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन वाले इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण कम करने का प्रभावी समाधान हैं।
पेट्रोल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन कहीं अधिक ऊर्जा दक्ष होते हैं। जहां पेट्रोल वाहन केवल लगभग 25 प्रतिशत ऊर्जा का उपयोग कर पाते हैं, वहीं इलेक्ट्रिक वाहन 80 से 90 प्रतिशत तक ऊर्जा दक्षता हासिल करते हैं। इससे ऊर्जा की बचत के साथ कार्बन उत्सर्जन भी काफी कम होता है।
ईवी अपनाने की सबसे बड़ी बाधा चार्जिंग सुविधा को बताते हुए उन्होंने कहा कि अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले लोगों को अपने पार्किंग स्थान पर चार्जर लगाने में कई प्रशासनिक और संस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने "राइट टू चार्ज" कानून की आवश्यकता पर जोर दिया। इस प्रस्तावित कानून के तहत प्रत्येक ईवी मालिक को अपने घर या पार्किंग में चार्जर लगाने का कानूनी अधिकार मिलेगा और हाउसिंग सोसाइटी या अन्य संस्थाएं इसमें अनावश्यक बाधा नहीं डाल सकेंगी।
भारत बैटरी पैक निर्माण, इलेक्ट्रिक मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और चार्जिंग उपकरणों के स्थानीय उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कई भारतीय कंपनियां बैटरी सेल निर्माण, बैटरी रीसाइक्लिंग और नई बैटरी तकनीकों पर निवेश कर रही हैं। हालांकि उन्होंने अगली पीढ़ी की बैटरी तकनीक और सॉफ्टवेयर विकास में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
डॉ. झुनझुनवाला के अनुसार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन अब लगभग पेट्रोल वाहनों की कीमत के बराबर पहुंच चुके हैं, जबकि चारपहिया ईवी भी तेजी से कीमत समानता की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैटरी की लागत में लगातार गिरावट से आने वाले महीनों में EV और अधिक किफायती होंगे। साथ ही उन्होंने सरकार से टैक्स प्रोत्साहन जारी रखने और पुराने पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने (रेट्रोफिटिंग) को बढ़ावा देने की भी अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने से शहरी परिवहन की सभी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। आईआईटी मद्रास भविष्य के लिए ऐसे स्मार्ट, स्वचालित और ऊर्जा-कुशल शहरी परिवहन सिस्टम पर काम कर रहा है, जो शहरों में कम समय में तेज, सुविधाजनक और हरित यात्रा सुनिश्चित कर सके।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. झुनझुनवाला ने विश्वास जताया कि अगले पांच वर्षों में भारत में नए वाहनों की बड़ी हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक होगी। उन्होंने कहा कि यदि मजबूत नीतियां, बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी रिसाइक्लिंग और स्वदेशी तकनीकी इनोवेशन साथ-साथ आगे बढ़ते हैं, तो भारत न केवल ईवी अपनाने में बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी उद्योग का नेतृत्व करने में भी सक्षम होगा।