NCERT ने बदला स्कूल शिक्षा का ढांचा, अब शारीरिक शिक्षा होगी जरूरी

NCERT ने बदला स्कूल शिक्षा का ढांचा, अब शारीरिक शिक्षा होगी जरूरी

NCERT ने बदला स्कूल शिक्षा का ढांचा, अब शारीरिक शिक्षा होगी जरूरी
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा 3 से 10 तक शारीरिक शिक्षा (Physical Education) को अनिवार्य विषय बना दिया है।


इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखकर उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर भी ध्यान देना है। नई व्यवस्था के तहत खेल, फिटनेस, योग और स्वास्थ्य शिक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

कक्षा 9 के लिए लॉन्च हुई नई किताब ‘खेल प्रवीण’

इसी बदलाव के तहत NCERT ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए नई पुस्तक ‘खेल प्रवीण’ शुरू की है। यह किताब छात्रों को खेल और फिटनेस के प्रति जागरूक बनाने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य की बेहतर समझ देने के लिए तैयार की गई है। इसमें पारंपरिक शारीरिक अभ्यास और रटने वाली पढ़ाई से आगे बढ़कर बच्चों को फिटनेस, खेल विज्ञान, योग और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में आधुनिक तरीके से जानकारी दी जाएगी।

खेल के साथ स्वास्थ्य और जीवनशैली पर भी फोकस

‘खेल प्रवीण’ के जरिए अब शारीरिक शिक्षा केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें मानव शरीर की कार्यप्रणाली, खेलों का इतिहास, नैतिक मूल्य, स्वस्थ जीवनशैली, फिटनेस लक्ष्य तय करना और खेलों में करियर के अवसरों जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की गई हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल खेलना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें फिट और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

नई व्यवस्था में छात्रों का मूल्यांकन भी अलग तरीके से किया जाएगा। कुल मूल्यांकन में 40 प्रतिशत हिस्सा थ्योरी, 40 प्रतिशत प्रैक्टिकल और 20 प्रतिशत प्रोजेक्ट वर्क का होगा। प्रोजेक्ट कार्य के तहत छात्रों को समावेशी खेल तैयार करना, फिटनेस सर्वे करना और स्थानीय खेल परंपराओं को समझने जैसे कार्य दिए जाएंगे। इससे छात्र किताबों में सीखी गई बातों को व्यवहारिक रूप में भी समझ सकेंगे।

भारतीय पारंपरिक खेलों को भी मिलेगा बढ़ावा

इस नई पुस्तक की एक खास बात यह है कि इसमें भारत की पारंपरिक खेल विरासत को भी शामिल किया गया है। छात्रों को मल्लखंब, थांग-टा, गतका और कलारीपयट्टू जैसे स्वदेशी खेलों और पारंपरिक कलाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे बच्चों में शारीरिक फिटनेस के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

NCERT के अनुसार, ‘खेल प्रवीण’ केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, टीमवर्क और सामाजिक कौशल को भी मजबूत बनाने में मदद करेगी। खेल आधारित शिक्षा से बच्चों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल स्कूल शिक्षा में सकारात्मक और आधुनिक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खेलों को पढ़ाई का अभिन्न हिस्सा बनाकर छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत यह पहल बच्चों को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


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