यह सेंटर 2026 में देशभर में स्थापित किए जा रहे कॉम्पिटेंसी सेंटर्स की श्रृंखला का दूसरा केंद्र है। इससे पहले फरवरी 2026 में चेन्नई में ऑटोमोटिव कॉम्पिटेंसी सेंटर (ACC) शुरू किया गया था। नया SMCC सेंटर एक्सपीरिएंशियल लर्निंग, इंडस्ट्री सहयोग, रिसर्च और फैकल्टी डेवलपमेंट को एक साथ जोड़ते हुए छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और शिक्षकों को वास्तविक औद्योगिक चुनौतियों पर काम करने का अवसर देगा।
बेंगलुरु को चुना गया रणनीतिक केंद्र
बेंगलुरु को इस सेंटर के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह भारत का प्रमुख टेक्नोलॉजी और औद्योगिक हब माना जाता है। यहां एयरोस्पेस, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी बड़ी कंपनियां, MSMEs और वैश्विक उद्योग मौजूद हैं।
SMCC का उद्देश्य वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग समस्याओं का समाधान निकालना है। इसके लिए सेंटर में इंडस्ट्री आधारित प्रोजेक्ट्स, प्रैक्टिकल रिसर्च और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग पर जोर दिया जाएगा।
MSMEs को मिलेगा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में सहयोग
SMCC का एक प्रमुख लक्ष्य MSMEs को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में मदद करना है। कई छोटे और मध्यम उद्योग नई तकनीकों को अपनाने में वित्तीय और तकनीकी चुनौतियों का सामना करते हैं। यह सेंटर उन्हें बिना भारी निवेश के आधुनिक तकनीकों को समझने और अपनाने का अवसर देगा।
MSMEs यहां अपने समाधान का परीक्षण कर सकेंगे, विशेषज्ञों और छात्रों के साथ मिलकर नए प्रोजेक्ट विकसित कर सकेंगे और बड़े स्तर पर लागू करने से पहले ROI का मूल्यांकन कर सकेंगे। इससे जोखिम और लागत दोनों कम होंगे।
इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों पर विशेष फोकस
इस सेंटर में मेकाट्रॉनिक्स, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IIoT), मैन्युफैक्चरिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (AI/ML), डिजिटल ट्विन्स, वर्चुअल कमीशनिंग और एडवांस्ड रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम किया जाएगा। इन तकनीकों का उपयोग उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
सेंटर केवल तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन तकनीकों को वास्तविक उद्योग समस्याओं के समाधान के रूप में इस्तेमाल करने पर भी ध्यान देगा।
आधुनिक लैब और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की सुविधा
सेंटर में Mechatronics, Machine Vision, Industry 4.0/5.0 Systems, Industrial Robotics, Extended Reality (XR) और Rapid Prototyping जैसी अत्याधुनिक लैब स्थापित की गई हैं।
इसके अलावा, यहां 2-3 दिन के शॉर्ट इंटेंसिव ट्रेनिंग प्रोग्राम और 6 महीने तक के विशेष कोर्स भी चलाए जाएंगे, जिन्हें इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इससे कामकाजी पेशेवर अपने कौशल को अपग्रेड कर सकेंगे और छात्रों को उद्योग से जुड़ी प्रैक्टिकल सीख मिलेगी।
छात्रों को मिलेगा इंडस्ट्री-रेडी बनने का अवसर
यह सेंटर छात्रों के लिए नई तकनीकों को सीखने और इंडस्ट्री-रेडी बनने का बड़ा मंच साबित होगा। यहां छात्रों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं मिलेगा, बल्कि वे AI आधारित मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और स्मार्ट फैक्ट्री टेक्नोलॉजी पर सीधे काम कर सकेंगे।
छात्रों को लाइव प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्री केस स्टडीज और रिसर्च आधारित गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी तकनीकी, विश्लेषणात्मक और समस्या समाधान क्षमता मजबूत होगी। इसके अलावा, उद्योग विशेषज्ञों और कंपनियों के साथ काम करने का अनुभव उन्हें बेहतर इंटर्नशिप और रोजगार अवसर दिलाने में मदद करेगा।
यह पहल छात्रों को इंडस्ट्री 4.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IIoT) और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए तैयार करेगी। साथ ही, इनोवेशन और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देते हुए छात्र अपने नए आइडिया को प्रोटोटाइप और बिजनेस मॉडल में भी बदल सकेंगे।
भारत को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा
वी. रामगोपाल राव ने कहा कि बेंगलुरु में शुरू किया गया यह सेंटर शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह सेंटर छात्रों, शिक्षकों और उद्योगों को वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग चुनौतियों का समाधान खोजने और भारत को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
जी. सुंदर ने कहा कि यह पहल इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों के अनुरूप सीखने का माहौल तैयार करेगी। इससे छात्रों और प्रोफेशनल्स को ऐसे कौशल मिलेंगे जो लंबे समय तक उपयोगी रहेंगे और भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के डिजिटल बदलाव को गति देंगे।
इंडस्ट्री सहयोग और इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा
सेशनाथ बी ने कहा कि यह सेंटर भारत के औद्योगिक भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यहां भविष्य की तकनीकों को वास्तविक डेमोंस्ट्रेशन और प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट के जरिए दिखाया जाएगा, जिससे इंडस्ट्री और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।