खालसा यूनिवर्सिटी, अमृतसर में आयोजित 'हायर एजुकेशन पॉलिसी: नेविगेटिंग ग्लोबल चैलेंजेज एंड नेशनल प्रायोरिटीज' विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बदलाव अपनाते समय संस्थानों को अपने मूल- मूल्यों और नैतिकताओं से भी जुड़े रहना चाहिए।
वैश्विक विकास और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में संतुलन जरूरी
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि वैश्विक विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना बेहद जरूरी है। उच्च शिक्षा को समावेशी विकास, सामाजिक समानता और रोजगार के अवसर बढ़ाने में अहम भूमिका निभानी चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके।
राज्यपाल ने डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन माध्यमों से शिक्षा तक पहुंच आसान हो रही है, लेकिन इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल असमानता और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों को भी दूर करना जरूरी है।
नई शिक्षा नीति और लचीली पढ़ाई पर जोर
गुलाब चंद कटारिया ने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन शिक्षा क्षेत्र में नई सोच और संवाद को बढ़ावा देते हैं। सम्मेलन में उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति, बहुविषयक और लचीली पढ़ाई के महत्व पर चर्चा हुई, जैसा कि 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' में बताया गया है, साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
UGC के संयुक्त सचिव अमोल एम.अंधारे ने कहा कि जो संस्थान समाज और देश की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को ढालते हैं, उन्हें प्रोत्साहित और मजबूत किया जाना चाहिए।
देश-विदेश के विशेषज्ञों ने किया मंथन
इस सम्मेलन में देश-विदेश के कई विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति निर्माता शामिल हुए, जिन्होंने भारत और दुनिया में उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, नई चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर केयूए के प्रो-चांसलर मोहन सिंह छीना, वाइस-चांसलर मेहल सिंह और रजिस्ट्रार खुशविंदर कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
उच्च शिक्षा में सुधार की दिशा में अहम पहल
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इसमें नई तकनीकों जैसे डिजिटल लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म को अपनाने पर जोर दिया गया, जिससे शिक्षा अधिक सुलभ और प्रभावी बन सके। साथ ही, बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) और लचीली शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने, रिसर्च और इनोवेशन को मजबूत करने तथा उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी चर्चा हुई।
इस पहल से छात्रों के लिए नए कौशल सीखने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इस तरह के सम्मेलन न केवल शिक्षा क्षेत्र में नई दिशा तय करते हैं, बल्कि देश के समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं।