केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑरेंज इकोनॉमी पर बोलते हुए बताया कि एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर देश का तेज़ी से बढ़ता हुआ उद्योग है। बजट भाषण में उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में लगभग 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। आने वाले समय में इसमें रोज़गार के बड़े अवसर बनेंगे। इसी वजह से देशभर में 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में इससे जुड़ी विशेष लैब्स स्थापित की जाएंगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि ऑरेंज इकोनॉमी से जुड़ी शिक्षा को लेकर सरकार ने ठोस योजना बनाई है, ताकि भारतीय युवा इस क्षेत्र का पूरा लाभ उठा सकें। इसके लिए व्यवस्थित और व्यावहारिक शिक्षा दी जाएगी। देश के कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को इस बड़े अभियान से जोड़ा जाएगा और कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में ऑरेंज इकोनॉमी से संबंधित लैब्स बनाई जाएंगी।
अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी को समर्थन दिया जाएगा, ताकि देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जा सकें।
उन्होंने बताया कि इस पहल से युवाओं को डिजिटल और रचनात्मक कौशल की ट्रेनिंग मिलेगी। ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा मिलने से नए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक स्तर पर क्रिएटिव इंडस्ट्री में अपनी पहचान और मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑरेंज इकोनॉमी के तहत रचनात्मकता, संस्कृति, डिजिटल कंटेंट और नवाचार से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक विकास तेज़ होगा और युवाओं की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा।
इसके साथ ही वित्त मंत्री ने आयुष सेक्टर को मज़बूत करने के लिए भी अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद आयुर्वेद को दुनिया भर में ज्यादा पहचान और स्वीकार्यता मिली है। आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार कई ठोस कदम उठाएगी।
वित्त मंत्री ने बताया कि आयुष से जुड़ी फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। इसके अलावा जामनगर में स्थित डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को और सशक्त किया जाएगा, ताकि भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सके। अत: बजट 2026–27 में सरकार ने साफ किया है कि आने वाले समय में युवा शक्ति, क्रिएटिव इंडस्ट्री और पारंपरिक चिकित्सा भारत की विकास यात्रा के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे।