शिक्षा, उद्योग और सरकार के प्रतिनिधि हुए शामिल
इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। “भारत के लिए IITM के साथ मिलकर निर्माण” थीम पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा संस्थानों, उद्योग जगत और सरकार के बीच ऐसा सहयोगात्मक ढांचा तैयार करना था, जो भारत को तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा सके।
शिक्षा, उद्योग और सरकार के प्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, रिसर्च संस्थानों के प्रतिनिधि और NTPC, BPCL तथा HSBC जैसी बड़ी कंपनियों की नेतृत्व टीमें भी शामिल हुईं। इस दौरान शिक्षा और टेक्नोलॉजी के भविष्य, रिसर्च आधारित विकास और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
IIT Madras बना रिसर्च और इनोवेशन का प्रमुख केंद्र
अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) देश में रिसर्च-आधारित और समाज-केंद्रित इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, हेल्थ टेक और एडवांस रिसर्च जैसे क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को नई दिशा दे रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई नीतियां बनाई जा रही हैं। सरकार ने रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का विशेष फंड निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य भारत के रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत बनाना और नई खोजों को प्रयोगशालाओं से निकालकर उद्योग तथा समाज तक पहुंचाना है।
'लैब से मार्केट' तक पहुंचे रिसर्च
धर्मेंद्र प्रधान ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि रिसर्च को केवल रिसर्च पेपर, पेटेंट या अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी मजबूत इनोवेशन सिस्टम की असली सफलता इस बात में है कि वह शोध को उपयोगी उत्पादों, नई तकनीकों और समाज के लिए प्रभावी समाधानों में कितनी तेजी से बदल सकता है।
उन्होंने कहा कि आज देश में लगभग 70 प्रतिशत रिसर्च निवेश सरकार द्वारा किया जा रहा है, जो सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, भविष्य में सरकार और उद्योग जगत के बीच 50:50 की साझेदारी बेहद जरूरी होगी, ताकि रिसर्च और इनोवेशन को अधिक गति मिल सके और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीकों का विकास किया जा सके।
विकसित भारत 2047 के विजन पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने “विकसित भारत 2047” के विजन पर बात करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में दुनिया के कई देश भारत के विकास मॉडल को अपनाने की कोशिश करेंगे। खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भारत शिक्षा, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। ऐसे में भारतीय विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि भारत का इनोवेशन इकोसिस्टम केवल मजबूत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सहयोगात्मक और व्यवस्थित भी होना चाहिए। इसी दिशा में ‘भारत इनोवेट्स’ जैसे कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों और तकनीकी संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहे हैं।
नई रिसर्च साझेदारियों की घोषणा
सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने NTPC, BPCL और HSBC के साथ रणनीतिक साझेदारियों की घोषणा की। इन साझेदारियों का उद्देश्य हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, सतत विकास और भविष्य की उभरती तकनीकों पर रिसर्च को बढ़ावा देना है। इन कंपनियों के सहयोग से विशेष रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां छात्र, रिसर्चर्स और वैज्ञानिक मिलकर नई तकनीकों पर काम करेंगे।
छात्रों और स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा फायदा
इस अवसर पर जयंत चौधरी ने कहा कि IIT इकोसिस्टम भारत में डीप-टेक रिसर्च और इनोवेशन को नई गति दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन इस बात का उदाहरण है कि कैसे शिक्षा, उद्योग और सरकार मिलकर नई तकनीकों को विकसित कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से रोबोटिक सर्जरी, कार्डियक रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में हो रहे नवाचारों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोगात्मक मंच छात्रों और युवा रिसर्चर्स को वास्तविक उद्योग समस्याओं पर काम करने का अवसर देते हैं। इससे छात्रों की तकनीकी दक्षता बढ़ती है और उन्हें रोजगार तथा स्टार्टअप के नए अवसर मिलते हैं
भारत को मिलेगा ग्लोबल टेक्नोलॉजी हब का दर्जा
सम्मेलन के दौरान आयोजित टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के 15 उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा विकसित अत्याधुनिक तकनीकों और रिसर्च प्रोजेक्ट्स को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में हेल्थकेयर, सस्टेनेबिलिटी, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, एडवांस मटेरियल्स और इंडस्ट्री 4.0 जैसी तकनीकों से जुड़े मॉडल और समाधान प्रस्तुत किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के टेक्नोलॉजी समिट भारत के शिक्षा और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देंगे। इससे भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और रिसर्च हब बनाने के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।