पहले यह मौका सीमित छात्रों के लिए था, लेकिन अब फाइनल ईयर के छात्र भी आवेदन कर सकेंगे। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें इंडस्ट्री के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।
स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, योजना हुई और आकर्षक
सरकार ने इस योजना को और ज्यादा आकर्षक बनाते हुए इंटर्नशिप करने वाले छात्रों के लिए मासिक वित्तीय सहायता को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया है। इसके साथ ही उम्र सीमा को भी बढ़ाकर 18 से 25 वर्ष कर दिया गया है। इस बदलाव से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल अनुभव लेने का मौका मिलेगा।
फाइनल ईयर के छात्रों के लिए खुले नए अवसर
सरकार के अनुसार, इस नई व्यवस्था से अंतिम वर्ष के छात्र विभिन्न सेक्टर्स की कंपनियों में पेड इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे उन्हें पढ़ाई के दौरान ही काम का अनुभव मिलेगा, जो उनके करियर के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
इंटर्नशिप के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देना होगा। इस सर्टिफिकेट में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इंटर्नशिप करने से उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। यह NOC विभागाध्यक्ष, डीन, प्रिंसिपल या ट्रेनिंग और प्लेसमेंट अधिकारी द्वारा जारी किया जा सकता है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
मंत्रालय ने बताया कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें अनुभव आधारित शिक्षा और इंडस्ट्री से जुड़ाव पर जोर दिया गया है। इस योजना के जरिए छात्रों को असली कार्यस्थल का अनुभव, स्किल्स और प्रोफेशनल माहौल की समझ मिलेगी। इस योजना के पायलट चरण में अब तक 300 से ज्यादा कंपनियां जुड़ चुकी हैं, जो अलग-अलग सेक्टर्स में इंटर्नशिप के अवसर दे रही हैं। इससे छात्रों को विविध क्षेत्रों में काम करने और अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनने का मौका मिल रहा है।
यह योजना 18 से 25 साल के भारतीय युवाओं के लिए खुली है और इसके लिए आवेदन आधिकारिक पोर्टल के जरिए ऑनलाइन किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि युवा पढ़ाई के साथ-साथ स्किल्स विकसित करें और नौकरी के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस
कुल मिलाकर, यह पहल युवाओं को व्यावहारिक ज्ञान देने, उनकी स्किल्स को मजबूत करने और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ ही करियर की मजबूत शुरुआत करने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा, यह योजना युवाओं को इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों के अनुसार तैयार करने में भी मदद करेगी। इंटर्नशिप के दौरान छात्र न केवल तकनीकी कौशल सीखेंगे, बल्कि कम्युनिकेशन, टीमवर्क, टाइम मैनेजमेंट और समस्या समाधान जैसी जरूरी सॉफ्ट स्किल्स भी विकसित कर पाएंगे। इससे वे नौकरी के लिए अधिक आत्मविश्वास के साथ तैयार होंगे।
अत: मुख्य रूप से यह योजना देश में स्किल गैप को कम करने, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और एक मजबूत व कुशल कार्यबल तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है, जो भारत की आर्थिक प्रगति को भी गति देगी।