आयुष शिक्षा, रिसर्च और डिजिटल हेल्थ सेवाओं को देश की सभी प्रमुख भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) ने बहुभाषी डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य AI आधारित भाषा तकनीकों की मदद से आयुष ज्ञान और सेवाओं को देशभर के लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाना है।
छात्रों को अपनी भाषा में मिलेगा आयुष ज्ञान
इस समझौते के बाद आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा-रिग्पा जैसी आयुष प्रणालियों से जुड़ी डिजिटल सामग्री को भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध कराने की तैयारी की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों, शोधकर्ताओं, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई और रिसर्च सामग्री तक पहुंच मिलेगी। इससे क्षेत्रीय भाषाओं में आयुष शिक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
AI तकनीक से आसान होगा अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस सहयोग के तहत भाषिणी प्लेटफॉर्म की AI-संचालित तकनीकों को आयुष ग्रिड के पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल टूल्स में जोड़ा जाएगा। इसके जरिए आयुष से जुड़ी सामग्री का तेज़ अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन और वॉइस आधारित सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इससे देश के अलग-अलग भाषायी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आयुष सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
'भाषिणी राजयम' पहल के तहत होगा एकीकरण
यह साझेदारी “भाषिणी राजयम - एक भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम” के तहत की गई है। इसका उद्देश्य भारत के National Language Digital Public Infrastructure यानी भाषिणी प्लेटफॉर्म को आयुष मंत्रालय की डिजिटल सेवाओं से जोड़ना है।
आयुष मंत्रालय पहले से ही “Ayush Grid” पहल के माध्यम से हेल्थकेयर, रिसर्च, क्षमता निर्माण, दवा प्रशासन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर काम कर रहा है। अब इन सेवाओं को बहुभाषी रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी लाई जाएगी।
रिसर्च और हेल्थ टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल के तहत केवल अनुवाद ही नहीं, बल्कि आयुष क्षेत्र के लिए विशेष multilingual terminology systems भी विकसित किए जाएंगे। इसके जरिए आयुष से जुड़े तकनीकी शब्दों को अलग-अलग भारतीय भाषाओं में मानकीकृत किया जाएगा। साथ ही, भविष्य के लिए AI आधारित हेल्थ मॉडल, वॉइस-इनेबल्ड सिस्टम और स्मार्ट हेल्थ टेक्नोलॉजी तैयार करने पर भी काम किया जाएगा। इससे हेल्थ टेक्नोलॉजी और रिसर्च सेक्टर में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
डॉक्टर और मरीज अपनी भाषा में कर सकेंगे संवाद
कार्यक्रम के दौरान डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन ने कई AI आधारित डेमो भी प्रस्तुत किए। इनमें AI-सक्षम डॉक्टर-मरीज प्रिस्क्रिप्शन जनरेशन सिस्टम, वॉइस आधारित CV निर्माण, मीटिंग ट्रांसक्रिप्शन और भारतीय पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण से जुड़े टूल्स शामिल थे। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में मरीज डॉक्टर से अपनी भाषा में बात कर सकेंगे और AI सिस्टम उसी भाषा में डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने में मदद करेगा। इससे ग्रामीण और क्षेत्रीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकती है।
शिक्षा और रिसर्च में बढ़ेगी पहुंच
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि आयुष प्रणालियों में भारत का विशाल पारंपरिक ज्ञान मौजूद है और इसे हर भारतीय भाषा में उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग बहुभाषी AI क्षमताओं को मजबूत करेगा और भविष्य के लिए ऐसे डिजिटल सिस्टम तैयार करेगा जो भाषायी सीमाओं से परे जाकर नागरिकों की मदद कर सकें।
समावेशी डिजिटल हेल्थ सिस्टम की ओर बड़ा कदम
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने कहा कि यह पहल Inclusive Healthcare और Citizen-Centric Digital Services को मजबूत करेगी। उनके अनुसार, AI आधारित बहुभाषी तकनीकें जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बना सकती हैं।
वहीं डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि भाषा-समावेशी AI सिस्टम डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं।
छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल हेल्थ सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे आयुष शिक्षा, हेल्थ रिसर्च, डिजिटल लर्निंग और AI आधारित स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में छात्र अपनी भाषा में रिसर्च सामग्री पढ़ सकेंगे, हेल्थ डेटा पर काम कर सकेंगे और भारतीय भाषाओं पर आधारित AI मॉडल विकसित करने के नए अवसर प्राप्त कर सकेंगे।