प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की नई शिक्षा और इनोवेशन संस्कृति का प्रतीक बताया:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए GalaxEye की पूरी टीम और संस्थापकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत के युवाओं की तकनीकी क्षमता, रिसर्च स्किल्स और स्टार्टअप इनोवेशन को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि देश के युवा अब केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नई तकनीक और समाधान विकसित करने वाले इनोवेटर्स बन रहे हैं।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर को मिली नई पहचान
बेंगलुरु में स्थित स्पेस टेक स्टार्टअप GalaxEye ने अपने पहले कमर्शियल सैटेलाइट ‘दृष्टि’ को Falcon 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में लॉन्च किया। कंपनी के अनुसार, यह दुनिया का पहला OptoSAR सैटेलाइट है। इस मिशन ने भारत के निजी स्पेस सेक्टर को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
करीब 190 किलोग्राम वजनी Mission Drishti भारत का सबसे बड़ा निजी तौर पर विकसित अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट भी माना जा रहा है। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब हाई-एंड स्पेस टेक्नोलॉजी विकसित करने में सक्षम हो रहे हैं।
छात्रों के लिए रिसर्च और स्पेस टेक्नोलॉजी में नए अवसर
मिशन दृष्टि (Mission Drishti) में पहली बार Electro-Optical (EO) और Synthetic Aperture Radar (SAR) सेंसर को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है। इस तकनीक की मदद से सैटेलाइट दिन और रात दोनों समय तथा हर मौसम में पृथ्वी की हाई-क्वालिटी तस्वीरें ले सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी उन्नत तकनीक छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए स्पेस साइंस, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिमोट सेंसिंग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तैयार करेगी। इससे इंजीनियरिंग और साइंस के छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों पर काम करने का मौका मिलेगा।
नई शिक्षा नीति और इनोवेशन कल्चर को मिल रहा बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में इनोवेशन और रिसर्च को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत भी छात्रों को स्किल बेस्ड लर्निंग, रिसर्च और टेक्नोलॉजी इनोवेशन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि Mission Drishti जैसे प्रोजेक्ट यह दिखाते हैं कि यदि छात्रों और युवाओं को सही अवसर, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सहयोग मिले, तो वे वैश्विक स्तर की उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
कृषि, रक्षा और आपदा प्रबंधन में भी मददगार होगी तकनीक
GalaxEye ने इस तकनीक को “SyncFused OptoSAR” नाम दिया है। कंपनी के अनुसार, यह तकनीक कृषि, आपदा प्रबंधन, रक्षा, पर्यावरण निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की तकनीकों का उपयोग भविष्य में स्मार्ट सिटी, क्लाइमेट रिसर्च और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ेगा। इससे टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा और इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।
युवाओं को विज्ञान और स्टार्टअप्स की ओर प्रेरित करेगा मिशन
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि Mission Drishti की सफलता देश के छात्रों और युवा उद्यमियों को विज्ञान, रिसर्च और स्पेस टेक्नोलॉजी की ओर प्रेरित करेगी। यह मिशन दिखाता है कि भारतीय युवा अब केवल तकनीक का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे, बल्कि विश्वस्तरीय तकनीक विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।