केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्पेस लैब स्थापित करने की योजना की समीक्षा की। पहले चरण में 7 स्पेस लैब स्थापित किए जाएंगे, जहां छात्रों को सैटेलाइट सिस्टम, रॉकेट्री और मिशन डिजाइन में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल बनाना है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी से तेजी से बढ़ रहा स्पेस सेक्टर
बैठक के दौरान IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों और निजी भागीदारी की प्रगति पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों के बाद निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है और पूरे वैल्यू चेन में नए अवसर पैदा हुए हैं।
भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2019 में जहां कुछ ही स्टार्टअप्स थे, वहीं 2026 की शुरुआत तक उनकी संख्या 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट निर्माण, ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सर्विस और इन-ऑर्बिट सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नई योजनाएं
सरकार ने इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इसमें ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड शामिल है, जिसे SIDBI के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा है, ताकि ग्रोथ स्टेज स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिल सके। इसके अलावा ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड भी लागू किया गया है, जो शुरुआती नवाचारों को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने में मदद करेगा।
स्टार्टअप्स के लिए एक सीड फंड योजना भी लागू है, जिसके तहत शुरुआती चरण में काम कर रही कंपनियों को 1 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसके साथ ही उन्हें मेंटरशिप और इकोसिस्टम सपोर्ट भी प्रदान किया जाता है, जिससे वे अपने आइडिया को बेहतर तरीके से विकसित कर सकें।
स्किल डेवलपमेंट पर जोर, युवाओं को मिल रहा प्रशिक्षण
अंतरिक्ष क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं, जिनमें करीब 900 प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट दिया गया है। ये प्रशिक्षण सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च सिस्टम और स्पेस साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में दिए गए हैं। आने वाले समय में स्पेस लैब इस प्रक्रिया को और मजबूत करेंगे।
सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत कर रही है। इसमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन, स्टार्टअप्स के लिए साझा सैटेलाइट प्लेटफॉर्म और अहमदाबाद स्थित IN-SPACe टेक्निकल सेंटर में डिजाइन, टेस्टिंग और इंटीग्रेशन सुविधाओं का विस्तार शामिल है। साथ ही SSLV (स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) जैसे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रोग्राम भी आगे बढ़ रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा भारत का सहयोग
भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। देश ने 45 से अधिक देशों के साथ साझेदारी की है। हाल ही में सिंगापुर और UAE के साथ नए समझौते किए गए हैं। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भाग ले रही हैं और वैश्विक बाजार से जुड़ रही हैं।
IN-SPACe को अब तक स्टार्टअप्स, MSMEs, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों से 1000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 129 को मंजूरी दी जा चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शिक्षा और रोजगार के नए अवसर
इस पहल से छात्रों को नई और उन्नत तकनीकों- जैसे सैटेलाइट डिजाइन, रॉकेट्री, डेटा एनालिटिक्स और स्पेस साइबर सिक्योरिटी में व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर मिलेगा। इससे वे सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करके इंडस्ट्री-रेडी बन सकेंगे।
इसके अलावा, स्पेस सेक्टर के विस्तार से इंजीनियरिंग, रिसर्च, डेटा साइंस, एयरोस्पेस और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ेंगे। स्टार्टअप्स, निजी कंपनियों और सरकारी संस्थानों में युवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे रोजगार के विकल्प भी विविध होंगे।
यह पहल इनोवेशन और स्टार्टअप कल्चर को भी बढ़ावा देगी, जहां छात्र अपने आइडिया को प्रोजेक्ट और बिजनेस में बदल सकेंगे। साथ ही, स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री के साथ जुड़ाव से युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता मिलेगी और भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभरेगा।