इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ये नई गाइडलाइंस देशभर में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने, स्कूल गवर्नेंस को मजबूत करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार का “जन आंदोलन” बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
शिक्षा व्यवस्था में बढ़ेगी समुदाय की भागीदारी
कार्यक्रम में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई 'स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गाइडलाइंस 2026' देश के लगभग 15 लाख स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के विजन को जमीन पर लागू करने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, स्थानीय समुदायों और समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों की भूमिका होगी और मजबूत
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पहले की स्कूल मैनेजमेंट कमेटी व्यवस्था मुख्य रूप से स्कूल ग्रांट की निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक कार्यों तक सीमित थी। लेकिन अब शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियां काफी बदल चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि आज बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, Foundational Literacy and Numeracy (FLN), डिजिटल पारदर्शिता, बेहतर लर्निंग आउटकम और समुदाय की भागीदारी जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। नई गाइडलाइंस इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं।
सूद ने कहा कि अब स्कूल मैनेजमेंट कमेटियां केवल निगरानी संस्था नहीं रहेंगी, बल्कि “School Community Governing Institutions” के रूप में काम करेंगी। ये समितियां बच्चों के समग्र विकास, अकादमिक गुणवत्ता, छात्र कल्याण, सुरक्षा, समावेशिता, डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाएंगी।
अभिभावकों और स्कूलों के बीच मजबूत होगा संबंध
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बच्चों के बेहतर सीखने के लिए समाज और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गाइडलाइंस स्कूलों और अभिभावकों के बीच की दूरी कम करेंगी और स्थानीय समुदाय को स्कूल प्रबंधन से अधिक जोड़ेंगी।
उन्होंने बताया कि इन गाइडलाइंस के तहत स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के बीच एक मजबूत पुल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य साझा जिम्मेदारी के जरिए बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है।
बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष फोकस
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CWSN) के सहयोग के लिए भी प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने बताया कि नई गाइडलाइंस में मेंटरिंग, सामुदायिक सहयोग और स्कूलों के प्रति स्थानीय जिम्मेदारी को भी विशेष महत्व दिया गया है। सरकार चाहती है कि हर स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र न होकर सामाजिक विकास और सामुदायिक सहयोग का भी केंद्र बने।
शिक्षा को जन आंदोलन बनाने पर जोर
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि 'स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गाइडलाइंस 2026' का उद्देश्य स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को एक स्थायी संस्कृति में बदलना है, ताकि आने वाले समय में यह शिक्षा सुधार का एक बड़ा जन आंदोलन बन सके।
उन्होंने ‘विद्यांजलि’ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था हमेशा से सामुदायिक भागीदारी पर आधारित रही है। नई गाइडलाइंस उसी परंपरा को फिर से मजबूत करने का प्रयास हैं, जहां स्कूल समाज के केंद्र में हों और लोग शिक्षा सुधार में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ी पहल
आशीष सूद ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत शिक्षा व्यवस्था सबसे अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य कक्षाओं में तैयार होगा और इसके लिए स्कूलों को अधिक जवाबदेह, सुरक्षित और आधुनिक बनाना जरूरी है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि नई 'स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गाइडलाइंस 2026' स्कूलों में पारदर्शिता, बेहतर प्रबंधन, सामुदायिक सहयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।