इसी दिशा में Friends Union for Energising Lives (FUEL) के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. केतन देशपांडे पिछले 18 वर्षों से युवाओं, विशेष रूप से पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों और वंचित समुदायों के लिए बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल शिक्षा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार, स्किल्स और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है।
छोटे शहरों से शुरू हुआ सफर, बना राष्ट्रीय आंदोलन
महाराष्ट्र के लातूर में जन्मे डॉ. केतन देशपांडे ने अपनी स्कूली शिक्षा परभणी, अहिल्यानगर (अहमदनगर) और भुसावल जैसे शहरों में पूरी की। छोटे शहरों में शिक्षा और करियर मार्गदर्शन की कमी को करीब से देखने के कारण उन्होंने युवाओं की समस्याओं को गहराई से समझा।
इन्हीं अनुभवों से प्रेरित होकर उन्होंने वर्ष 2007 में FUEL की स्थापना की। शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन समय के साथ यह देशभर में युवाओं को शिक्षा, करियर गाइडेंस और स्किल ट्रेनिंग देने वाला बड़ा सामाजिक संगठन बन गया।
10 लाख से अधिक युवाओं तक पहुंचा FUEL
FUEL ने अब तक देशभर में 10 लाख से अधिक युवाओं को करियर काउंसलिंग, स्किल ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप और रोजगार आधारित शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से सहायता प्रदान की है। संगठन ने भविष्य की जरूरतों के अनुसार युवाओं को तैयार करने के लिए डिजिटल स्किल्स, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े कार्यक्रम शुरू किए हैं।
इसके अलावा, संगठन 2.9 लाख से अधिक युवाओं को फ्यूचर-रेडी स्किल्स और वोकेशनल ट्रेनिंग दे चुका है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को 2,900 से अधिक स्कॉलरशिप भी प्रदान की गई हैं।
AI, बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों पर फोकस
डॉ. केतन देशपांडे का मानना है कि आने वाले समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं होगी। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक स्किल्स से लैस करना जरूरी है।
वे “फ्यूचर-रेडी एजुकेशन” की वकालत करते हैं, जिसमें ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को भी नई तकनीकों की शिक्षा देकर रोजगार योग्य बनाया जा सके। उनका कहना है कि भारत की बड़ी युवा आबादी को सही दिशा और आधुनिक स्किल्स मिलें, तो देश वैश्विक स्तर पर मजबूत प्रतिभा केंद्र बन सकता है।
CSR और सामाजिक प्रभाव पर विशेष जोर
डॉ. देशपांडे ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) में पीएचडी की है और वे CSR परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव, Social Return on Investment (SROI) और Sustainable Development Goals (SDGs) पर आधारित रणनीतियों पर काम करते हैं।
FUEL ने HDFC Bank, HSBC, Standard Chartered Bank, SBI, Microsoft, Shell, Cipla, Tata Trusts और NASSCOM Foundation जैसी 78 से अधिक कंपनियों और संस्थानों के साथ साझेदारी की है। इन सहयोगों के जरिए संगठन ने सामाजिक विकास परियोजनाओं के लिए 24 मिलियन डॉलर से अधिक संसाधन जुटाए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से करियर गाइडेंस, स्कॉलरशिप, डिजिटल लर्निंग, रोजगार सहायता और उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही पहचान
FUEL का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। संगठन ने इंडोनेशिया, युगांडा और पोलैंड जैसे देशों में भी विभिन्न कार्यक्रमों और साझेदारियों के माध्यम से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) जैसे बहुपक्षीय संगठनों के साथ सहयोग से FUEL को वैश्विक शिक्षा और स्किलिंग मॉडल्स को समझने और उन्हें भारतीय जरूरतों के अनुसार लागू करने में मदद मिली है।
युवाओं को “सिर्फ नौकरी नहीं, उद्देश्य” खोजने की प्रेरणा
डॉ. देशपांडे युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित सोच रखने के बजाय उद्देश्य आधारित करियर अपनाने की प्रेरणा देते हैं। वे “Management by Leadership & Vision” और “The Heartfulness Way to Leadership” जैसे विचारों पर जोर देते हैं, जिसमें संवेदनशीलता, समावेशिता और सामाजिक जिम्मेदारी को नेतृत्व का हिस्सा माना जाता है। उनका मानना है कि युवा अगर अपने करियर को समाज के विकास से जोड़कर देखें, तो वे लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
भविष्य की दिशा: FUEL SkillTech & Entrepreneurship University
डॉ. केतन देशपांडे वर्तमान में प्रस्तावित FUEL SkillTech & Entrepreneurship University की स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य भविष्य की स्किल्स, इंडस्ट्री सहयोग, उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ते हुए रोजगार आधारित शिक्षा मॉडल तैयार करना है।
यह विश्वविद्यालय सर्टिफिकेट से लेकर पोस्टग्रेजुएट स्तर तक के कार्यक्रम उपलब्ध कराएगा, जिनमें फ्यूचर स्किल्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, साइंस, कॉमर्स और ह्यूमैनिटीज जैसे विषय शामिल होंगे।
महाराष्ट्र सरकार ने इस पहल के लिए Letter of Intent भी जारी किया है। यह भारत का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बनने की दिशा में कदम माना जा रहा है, जो विशेष रूप से फ्यूचर स्किल्स और पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों पर केंद्रित होगा।